भक्ति और उल्लास के बीच गूंजा कृष्ण जन्मोत्सवभागवत कथा के चतुर्थ दिवस में उमड़ा श्रद्धा का सागरप्रभु की कृपा पाने के लिए मन का निर्मल होना अत्यंत आवश्यक : चैतन्य मीराटीम एबीएन, रांची । सेठ रामेश्वर लाल पोद्दार स्मृति भवन न्यास मंडल एवं रघुनंदन टिबरेवाल, ऋषि टिबरेवाल परिवार के संयुक्त तत्वाधान में पोद्दार धर्मशाला, चुटिया रांची में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर परम पूज्य गुरु मां चैतन्य मीरा ने कथा का प्रारंभ भगवान भोलेनाथ की महिमा के वर्णन से किया।उन्होंने अपने प्रवचन में भगवान शिव की सरलता और करुणा का उल्लेख करते हुए बताया कि भोलेनाथ इतने भोले हैं कि वे अपने भक्तों की थोड़ी सी प्रार्थना पर भी तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं। उन्होंने रावण और स्वर्ण लंका का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान शिव ने कुबेर द्वारा निर्मित सोने की लंका भी रावण को दक्षिणा में दे दी थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रभु की कृपा पाने के लिए मन का निर्मल होना अत्यंत आवश्यक है। इसी संदर्भ में उन्होंने रामचरितमानस की चौपाई- निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा- का भावार्थ समझाते हुए कहा कि भगवान केवल निष्कपट और शुद्ध हृदय वाले भक्तों को ही स्वीकार करते हैं।कथा के दौरान मां चैतन्य मीरा ने जीवन में “सुनीति” और “सुरुचि” के अंतर को भी विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि सुनीति का मार्ग प्रारंभ में कठिन अवश्य लगता है, लेकिन उसका फल स्थायी और कल्याणकारी होता है। वहीं, सुरुचि का मार्ग शीघ्र सुख तो देता है, किंतु उसका प्रभाव अल्पकालिक होता है। इस संदर्भ में उन्होंने ध्रुव महाराज की कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि ध्रुव ने सुनीति का मार्ग अपनाया, प्रारंभ में कष्ट सहा, लेकिन अंततः उन्हें भगवान का साक्षात्कार प्राप्त हुआ।कथा के उत्तरार्ध में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन किया गया। मां चैतन्य मीरा ने बताया कि कंस जैसे अत्याचारी का अंत करने, पृथ्वी का भार कम करने तथा ऋषि-मुनियों के संताप को दूर करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने वासुदेव और माता देवकी के घर जन्म लिया। उन्होंने वासुदेव द्वारा बालक कृष्ण को यमुना नदी पार कर नंद बाबा और यशोदा मैया के पास पहुंचाने की लीला का सजीव चित्रण किया, जिसे सुनकर पूरा पंडाल भावविभोर हो उठा। कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं ने उल्लासपूर्वक उत्सव मनाया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा पंडाल ब्रजधाम में परिवर्तित हो गया हो और सभी श्रद्धालु ब्रजवासी बनकर इस दिव्य आनंद में सराबोर हो रहे हों।कथा के दौरान मनमोहक झांकियों और सजीव चित्रण ने वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन की बहनों तथा सेठ रामेश्वर लाल पोद्दार स्मृति भवन की महिला समिति के सदस्यों को सम्मानित किया गया।इस पावन अवसर पर फतेहचंद अग्रवाल, प्रकाश मोदी, राधेश्याम अग्रवाल, कमल कुमार अग्रवाल, प्रदीप मोदी, सांवरमल अग्रवाल, केशु अग्रवाल, मुकेश साबू, जितेंद्र कुमार, सुभाष पोद्दार, मुरारी टिबरेवाल, दीपक अग्रवाल, पंकज, कमल, अनमोल, पुलकित, रेखा अग्रवाल, अनु पोद्दार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में भक्तिमय वातावरण और उत्साह का विशेष संचार देखने को मिला।
सात दिवसीय श्रीमद् भागवत गीता का तृतीय दिवस टीम एबीएन, रांची। चुटिया स्थित सेठ रामेश्वर लाल पोद्दार स्मृति भवन धर्मशाला में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। यह धार्मिक आयोजन सेठ रामेश्वर लाल पोद्दार स्मृति भवन न्यास मंडल एवं रघुनंदन टिबरेवाल, ऋषि टिबरेवाल परिवार के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हो रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। कथा वाचन के दौरान सुप्रसिद्ध कथा व्यास पूज्य मां चैतन्य मीरा ने श्राद्ध पक्ष में श्रीमद् भागवत कथा एवं श्री राम कथा के श्रवण के विशेष महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस पावन काल में कथा सुनने से हमारे पितरों को शांति प्राप्त होती है तथा उन्हें प्रभु के चरणों में स्थान मिलता है। इससे वे प्रसन्न होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वह अपने दिवंगत परिजनों के कल्याण हेतु ऐसे पुण्य कार्यों में सहभागिता करे। मां चैतन्य मीरा ने आगे कहा कि श्रीमद् भागवत कथा केवल आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम ही नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की सही कला भी सिखाती है। कथा हमें मनुष्य के बीच प्रेम, करुणा और समर्पण का भाव विकसित करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने बताया कि अनेक संतों ने श्रीमद् भागवत को ही अपना आराध्य माना है, क्योंकि यही वह ग्रंथ है जो हमें भगवान श्रीकृष्ण से जोड़ता है। भगवान श्रीकृष्ण अपनी आराध्या राधा रानी के बिना अधूरे हैं, इसलिए कथा श्रवण से ही हम राधा-कृष्ण की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कथा श्रवण के नियमों पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति श्रद्धा और सरल भाव से कथा सुनता है, तो वह वास्तविक रूप में प्रभु को समझ सकता है। उन्होंने उद्धव प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं बताया है कि जो भी उन्हें पाना चाहता है, उसके लिए श्रीमद् भागवत ही सर्वोत्तम साधन है। कथा के समापन पर मां चैतन्य मीरा ने सभी श्रद्धालुओं को अपनी संपूर्ण ऊर्जा के साथ प्रभु का स्मरण करने का संदेश दिया, ताकि कथा की महिमा को अपने जीवन में उतारकर समाज के कल्याण में योगदान दिया जा सके। इस अवसर पर उन्होंने अपने द्वारा संचालित प्रतिष्ठित नेचुरोपैथी एवं आयुर्वेद रिट्रीट सेंटर की जानकारी भी दी, जहां बिना दवाइयों के विभिन्न प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों जैसे मसाज थेरेपी, हाइड्रोथेरेपी, मडथेरेपी, योग, फिजियोथैरेपी, एक्यूप्रेशर एवं डाइट थेरेपी के माध्यम से रोगियों का सफल उपचार किया जाता है। कार्यक्रम में पुरोहित श्री अनूप दाधीच एवं उनके सहयोगियों द्वारा प्रतिदिन विधिवत पूजन कराया जा रहा है। तृतीय दिवस पर श्री दाधीच के जन्मदिन के अवसर पर मां चैतन्य मीरा ने उन्हें दुपट्टा ओढ़ाकर आशीर्वाद प्रदान किया। कथा के अंत में भव्य आरती, पूजा-अर्चना एवं प्रसाद वितरण किया गया। कार्यक्रम में फतेहचंद अग्रवाल, राधेश्याम अग्रवाल, कमल कुमार अग्रवाल, सुभाष पोद्दार, प्रवीण पोद्दार, योगेंद्र पोद्दार, श्याम बिहारी अग्रवाल, मोहन अग्रवाल, मुकेश साबू, पुलकित अग्रवाल, अनमोल सिंघानिया, पंकज सिंघानिया, कमल मोदी, विष्णु मोहता, बंसीधर रमुका, पवन अग्रवाल, श्याम सुंदर अग्रवाल, छगन महाराज, रेखा अग्रवाल, अनु पोद्दार सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस आयोजन को सफल बनाने में श्याम सेवा समिति के सदस्यों का विशेष योगदान रहा, जो प्रतिदिन तन-मन से सेवा कार्य में जुटे हुए हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या इस धार्मिक आयोजन की लोकप्रियता और आस्था का प्रमाण है।
श्रीमद् भागवत कथा ही कलयुग के प्रभाव से दूर कर सकती है : मां चैतन्य मीरा टीम एबीएन, रांची। रांची चुटिया स्थित रामेश्वर लाल पोद्दार स्मृति भवन धर्मशाला में सेठ रामेश्वरलाल पोद्दार स्मृति भवन ट्रस्ट एवं श्री रघुनंदन टिबरेवाल परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस पावन अवसर पर सुप्रसिद्ध कथा वाचिका पूज्य मां चैतन्य मीरा जी ने अपने मधुर वचनों से भक्तों को आध्यात्मिक ज्ञान का अमृतपान कराया।कथा के दौरान मां चैतन्य मीरा ने राजा परीक्षित और कलयुग की कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार राजा परीक्षित को एक ऋषि के श्राप का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि मानव जीवन के लिए एक गहरी सीख है। उन्होंने बताया कि कलयुग ने स्वर्ण में अपना स्थान बनाकर स्वयं राजा परीक्षित की बुद्धि को भ्रमित कर दिया, जिससे वे धर्म के मार्ग से विचलित हो गये।मां ने वर्तमान समय से इस कथा को जोड़ते हुए कहा कि आज के समाज में जो आपसी भेदभाव, गृह क्लेश, अशांति और मानसिक तनाव देखने को मिल रहा है, वह सब कलयुग के प्रभाव का ही परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब मनुष्य अपने मूल धर्म और आध्यात्मिकता से दूर हो जाता है, तब उसके जीवन में अशांति और भ्रम उत्पन्न होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि इस कलयुग में भगवान का नाम, भक्ति और श्रीमद् भागवत कथा ही ऐसे साधन हैं, जो हमें इन नकारात्मक प्रभावों से बचा सकते हैं। यदि व्यक्ति अपने जीवन में भक्ति मार्ग को अपनाता है, प्रभु के प्रति सच्चा प्रेम और आस्था रखता है, तो उसका कोई भी अहित नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि आज के समाज के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि वह प्रभु से जुड़े, अन्यथा जीवन का वास्तविक कल्याण संभव नहीं है।मां चैतन्य मीरा ने आगे बताया कि उनके द्वारा नासिक स्थित आश्रम में तथा आनलाइन माध्यम से ध्यान एवं योग के नियमित शिविर आयोजित किये जाते हैं। इन शिविरों का उद्देश्य लोगों को मानसिक शांति प्रदान करना, जीवन की समस्याओं से उबारना तथा उन्हें एक स्वस्थ और संतुलित जीवन की ओर अग्रसर करना है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अब ये शिविर नासिक के अलावा अन्य स्थानों पर भी आयोजित किये जायेंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं से जूझ रही है। ध्यान और योग के माध्यम से इन समस्याओं को दूर किया जा सकता है तथा जीवन में एकाग्रता और सकारात्मकता लाई जा सकती है। कार्यक्रम के मुख्य यजमान श्री रघुनंदन अग्रवाल, ऋषि अग्रवाल ने पूरे परिवार के साथ विधिवत पूजा अर्चन की। कार्यक्रम के अंत में समिति के सदस्यों द्वारा विधिवत आरती की गयी, जिसमें उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने भाग लिया। तत्पश्चात प्रसाद का वितरण किया गया। पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा का आनंद लेते नजर आए।यह सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनी हुई है, बल्कि समाज को आध्यात्मिक दिशा देने का कार्य भी कर रही है। इस अवसर पर-न्यास के सचिव फतेहचंद अग्रवाल, न्यास कोषाध्यक्ष राधे श्याम अग्रवाल, कमल कुमार अग्रवाल, ओम प्रकाश मोदी, अमित मुरारका, सुभाष पोद्दार, सांवरमल अग्रवाल, योगेंद्र पोद्दार, कैलाश केसरी, अनमोल सिंघानिया, पुलकित अग्रवाल, रेखा अग्रवाल, अनु पोद्दार, सहित कई गणमान्य लोग एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित थे।
जीवन में मंगल तभी आता है जब मन निर्मल हो और वाणी सरल : प्रमाण सागर जी महाराजटीम एबीएन, रांची। आज मुनिश्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि आत्मा की पहचान ही मानव जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य है। हमारे जीवन को आगे बढ़ाने के लिए हमें दोषों और दुर्बलताओं से मुक्त होना जरूरी है। प्रतिदिन किसी न किसी ऐसी दुर्बलता की चर्चा आप सबके बीच हो रही है जो हमारे व्यक्तित्व को कमजोर बनाती है और जिससे हमारे जीवन का आंतरिक और बाह्य विकास अवरूद्ध होता है बात प की है और प पर ध्यान जाते-जाते मेरे मानस में एक शब्द गूंज रहा है वह है पक्षपात, यह पक्षपात बड़ा प्रसिद्ध शब्द है और हर किसी के जीवन में किसी न किसी रुप में इसका प्रभाव देखने में आता है।दरअसल, पक्षपात है क्या, किसी व्यक्ति के प्रति विशेष राग आशक्ति या मोह वश उसके प्रति उचित अनुचित का ध्यान रखे बिना विशेष झुकाव होना पक्षपात है उसकी योग्यता और क्षमता का अंदाज लगाये बिना किसी के साथ विशेष लगाव या झुकाव रखना पक्षपात है, पक्षपात मतलब भेदभावपूर्ण नीती। यह पक्षपात जहां भी हो व्यक्ति को अंदर से तोड़ती जब तक पक्षपात होगा। भेदभाव बना रहेगा। प्रेम सौजन्य और सौहार्द्र को टिका पाना बहुत कठिन है संत कहते हैं घर परिवार हो या लोक व्यवहार पक्षपात की वृत्ति से ऊपर उठकर चलो क्योंकी यह तुम्हारी प्रगति में बाधक है। चार स्तर पर जैसे पक्षपात करना, पक्षपात होना, पक्षपात दिखाना और पक्षपात से मुक्त निष्पक्ष रहना। कई बार ऐसा देखने में आता है कि लोग एक दूसरे का पक्षपात करते हैं घर परिवार में ऐसा ज्यादा देखने में आता है।किसी एक के प्रति विशेष झुकाव और उसके प्रति होने वाला विशेष झुकाव औरों के लिए अलगाव उत्पन्न कर देता है उसे लगता है मैं उपेक्षित हूं तिरस्कृत हूं यह गड़बड़ है घर में बहू वर्षों से खट रही है मेहनत कर रही है उसके लिए किसी प्रकार की प्रशंसा के दो शब्द नहीं उसकी खुशी की कोई परवाह नहीं कहीं भेजने के लिए कोई बात नहीं परन्तु एक नयी थोड़ी पढ़ी-लिखी बहू आयी बड़े घर से आई।उसी दिन से उसकी आरती उतारी जाती हैं पूर्ण सुख सुविधाओं का ध्यान रखा जाता है इसी से फूंट पैदा होती है एक के प्रति उपेक्षापूर्ण भाव और दूसरे के प्रति अपेक्षा का भाव इस स्थिति में मन टूटने लगता है। पक्षपात ठीक नहीं है यह जीवन में बहुत बड़ा बाधक है। जीवन में संतुलन बना कर चलने से प्रगति निरन्तर होगी और उसको गौण करके चलने से मार्ग वही अवरुद्ध होगा।मनुष्य जब बाहरी आकर्षणों से हटकर अंतर्मुख होता है, तभी उसके भीतर अध्यात्म का सच्चा प्रकाश पैदा होता है। मुनिश्री ने बताया कि क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार ये चार बंदिशें आत्मा को जकड़कर रखती हैं, और साधना का अर्थ है इन बंधनों से मुक्ति। उन्होंने कहा कि पंचकल्याणक का हर दिवस आत्म जागरण की याद दिलाता है। जब मन स्थिर हो जाता है और विचार पवित्र हो जाते हैं, तब जीवन सहज रूप से शांति और संयम की ओर चलता है। प्रवचन सभा मुनिश्री के बिहार के दौरान भगवान महावीर मनिपाल हॉस्पिटल स्थित महावीर भवन में हुई। रांची से तीर्थराज श्री सम्मेद शिखर जी के लिए मुनि श्री का मंगल विहार जारी है। आज का रात्रि विश्राम पंचरतन विहार में होगा एवं 8 अप्रेल की आहार चर्या कूटे में रामपाल गंगवाल के बगीचे में होगी। मुनिसंघ का आगामी 12 अप्रैल को गोमिया में मुनि संघ का मंगल प्रवेश संभावित है, जबकि 15 अप्रैल को मुनिसंघ की भव्य मंगल अगवानी पारसनाथ में होगी। मुनिश्री का मंगल विहार प्रात: 07 बजे बिरसा मुंडा फन पार्क से हुआ। बिहार के दौरान रांची समाज से, कुनकुरी समाज से, रामगढ़ से, शिखर जी से आए भक्तगण शामिल हुए। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।
टीम एबीएन, रांची। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी युवा मंच के अंतर्गत मारवाड़ी युवा मंच, रांची शाखा ने समाजहित में विभिन्न सेवा कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक आयोजन किया। कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान देने वाले कर्मियों को सम्मानित करना था। इस अवसर पर हॉनरिंग आवर रियल हीरोज कार्यक्रम के अंतर्गत एंबुलेंस सेवा में कार्यरत कर्मियों को उनके उत्कृष्ट एवं नि:स्वार्थ सेवा भाव के लिए अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। साथ ही विभिन्न स्वास्थ्य सेवा केंद्रों में कार्यरत नर्सेस एवं हेल्थ वर्कर्स को भी उनके समर्पण और मानव सेवा के प्रति योगदान के लिए पुष्प एवं पुरस्कार देकर सम्मानित कर आभार व्यक्त किया गया। इसके साथ ही आयोजित निशुल्क स्वास्थ्य शिविर से मंच के सदस्यों एवं अन्य नागरिकों के लिए नि:शुल्क बीपी एवं शुगर जांच की व्यवस्था की गयी, जिसका बड़ी संख्या में लोगों ने लाभ उठाया। शिविर में उपस्थित विशेषज्ञ चिकित्सकों डॉ रजनीश की टीम ने नि:शुल्क चिकित्सा परामर्श भी प्रदान किया, जिसमें मंच के सदस्यों एवं जागरूक नागरिकों को स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी एवं मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत कैंसर जागरूकता अभियान भी चलाया गया, जिसमें मंच के सदस्यों ने विभिन्न स्थानों पर जागरूकता पोस्टर लगाकर समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने का सराहनीय प्रयास किया। कार्यक्रम के स्वास्थ्य प्रभारी तरुण अग्रवाल एवं सैंकी रायका के नेतृत्व में यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर मंच के अध्यक्ष विकास अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। ऐसे सेवा कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जागरूकता बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं में लगे कर्मियों का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है। मंच के सचिव मुकेश शर्मा ने कहा कि मारवाड़ी युवा मंच हमेशा से समाज सेवा के कार्यों में अग्रणी रहा है और भविष्य में भी स्वास्थ्य, शिक्षा एवं जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा। मंच के प्रवक्ता अमित शर्मा ने कार्यक्रम को सफल बनाने में मंच के सभी सदस्यों एवं सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।अंत में मंच की ओर से सभी के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया गया। उक्त जानकारी मंच के प्रवक्ता अमित शर्मा ने दी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के छठे एवं अंतिम दिन मोक्ष कल्याणक की पावन वेला में मुनिश्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज ने आत्मा की परम सिद्धि पर आधारित प्रेरणादायी व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा जब कोई बड़ा लक्ष्य लेकर निकलते हैं और इसकी पूर्णता होती है तो एक अलग प्रकार के आनंद की अनुभूति होती है मुझे लग रहा है। आप लोगों को भी ऐसी ही अनुभूति हो रही है लेकिन मुझे आपकी आनंद अनुभूति अल्पकालिन लग रही हैं, क्योंकि हमारे लक्ष्य रोज बदल जाते हैं। एक लक्ष्य को पूर्ण करते हैं और दूसरा सामने आ जाता है खाने का तात्पर्य है कि संसार की जितनी भी उपलब्धियां है वह संतुष्टि देता है वह अल्पकालिक होती है आज भगवान सिद्ध अवस्था को प्राप्त हुए उनके जीवन के चरम लक्ष्य की उपलब्धि थी, इसके बाद और कुछ नहीं हैं। मोक्ष कोई दूर की मंजिल नहीं, बल्कि भीतर की विकार-रहित अवस्था है। जब राग-द्वेष की ज्वाला शांत होती है, तभी आत्मा में सिद्धत्व का प्रकाश प्रस्फुटित होता है। सिद्ध यानी जिन्होंने अपने करने योग्य सब काम को कर लिया वो सिद्ध हैं, अब वे कृतार्थ हो चुके हैं। महाराजश्री ने बताया कि पंचकल्याणक का क्रम आत्मा की विकास यात्रा को समझाने वाला दर्पण है गर्भ, जन्म, दीक्षा, ज्ञान और अंतत: मोक्ष। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि मोक्ष की प्राप्ति संभव है जब मनुष्य अपने भीतर संयम, समता और स्वच्छ चर्या का निरंतर अभ्यास करे,। मुनिश्री ने कहा कि मोक्ष कल्याणक केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का अवसर है। यदि हम अपने जीवन से अहंकार, क्रोध और लोभ को निकाल दें, तो मोक्ष का मार्ग यहीं से खुलना शुरू हो जाता है। छठे दिन के अनुष्ठानों में शांति-स्नात्र, मोक्ष कल्याणक विधान, भक्तामर एवं भगवान आदिनाथ के मोक्ष की कथा का भावपूर्ण वाचन हुआ। सभा स्थल पर रांची की महापौर रोशनी खलखो ने मुनिश्री से आशीर्वाद लिया। पूरी कमेटी के लोगों को मुनिश्री ने सानंद प्रतिष्ठा पूर्ण होने पर विशेष आशीर्वाद दिया और अच्छी व्यवस्था पर बधाई दी। बड़ी संख्या में उपस्थित समाजजनों ने संयम, सदाचार एवं अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। रेखा पांड्या ने महापौर महोदया का प्रतीक चिह्न देकर स्वागत किया, मुनिश्री ने उन्हें आशीर्वाद दिया। मंत्री जीतेंद्र छाबड़ा ने सभी को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और अध्यक्ष प्रदीप बाकलीवाल ने सभी मीडिया, संवाददाताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, तथा कर्मचारियों का भी धन्यवाद किया जिनके सहयोग से यह उत्सव सानंद सम्पन्न हुआ। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।
कलश यात्रा प्रात: 9 बजे से राम मंदिर से चुटिया धर्मशाला तक टीम एबीएन, रांची। रांची में मां चैतन्य मीरा जी द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन होने जा रहा है। मुख्य जजमान टिबडेवाल परिवार की ओर से 07 से 13 अप्रैल 2026 तक अपर चुटिया स्थित सेठ राम राम पोद्दार स्मृति भवन में श्रीमद भागवत कथा का आयोजन होगा। कथा का वाचन सुप्रसिद्ध कथा व्यास मां चैतन्य मीरा जी प्रतिदिन रदोपहर 02:30 बजे से करेंगे। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलवार को सुबह 09 बजे राम मंदिर से भव्य कलश यात्रा के साथ होगा। मुख्य यजमान रघुनंदन जी टिबड़ेवाल हैं, इस धार्मिक उत्सव के आयोजन में से रामेश्वर लाल पोद्दार भवन ट्रस्ट मंडल का सहयोग जारी है। सोमवार को पोद्दार धर्मशाला चुटिया में आयोजित प्रेस वार्ता में पत्रकारों को यह जानकारी न्यास मंडल फतेहचंद अग्रवाल, न्यास सचिव राधेश्याम अग्रवाल कोषाध्यक्ष, कमल अग्रवाल सदस्य ने दी। उन्होंने बताया कि मंगलवार को कलश यात्रा प्रात: 09 बजे (राम मंदिर से चुटिया धर्मशाला तक) होगी। वहीं 13 अप्रैल को सुबह 09:30 बजे से अपराह्न 12:30 बजे तक कथा व्यास मां चैतन्य मीरा जी का कथा वाचन होगा। संवाददाता सम्मेलन में मुख्य यजमान रघुनंदन जी टिबड़ेवाल, कार्यक्रम संयोजिका रेखा अग्रवाल मीडिया प्रभारी अनू पोद्दार व अन्य उपस्थित थे।
सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन 7 अप्रैल सेपावन कथा का वाचन सुप्रसिद्ध कथा व्यास मां चैतन्य मीरा जी के श्रीमुख से होगाटीम एबीएन, रांची। सेठ रामेश्वर लाल पोद्दार भवन न्यास मंडल के तत्वावधान में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य एवं दिव्य आयोजन रांची के चुटिया स्थित सेठ रामेश्वर लाल पोद्दार स्मृति भवन (धर्मशाला) में 7 अप्रैल से 13 अप्रैल तक किया जाएगा।यह आध्यात्मिक आयोजन श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, ज्ञान और संस्कारों का अनूठा संगम प्रस्तुत करेगा।इस पावन कथा का वाचन सुप्रसिद्ध कथा व्यास मां चैतन्य मीरा जी के श्रीमुख से प्रतिदिन दोपहर 2:30 बजे से सायं 5 बजे तक किया जाएगा। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति के महत्व एवं जीवन के आध्यात्मिक रहस्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को धर्म, ज्ञान और भक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा।कार्यक्रम का शुभारंभ 7 अप्रैल को प्रातः 9 बजे भव्य कलश यात्रा के साथ होगा।यह कलश यात्रा राम मंदिर से प्रारंभ होकर चुटिया धर्मशाला तक पहुंचेगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं एवं पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेंगे। कलश यात्रा के दौरान भक्ति गीत, भजन एवं जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठेगा। इस धार्मिक आयोजन के मुख्य यजमान रघुनंदन टिबड़ेवाल हैं। कथा का आयोजन समस्त टिबड़ेवाल परिवार के सौजन्य से किया जा रहा है, जिनकी सक्रिय सहभागिता से यह कार्यक्रम भव्य रूप ले रहा है। आयोजन से जुड़ी जानकारी देते हुए कार्यक्रम संयोजिका रेखा अग्रवाल एवं मीडिया प्रभारी अनु पोद्दार ने बताया कि इस सात दिवसीय कथा के माध्यम से समाज में धार्मिकजागरूकता एवं आध्यात्मिक चेतना का प्रसार किया जाएगा। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस पुण्य अवसर का लाभ उठाएं। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि समाज में एकता, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का भी संदेश देगा। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी अनु पोद्दार (94311 65000) ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क, रांची। बिरसा मुंडा फन पार्क में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के चौथे दिन शनिवार को तप कल्याणक का आयोजन अत्यंत श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। प्रात: 6 बजे से अभिषेक नित्य पूजन के बाद तप एवं दीक्षा कल्याणक की क्रिया के बाद पुन: 12 बजे तप कल्याणक के अन्तर्गत नाभिराय का दरबार, राज्याभिषेक, षट्कर्म उपदेश, महाराजा आदिकुमार का वैराग्य एवं दीक्षा विधि पूर्ण की गयी। इस दौरान प्रात: 8.30 बजे मुनिश्री का प्रवचन हुआ जिसमें उन्होंने जीवन की सार्थकता, आत्म-जागरण और विचार-शुद्धि पर विस्तृत एवं प्रेरणादायक मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य बाहर की परिस्थितियों को बदलने में जितना प्रयास करता है, यदि उतना ही अपने मन, विचार और स्वभाव को बदलने में करे, तो जीवन स्वत: ही शांत, सुव्यवस्थित और सफल बन जाता है। एक जिज्ञासु किसी संत के पास पहुंचा उनके चरणों में निवेदन किया कि मैं गुरुदेव एक माह से लगातार आपको सुन रहा हूं आपकी बातें अच्छी लगती है। आप कहते हैं कि क्रोध बुरा है। लोभ बुरा है। मोह बुरा है। कषाय बुरा है। अच्छा लगता है। आप बताते हैं कि पाप हमारा शत्रु है मन को छूता है लेकिन इसके बावजूद न तो मैं पापों से मुक्त हो पाता हूं न हीं कषायो पर नियंत्रण कर पाता हूं आखिर इससे कैसे बचा जाए। उनकी बातें सुनकर संत मुस्कुराए। उन्होंने पूछा तुम कहां से आए हो? उत्तर दिया- मैं श्रावस्ती से आया हूं। तो उन्होंने कहा- श्रावस्ती से कौशांबी कितनी दूरी है? परंतु तुम कैसे आये हो? सिर्फ चर्चा करने से तो नहीं पहुंचे।तो उसने कहा चल कर आया हूं फिर संत ने कहा कि इस तरह तुम्हें इस मार्ग पर चलना होगा फर्क तो तब पड़ता है जब तुम चलोगे आज तप कल्याणक है आज देखेंगे भगवान राज पाट का परित्याग कर निकलेंगे वन की ओर, उनका दीक्षा कल्याणक है आपकी कोई तैयारी नहीं है जब तक मंजिल की और नहीं पहुंचेंगे चलना तो पड़ेगा आज चलो या कल इस भाव में चलो या अनंत भाव बाद चलना तो पड़ेगा अपने जीवन में त्याग को जीवन का आदर्श बनाकर त्यागियो के अनुगामी बनो।त्यागियो की अनुगामी बनने का अर्थ उनके पीछे चलना नहीं अपितु उनकी शक्तियों का अनुशरण करना है, चिंतन, मनन, प्रवचन बहुत हुआ अब कुछ करिए आगे बढ़िये। आवरण के सामने ही प्राय नयन नम जाती है और आचरण के सामने आते ही प्राय कदम थम जाती है। धन की रक्षा में प्रवेश करने वाले को सबसे प्रथम कार्य है कुलाचर का पालन, कुलाचर का मतलब हमारे कुल कामागत जो संस्कार है उनका दृढ़ता से अनुपालन। अभक्ष्य का परहेज सात्विक का पालन अपनी खानपान प्रवृत्तियों में दया का पालन यह आपका कूलाचार है जो हमें घुटियों के संस्कार में मिला।हम भाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म ऐसी कुल में हुआ जहां पीढ़ियों से हिंसा और हत्या नहीं हुई। खोज किया जाए तो हमारे डीएनए में अहिंसा है। अपेक्षाओं का बोझ मनुष्य को थका देता है। जितनी कम अपेक्षाएँ, उतनी अधिक शांति। कर्म से पहले विचार आता है। यदि विचार श्रेष्ठ होंगे, तो कर्म अपने आप श्रेष्ठ बन जाएंगे। अहिंसा केवल शारीरिक न हो, वाणी और विचार की अहिंसा उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। अपने भीतर दीप जलाइए, बाहर का अंधकार अपने आप मिट जायेगा। मनुष्य के आचरण का पता उसके कुल से लग जाता हैं। कुछ लिखकर सो कुछ पढ़ कर सो जिस जगह जागा सवेरे, उससे बढ़कर सो, एक सीढ़ी बढ़ के सो। मध्याह्न में आदि कुमार की बारात के साथ वैराग्य और दीक्षा विधि संपन्न हुई। संध्या में सांस्कृतिक कार्यक्रम में तप और दीक्षा का चित्रण किया गया। जिस तरह की विधि संस्कार पूजन के माध्यम से पंडाल में हुआ वही प्रक्रिया मंदिर की प्रतिमाओं में भी संपन्न हुई मध्याह्न बेला में मुनिश्री के द्वारा मंदिर जाकर वहां की विधि को भी संपन्न किया गया।गृह त्याग, वस्त्र त्याग, केश लोचन, आदि सभी प्रक्रिया की गई। राँची के अलावा पूरे भारत के कई स्थानों से लोग इस प्रयोजन हेतू पहुंचे। कल दिनांक 05 अप्रैल को प्रात: 07 बजे से मुनिश्री के सानिध्य में भावना योग के फायदे एवं इसे कैसे अपने जीवन में अपनाकर दैनिक क्रियाओं में शामिल करें इसके लिए मार्गदर्शक किया जाएगा। समाज के मंत्री जीतेन्द्र छाबड़ा एवं अध्यक्ष प्रदीप बाकलीवाल ने सभी धर्म के लोगों से अपील की गई कि आप अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।
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