टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सात दिन बाद रांची लौट आए हैं। सबसे खास बात यह है कि सीएम बिना सिक्योरिटी के अपने आवास लौटे हैं। उनके लौटते ही राजनीतिक गरियारे में फिर से चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। पत्थर खदान लीज मामले में चुनाव आयोग के तरफ से आए नोटिस पर सीएम को दस मई तक जवाब देना है। उनपर ऑफिस ऑफ प्रॉफिट की तलवार लटक रही है। इस बीच चर्चा है कि झामुमो ने भी अपनी ओर से पूरी तैयारी कर ली है। हालांकि आधिकारिक रूप से नहीं बताया जा रहा है कि इस मामले में पार्टी का क्या स्टैंड होगा? जोर शोर से चर्चा हो रही है कि अगर मुख्यमंत्री को अयोग्य घोषित किया जाता है तो जेएमएम सुप्रीमो शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। इस बीच भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी से जुड़े दलबदल मामले में 6 मई को स्पीकर के न्यायाधीकरण में सुनवाई मुकर्रर की गई है साथ ही अगली सुनवाई के लिए 9 मई की तारीख भी घोषित की जा चुकी है। लिहाजा राजनीतिक हलकों में इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं। आपको बता दें कि अपनी मां रूपी सोरेन की तबीयत खराब होने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उनका इलाज कराने के लिए खुद उनके साथ 28 अप्रैल को हैदराबाद गए थे। इसी बीच ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में चुनाव आयोग के स्पेशल मैसेंजर के जरिए सीएम को नोटिस भेजी गई थी। इसी दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हैदराबाद से दिल्ली भी गए थे। वहां पीएम के साथ एक बैठक में भी शामिल हुए थे। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में कानून के जानकारों से हालिया राजनीतिक हालात पर भी रायशुमारी हुई थी। अब देखना है कि सात दिन बाद रांची लौटे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का अगला स्टैंड क्या होता है?