एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में हर साल 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है। मजदूरों के हक की रक्षा के लिए यह दिवस खास तौर पर मनाया जाता है। केन्द्र और राज्य सरकार के द्वारा मजदूरों के अधिकार की रक्षा के लिए कई कानून बनाये गए हैं। इन कानूनों को पालन कराने के लिए सरकार की ओर से श्रम विभाग गठित कर नीचे से लेकर उपर तक अधिकारी को पदस्थापित की गई है। मगर यदि श्रम कानून की रक्षा करने वाले पदाधिकारी ही नहीं हों तो आप सहज अनुमान लगा सकते हैं कि यह कितना प्रभावी होगा। झारखंड में कुछ ऐसी ही स्थिति देखी जा रही है, जहां सबसे निचले स्तर पर पदस्थापित होनेवाले श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों का भयंकर टोटा है।
श्रम विभाग में बड़े पैमाने पर खाली पद हैं। हालत यह है कि नियोजनालय से लेकर सरकार के श्रम विभाग तक में अधिकारी से लेकर क्लर्क तक की कुर्सियां खाली है, जो भी पदाधिकारी कार्यरत हैं उन्हें कई पदों की जिम्मेदारी देकर काम चलाया जा रहा है। राजधानी स्थित अवर प्रादेशिक नियोजनालय रांची की बात करें तो यहां कुल स्वीकृत 43 पदों में मात्र 09 कार्यरत है। हालत यह है कि सहायक निदेशक और नियोजन पदाधिकारी के स्वीकृत 2-2 पदों में से दोनों के दोनों रिक्त हैं। इसी तरह श्रमायुक्त कार्यालय डोरंडा में स्वीकृत 657 में से मात्र 168 कार्यरत हैं यानी 489 पद रिक्त हैं। सबसे दुखद पहलू यह है कि श्रम कानून को लागू कराने में अहम भूमिका निभाने वाले श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी के 202 में से मात्र 21 ही कार्यरत बचे हुए हैं।