टीम एबीएन, रांची। कोरोना काल में सोशल डिस्टेंसिंग और संक्रमण के डर से किसी को छूना मना था। इसलिए अभियान चलाकर भी कुष्ठ रोगियों को देखकर या फिर उन्हें छूकर पहचान नहीं की जा सकी। इसके चलते कोरोना के तीनों वेव में कुष्ठ रोगियों की संख्या 42 प्रतिशत कम हो गई। वर्तमान में जिले में 341 कुष्ठ रोगी बचे हैं, जिनका इलाज चल रहा है। 198 कुष्ठ रोग से मुक्त हो गए हैं। जिले में सात साल का आकलन करें तो पाते हैं कि इन वर्षों में 2541 कुष्ठ रोगी मिले। सर्वाधिक रोगी वर्ष 2019-2020 में 538 मिले थे। कोरोना काल में कुष्ठ रोगियों का ठीक से पता नहीं चल पाने के कारण तीसरे वेव के बाद अब व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।