डॉ दीपक कुमार घोष
एबीएन न्यूज नेटवर्क, खूंटी। मुरहू प्रखंड के मनु साव आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। एक साधारण परिवार से आने वाले मनु ने अपने कर्म, सेवा भाव और दान से समाज में योगी जैसी प्रतिष्ठा हासिल की है। स्नेही डॉ धर्मेंद्र नाथ तिवारी के अनुसार, स्वर्गीय मनु साव बचपन से ही परिश्रमी और दूसरों की मदद करने वाले रहे हैं। उन्होंने कभी बड़े पद या नाम की चाह नहीं की, बल्कि अपने छोटे-छोटे कामों से लोगों का दिल जीता।
कभी अकेले चाय तक नहीं पी, हमेशा परहित का भाव रखते थे। धर्मस्थलों पर लोगों को खुद गरीब रहने के बावजूद निशुल्क ले जाना, धार्मिक जगहों का जीर्णोद्धार, पूजा पाठ कराना, गरीबों -ब्राह्मणों को दान देना,उनकी दिनचर्या रही। खूंटी के अधिवक्ता राखोहरि चौधरी, अधिवक्ता प्रफुल्ल भगत, काशीनाथ महतो, जिप उपाध्यक्ष मंजु देवी, प्रियांक भगत, महावीर राम, मुकेश जायसवाल आदि इनके व्यवहार से परिचित थे।
मनु साव सात बहनों में एक भाई थे। अभी दो बहनें जिवित हैं। मुरहू में सबसे अधिक जर्जर भवन, असफल व्यवसाय और स्वास्थ्य संबंधी समस्या से जूझ रहे मनु को पैतृक संपत्ति के चलते भी परेशानी थी।।दो पुत्र और एक विवाहिता पुत्री है। पत्नी भी अस्वस्थ रहती हैं, किसी तरह अपने जीवन को चला रही हैं।
जिला प्रशासन इनके परिजनों को खासकर भुमि के विवाद, गृह निर्माण और आर्थिक स्थिति के सुधार हेतु ईमानदारी से हल कर दें। भविष्य के लिए सरकार और समाज को भी इस परमार्थी योगी मनु साव का ध्यान रखना चाहिए। मनु साव ने यह साबित कर दिया है कि योगी बनने के लिए जंगल जाने की जरूरत नहीं, सच्चे कर्म और निस्वार्थ दान से भी व्यक्ति महान बन सकता है।