रांची नगर आयुक्त का आचरण एक अधिकारी की बजाय झामुमो कार्यकर्ता की तरह : बाबूलाल मरांडी
टीम एबीएन, रांची। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रांची नगर निगम के नगर आयुक्त कअर सुशांत गौरव की भूमिका पर सवाल उठाया है। उन्होंने सोशल मीडिया के एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए कहा है कि नगर आयुक्त अब छवि रंजन और विनय चौबे की राह पर चलते हुए दिखाई दे रहे हैं। इनका आचरण एक अधिकारी की तरह कम और झामुमो कार्यकर्ता की तरह अधिक नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि रांची में हजारों घरों के नक्शे लंबित हैं।
आम आदमी निगम के चक्कर लगाते-लगाते थक चुका है, लेकिन इनकी दिलचस्पी उन बिल्डिंग्स पर कार्रवाई करने में ज्यादा दिखाई दे रही है, जिनसे जुड़े लोग किसी न किसी रूप में छात्रों के आंदोलन के साथ खड़े थे।
उन्होंने कहा कि हजारों लोग आॅनलाइन होल्डिंग जमा कर चुके हैं, लेकिन उन्हें बार-बार निगम के नोटिस भेजे जा रहे हैं और अपनी ही राशि एवं दस्तावेजों के लिए निगम के चक्कर लगाने को मजबूर किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, रांची खादगढ़ा बस स्टैंड की टेंडर प्रक्रिया में 7.50 करोड़ की बोली लग चुकी थी, फिर उसे रद्द कर 3.20 करोड़ में टेंडर क्यों दिया गया?
सवाल उठना स्वाभाविक है कि निगम कमिश्नर ने अपने पद को कमिशन से क्यों जोड़ दिया है? इनके उच्च शिक्षा, खेल विभाग और उद्योग विभाग में निदेशक तथा विभिन्न जिलों में उपायुक्त रहते हुए क्या-क्या गड़बड़ियां हुईं, यह भी जनता के संज्ञान में है। अधिकारी अगर जनता की सेवा की बजाय सत्ता के इशारे पर चलने लगें, तो फिर जनता न्याय के लिए जाये तो जाये कहां?
बाबूलाल मरांडी ने नगर आयुक्त को चेतावनी देते हुए कहा है कि मनचाही पोस्टिंग, आर्थिक लाभ और मुख्यमंत्री को संतुष्ट करने के चक्कर में चाटुकार की तरह व्यवहार न करें। जनता को प्रताड़ित करना बंद करें, अन्यथा जेएमएम की कठपुतली बनकर काम करने वाले अधिकारियों का एक दिन क्या हश्र होता है, यह पूरा राज्य पहले भी देख चुका है। इतिहास खुद को दोहराता है, बस किरदार बदल जाते हैं।