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लोहरदगा में हिंडाल्को कंपनी अपने कुकर्मों से बाज नहीं आ रही है : सूरज अग्रवाल

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लोहरदगा में हिंडाल्को कंपनी अपने कुकर्मों से बाज नहीं आ रही है : सूरज अग्रवाल
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एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। झारखंड प्रदेश के नेता जनप्रतिनिधि जो हमेशा जनता को बेवकूफ बनाने के लिए स्थानीय एवं डोमिसाइल नीति का ढोलकी पीटते रहते हैं। उन नेताओं को शायद जानकारी नहीं होगी कि लोहरदगा के हिंडालको कंपनी में कार्यरत चतुर्थवर्गीय कर्मचारी में कुछ ही कर्मचारी स्थानीय है जिससे फाइल इधर-उधर कराना, चाय पिलाना, पानी पिलाना, चाय का जूठा गिलास उठाना आदि काम कराया जाता है। 

जो तृतीय वर्ग एवं द्वितीय वर्ग के स्थानीय कर्मचारी थे, उन्हें इतना परेशान किया गया कि वे अपने नौकरी से त्याग पत्र देकर हिंडालको से हट जा रहा है। स्थानीय का प्रमोशन रोककर बाहरी लोगों का प्रमोशन होता है, जिससे स्थानीय कर्मचारी काफी आहत है। लोहरदगा में हिंडाल्को कंपनी सभी द्वितीय एवं तृतीय वर्ग के कर्मचारी के रूप में उड़ीसा के लोगों को अधिक से अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। 

कई बाहर के स्टेट के लोगों को नौकरी दी जा रही है। धीरे-धीरे कंपनी सभी बाहरी लोग को लोहरदगा में नौकरी देकर अपना उल्लू सीधा कर रही है। जबकि अगर झारखंड के लोग किसी दूसरे प्रदेश में कार्य करने जाते हैं, तो उनका विरोध किया जाता है। लेकिन वाह रे हिंडालको कंपनी आप यहां बाहरी लोग को बसा रहे हैं। पहले तो स्थानीय लोग को रैजिंग का कार्य भी दिया जाता था, लेकिन अब सभी रैजिंग करने वाले ठेकेदार बाहर से लाया गया है। 

उनसे अधिकारी कमीशन लेते हैं। चूंकि स्थानीय से कमीशन लेने पर इनका भंडाफोड़ हो जायेगा, इससे बचते हुए बाहरी लोगों को ज्यादा रेजिंग कार्य दिया जा रहा है। कुछ अधिकारी जो ईमानदारी से अपना कार्य कर रहे थे वे भी तंग होकर हिंडालको छोड़कर दूसरी कंपनी में चले गये। क्योंकि कंपनी के बड़े कुर्सी में एक ऐसे अधिकारी बैठे हैं, जिनकी सोच है कि तुम भी खाओ और मुझे भी खिलाओ। 

पूर्व में उड़ीसा में रेजिंग कार्य की शुरुआत करने को लेकर इस बड़े कुर्सी वाले अधिकारी की कुटाई हो चुकी है, तो कुटाई से बचने के लिए उड़ीसा के लोगों को झारखंड में लाया जा रहा है। ताकि उड़ीसा में फिर से रेजिंग शुरू किया जा सके और इस खाने खिलाने के चक्कर में भंडाफोड़ ना हो जाये। इसलिए स्थानीय को भगाओ और मस्ती से मलाई खाओ जो जनप्रतिनिधि बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। 

उन्हें रबड़ी मलाई खिलाकर उन्हें भी संतुष्ट कर दिया जा रहा है और हिंडाल्को करोड़ो का मुनाफा यहां से कर रही है। स्थानीय नीति की बात करने वाले नेता हिंडालको जाएं और वहां सर्वे करा कर देख ले कि जितने भी कर्मचारी हैं वह कहां के हैं क्या सिर्फ उड़ीसा के लोगों में योग्यता है। हमारे झारखंड के लोगों में योग्यता की कमी है। लोहरदगा में एक कंपनी पहले कार्य करती थी इंडाल जिसने स्थानीय को प्राथमिकता दिया था। 

उसे भी हिंडालको हड़प कर वहां के कई स्थानीय लोगों को बेरोजगार कर चुकी है। एक जनप्रतिनिधि तो अदानी और अंबानी को पानी पी पीकर गाली बकते रहते हैं, तो थोड़ा हिंडाल्को को भी गरिया लिया जाए। ताकि स्थानीय लोगों का कुछ भला हो सके।

पर मुझे पता है ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि यह पब्लिक है सब जानती है और अगर ऐसा जनप्रतिनिधि नहीं करते हैं तो इनका स्थानीय को लेकर झूठा ढोल नगाड़ा बजाना आंख में धूल झोंकना है। जागो रे हिंडाल्को को बॉक्साइट निकालने के लिए जमीन देने वाले जमींदारों...।

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