मौत के बाद परिजनों से अतिरिक्त वसूली का आरोप
एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के जिलाध्यक्ष रत्नेश कुमार ने झारखंड के मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर धनबाद स्थित असर्फी हॉस्पिटल के विरुद्ध उच्चस्तरीय जांच कराने तथा अस्पताल को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है।
मुख्यमंत्री को भेजे गये पत्र में रत्नेश कुमार ने आरोप लगाया है कि असर्फी हॉस्पिटल में मरीज की मृत्यु के बाद परिजनों से अतिरिक्त राशि की मांग की जाती है और भुगतान नहीं होने पर मृतक का शव सौंपने में बाधा उत्पन्न की जाती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं और हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में भी इसी तरह के आरोप लगाये गये हैं।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि अस्पताल में निर्धारित बिल का भुगतान किये जाने के बावजूद मृतक के परिजनों को शव देने में देरी की गयी तथा अतिरिक्त राशि जमा करने का दबाव बनाया गया। किसी गरीब वर्ग के लोग बेहतर इलाज के लिए अशर्फी अस्पताल में अपना इलाज करवाते हैं, लेकिन इलाज के दौरान मृत्यु हो जाने के बाद अस्पताल अपनी मनमानी करती है और जबरन शव को रोककर रखती है।
पर जब तक पैसे का भुगतान नहीं होता, तब तक शव को परिजनों को नहीं सौंपा जाता है। इससे पूर्व भी ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। एक मामले में धनबाद के मेयर संजीव सिंह ने हस्तक्षेप कर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के बाद मृतक के परिजनों को शव सौंपा था।
रत्नेश कुमार ने कहा कि झारखंड सरकार और स्वास्थ्य विभाग के स्पष्ट निर्देश है कि किसी मरीज की मृत्यु होने पर अस्पताल बकाया राशि के कारण शव को नहीं रोक सकता तथा परिजनों को सम्मानपूर्वक शव सौंपना अनिवार्य है। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन पर सरकारी नियमों की अवहेलना कर रही है ओर मनमानी ढंग से अस्पताल चला रही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच करायी जाये तथा अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे ब्लैकलिस्ट किया जाये। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की भी मांग की गयी है।