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न्याय चेहरा देखकर नहीं, सत्य के धरातल पर होना चाहिए : ज्योतिरीश्वर सिंह

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न्याय चेहरा देखकर नहीं, सत्य के धरातल पर होना चाहिए : ज्योतिरीश्वर सिंह
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  • रामपुर घटना पर भाजपा नेता ज्योतिरीश्वर सिंह बोले- न्याय चेहरा देखकर नहीं, सत्य के धरातल पर होना चाहिए 
  • पलामू पुलिस प्रशासन को नसीहत : स्वान दृष्टि छोड़ सिंह दृष्टि अपनाये सरकार, सतही कार्रवाई के बजाय जमीन विवाद का खोजें स्थायी समाधान 
  • भाजपा प्रदेश नेतृत्व से रामपुर में निष्पक्ष प्रांतीय जांच दल भेजने की मांग 
  • रामपुर में 5 जून को होने वाली भाकपा माले की प्रस्तावित जनसभा पर तत्काल रोक लगाये पलामू डीसी 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, मेदिनीनगर। पलामू के चैनपुर थाना क्षेत्र के रामपुर में उपजे हालिया संवेदनशील विवाद को लेकर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ज्योतिरीश्वर सिंह ने एक बेहद गंभीर, वैचारिक और निष्पक्ष दृष्टिकोण सामने रखा है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक स्थानीय कानून-व्यवस्था का मामला मानने से इनकार करते हुए इसे प्रशासनिक दूरदर्शिता और राजनीतिक शुचिता की कसौटी बताया है।  

ज्योतिरीश्वर सिंह ने पलामू पुलिस प्रशासन  की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए उसे स्वान दृष्टि (सतही और तात्कालिक कार्रवाई) का परित्याग कर सिंह दृष्टि (मूल कारण पर प्रहार) की नीति अपनाने की बड़ी राजनैतिक नसीहत दी है। इसके साथ ही, उन्होंने स्थानीय स्तर पर हुई एकतरफा राजनीतिक बयानबाजी पर असहमति जताते हुए पार्टी के प्रदेश व केंद्रीय नेतृत्व से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। 

पलामू पुलिस प्रशासन द्वारा त्वरित दबाव में लिये जा रहे निर्णयों पर आपत्ति दर्ज करते हुए ज्योतिरीश्वर सिंह ने न्याय के शाश्वत सिद्धांतों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि न्याय का सिद्धांत कहता है कि जब कोई सिंह पर लाठी से वार करता है, तो सिंह लाठी को नहीं पकड़ता, बल्कि लाठी चलाने वाले पर प्रहार करता है-क्योंकि दोष लाठी का नहीं, बल्कि उसे चलाने वाले का होता है। इसके विपरीत, स्वान केवल लाठी को पकड़ने के लिए दौड़ता है और मूल कारण को छोड़ देता है। 

उन्होंने दु:ख जताते हुए कहा कि रामपुर मामले में पलामू पुलिस प्रशासन भी इसी स्वान दृष्टि के तहत केवल सतही और एकतरफा कार्रवाई कर रहा है। जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही, आनन-फानन में एक पक्ष के लोगों के हथियारों का लाइसेंस रद्द करने की अनुशंसा कर दी गयी। बिना किसी अंतिम रिपोर्ट या न्यायिक निष्कर्ष के की गई यह एकतरफा कार्रवाई सीधे तौर पर प्रशासन के ऊपर स्थानीय नेताओं, भीड़ के दबाव और उनके पूर्वाग्रह को दशार्ती है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि शासन ने बिना जांच के ही एक पक्ष को दोषी मान लिया है। 

प्रशासन को इस ढुलमुल रवैये को छोड़कर विवाद के मूल कारण यानी जमीन विवाद की गहराई में जाकर इसका स्थायी और सकारात्मक हल खोजना चाहिए। भाजपा नेता ज्योतिरीश्वर सिंह ने  ऐतिहासिक और दार्शनिक संदर्भ सामने रखा। उन्होंने कहा, "यदि हम ऐतिहासिक संदर्भों को देखें, तो महाभारत के महायुद्ध के बाद कुरुक्षेत्र की तबाही को देखकर कौरवों के पक्ष को भी पीड़ित माना जा सकता है, पर क्या वे वास्तविक मायने में पीड़ित थे? बिल्कुल नहीं।

जब संघर्ष और द्वंद्व दोनों तरफ से होता है और उस टकराव में किसी एक पक्ष की जान-माल की हानि हो जाती है, तो सिर्फ उस तात्कालिक नुकसान को देखकर दूसरे पक्ष को दबंग और अपराधी घोषित कर देना न्यायसंगत नहीं है। नुकसान का होना और दोषी का तय होना दोनों दो बिल्कुल अलग विषय हैं, जिसे प्रशासन भीड़ के दबाव में भूल रहा है। ज्योतिरीश्वर सिंह ने कहा कि पलामू हमेशा से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक परंपरागत और मजबूत गढ़ रहा है। 

ऐसे में घटना की शुरुआत में ही स्थानीय भाजपा विधायक आलोक चौरसिया जी के एकतरफा बयानों से समाज में बेहद गलत, असंतुलित और असमंजस का संदेश गया है। उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, पूर्व सीएम रघुवर दास, अर्जुन मुंडा और अमित तिवारी का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व को इस मामले की संवेदनशीलता और इसके दूरगामी सामाजिक प्रभावों को समझना होगा। 

श्री सिंह ने मांग की कि जिस तरह राज्य के दूसरे संवेदनशील इलाकों में हुई घटनाओं के बाद भाजपा ने तुरंत केंद्रीय या प्रांतीय जांच दल भेजकर वस्तुस्थिति का पता लगाया है, ठीक वैसा ही एक उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच दल रामपुर के मामले में भी भेजा जाना चाहिए। यह इसलिए जरूरी है ताकि कोई भी दल या नेता इस संवेदनशील घटना की आड़ में समाज में नफरत फैलाकर अपना राजनीतिक विस्तार न कर सके और क्षेत्र में शांति, न्याय तथा भाईचारा पुनर्स्थापित किया जा सके। 

रामपुर और आसपास के क्षेत्रों में व्याप्त तनाव को देखते हुए ज्योतिरीश्वर सिंह ने जिला प्रशासन को समय रहते कदम उठाने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जानकारी के अनुसार, आगामी 5 जून को रामपुर में भाकपा माले की एक जनसभा प्रस्तावित है। इस संवेदनशील और अत्यधिक तनावपूर्ण माहौल में इस तरह के किसी भी बाहरी राजनीतिक आयोजन का सीधा और नकारात्मक असर क्षेत्र की विधि-व्यवस्था पर पड़ेगा, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का बड़ा खतरा है।

उन्होंने पलामू उपायुक्त से मांग की है कि किसी भी अप्रिय स्थिति को टालने के लिए प्रशासन बिना किसी देरी के इस प्रस्तावित सभा पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाये। उन्होंने  कहा कि हमारी दृष्टि स्पष्ट होनी चाहिए—दोषी को सख्त से सख्त सजा मिले, पर न्याय और सत्य की आड़ में किसी भी निर्दोष को प्रताड़ित न किया जाये, प्रशासन को हर हाल में यह सुनिश्चित करना होगा।

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