टीम एबीएन, खजूरिया मैदान, मधुकम (रांची)। रांची के पिस्का स्थित खजूरिया मैदान में आज एक भव्य धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु, नागरिक, महिलाएं, युवा एवं बच्चे उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में चिन्मय मिशन के पूज्य स्वामी परिपूर्णानंद जी तथा विशिष्ट वक्ता के रूप में राकेश लाल (सदस्य, क्षेत्र सामाजिक सद्भाव) पवन मंत्री (संघचालक, रांची महानगर) उपस्थित रहे।
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में स्वामी परिपूर्णानंद जी ने धर्म के वास्तविक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्म का स्थान जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है, किंतु केवल नारे लगाने से धर्म की रक्षा संभव नहीं है। धर्म का वास्तविक आधार आचरण है। उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्म वही है जो मनुष्य के जीवन में अभ्युदय (लौकिक उन्नति) और श्रेय (आध्यात्मिक कल्याण) दोनों प्रदान करे।
स्वामी जी ने उपस्थित जनसमूह से आत्ममंथन करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को यह विचार करना चाहिए कि उसके जीवन और व्यवहार में कितना धर्म समाहित है। उन्होंने परिवार को संस्कारों की प्रथम पाठशाला बताते हुए कहा कि बच्चे अपने बड़ों के आचरण से ही धर्म सीखते हैं। यदि आचरण में धर्म नहीं होगा, तो धर्म का संरक्षण संभव नहीं है।
उन्होंने जीवन मूल्यों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में समाज ने अपने मूल्यों को कमजोर कर लिया है, जिसके कारण संवेदनहीनता और आत्मकेंद्रितता बढ़ी है। त्याग की भावना को समाज की एकता का आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि बिना त्याग के परिवार और समाज का अस्तित्व संभव नहीं है।
स्वामी परिपूर्णानंद जी ने वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए विवाह, संतानोत्पत्ति, शिक्षा और संस्कारों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि केवल जनसंख्या घटने की चिंता करने से समाधान नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का पालन करना होगा। उन्होंने बच्चों को धार्मिक ज्ञान देने, गीता के श्लोकों का अभ्यास करने तथा परंपराओं को समझकर अपनाने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम के दूसरे वक्ता राकेश लाल ने अपने संबोधन में एक प्रेरक कथा के माध्यम से निडरता और आत्मबल का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक शक्ति बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि आंतरिक साहस और एकता में निहित है। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय समाज का इतिहास वीरता और आत्मसम्मान से भरा रहा है।
उन्होंने सामूहिक शक्ति के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि केवल व्यक्तिगत पूजा से नहीं, बल्कि सामूहिक रूप से धार्मिक गतिविधियों जैसे मंदिरों में सामूहिक आरती और हनुमान चालीसा के आयोजन से समाज में एकजुटता और शक्ति का संचार होता है। उन्होंने प्रत्येक मोहल्ले में साप्ताहिक सामूहिक कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया।
राकेश लाल ने सामाजिक एकता पर बल देते हुए कहा कि समाज को जाति, भाषा, क्षेत्र आदि के भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट होना होगा। उन्होंने नागरिक कर्तव्यों के पालन, पर्यावरण संरक्षण (जैसे पौधारोपण, प्लास्टिक का कम उपयोग) तथा सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान भजन, सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ, तथा भारत माता की आरती का आयोजन किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और ऊर्जावान बन गया।
अंत में सभी उपस्थित जनों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में धर्म, संस्कार, त्याग, एकता और सामाजिक उत्तरदायित्व को अपनाते हुए एक सशक्त एवं जागरूक समाज के निर्माण में सक्रिय योगदान देंगे। इस कार्यक्रम में सकल हिंदू समाज के सभी वर्गों से 500 से ज्यादा की संख्या में भागीदारी रही इसमें विशेष कर मातृशक्ति का योगदान रहा उक्त जानकारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, रांची के महानगर सह प्रचार प्रमुख शिवेंदु सागर ने दी।