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शरद पूर्णिमा पर गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू में गायत्री महामंत्र पर हुआ स्वाध्याय और दीपयज्ञ विधान

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शरद पूर्णिमा पर गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू में गायत्री महामंत्र पर हुआ स्वाध्याय और दीपयज्ञ विधान
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सुख और दुख का आधार मनुष्य की मन:स्थिति पर निर्भर रहता है : दीदी मंजू शर्मा 

टीम एबीएन, रांची। शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर महिला मंडल प्रतिनिधित्व में युगतीर्थ गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू में गायत्री महामंत्र का सस्वर पाठ व गुरु-ईश नमन वंदन व भजन-कीर्तन युग-गायन और स्वाध्याय पाठ-संवाद हुआ। इसमें गायत्री महामंत्र, महामृत्युंजय मंत्र एवं  दीपयज्ञ की महत्ता, आज की आवश्यकता एवं उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया। साथ ही सुखद व दुखद मनोभाव की मनोदशा पर प्रकाश डालकर दीपयज्ञ विधान हुआ। स्वाध्याय में मनुष्य जीवन में सुख दुख की मनस्थिति पर चर्चा हुई।

दीदी ने बताया कि यह सब अंतर के मनोभाव और विचारों के बदल जाने से ही उत्पन्न होता है। कहा कि गायत्री सद्बुद्धि की, ऋतंभरा प्रज्ञा की अधिष्ठात्री देवी है और उससे साधक सद्बुद्धि की याचना करता है। इस सद्बुद्धि के द्वारा सभी प्रकार के दु:खों का कारण मूल से दूर किया जा सकता है। बताया कि सद्बुद्धि के प्रकाश में वे सभी उपाय सुझाई देने लगते हैं, जिनको काम में लाने पर दु:खों के मुख्य कारण दूर हो जाते हैं। 

बताया कि  जीवन और जगत् में विद्यमान समस्त दु:खों के कारण तीन हैं-  अज्ञान, अशक्ति और अभाव। जो इन तीन कारणों को जिस सीमा तक अपने से दूर करने में समर्थ होगा, वह उतना ही सुखी बन सकेगा और आनंद का अनुभव कर सकेगा। महिला मंडल द्वारा स्वाध्याय पाठ-संवाद के बाद गायत्री दीपयज्ञ हुआ और विधिवत मंगलमय गायत्री स्तवन एवं स्वस्तिवाचन पाठ कर गायत्री महामंत्र एवं महामृत्युंजय के भावार्थ बताकर गुरुवरश्री वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा बतायी गयी युग की आवश्यकता, महत्ता एवं उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया। 

पूर्णाहूति उपरांत सर्वत्र रचनात्मक वातावरण सृजन की मंगलमय वंदना व शुभकामना की गयी। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने दी।

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