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श्वेताम्बर जैनधर्म का पर्युषण पर्व का कार्यक्रम डोरंडा जैन मंदिर एवं दिगम्बर जैन भवन में जारी

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श्वेताम्बर जैनधर्म का पर्युषण पर्व का कार्यक्रम डोरंडा जैन मंदिर एवं दिगम्बर जैन भवन में जारी
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टीम एबीएन, रांची। श्वेताम्बर जैनधर्म का पर्युषण पर्व का कार्यक्रम डोरंडा जैन मंदिर एवं दिगम्बर जैन भवन में चल रहा है। पर्युषण पर्व अंतर्गत श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ का डोरंडा जैन मंदिर में धर्म आराधना चल रहा है एवं श्री साधुमार्गी जैन श्वेताम्बर संघ एवं तेरापंथ धर्मसंघ का आज से दिगम्बर जैन भवन में पर्युषण शुरू हुआ रहा है।

डोरंडा स्थित जैन मंदिर में परम् पूज्य श्री खतरगच्छाधिपति मणीप्रज्ञ सागर सूरीश्वर जी की आज्ञा से परम् पूज्य गुरूवर्या श्री लयस्मिता श्री जी आदि ठाणा ने डोरन्डा जैन उपाश्रय में आज भावदा बदी चौदस को मणिधारी गुरुदेव का स्वर्गारोहण जयंती मनायी गयी। 

साथ ही परवाधीराज पर्युषण के दूसरे दिन अष्टानिका व्याख्यान में आत्मा के विषय में सुयश महाराज की कथा श्रवण की गयी। साथ ही परमात्मा भक्ति के रूप में आद्र कुमार की कथा का श्रवण किया गया। पर्युषण के दैनिक पांच कर्तव्य हृदय परिवर्तन, साधार्मिक भक्ति, पारस्परिक क्षमापन, अठम तप एवं चैत्य परिपाथी है! इसकी व्याख्या बतायी गयी और वार्षिक 11 कर्तव्य को विस्तार से समझाया गया।

दादा मनिहारी गुरुदेव जो 6 वर्ष की बाल अवस्था में संयम अंगीकार कर लिया और 2 वर्ष के बाद आचार्य पदवी पाली संघ के बहुत सारे अनेक कार्य उन्होंने संपन्न किया साथ ही मदनपाल राजा एवं अकबर राजा को प्रतिबोध देखकर जिन शासन का अनुरागी बनाया था, दादा गुरुदेव के जीवनचर्या के बारे में बताया गया। दोपहर में ज्ञान शाला एवं शाम में 7 बजे से भक्ति भजन कार्यक्रम हुआ! आज के प्रवचन में काफी संख्या में समाज के लोग उपस्थित हुए।

इधर दिगम्बर जैन भवन, हरमू रोड में श्री साधुमार्गी जैन श्वेताम्बर संघ रांची का आज से पर्युषण पर्व कार्यक्रम शुरू हुआ। आज प्रथम दिन धर्म की प्रभावना करने मुम्बई से आये स्वाध्यायी बंधु श्रीमान गौतम जी रांका और सुरेश जी बोरडिया ने अंतः गढ़ सूत्र की वाचना एवं प्रवचन दिया।प्रवचन का विषय पर्युषण में आत्म सौंदर्य जगाने का अवसर था। इस विषय पर कहते हुए उन्होंने बताया कि संसार के सारे सौंदर्य आत्मा सौंदर्य के सामने फीके हैं। 

पर्युषण में ज्ञान, दर्शन, चरित्र, तप की आराधना करके कर्मों की निर्जरा करके आत्मा के समीप रहकर आत्म सौंदर्य को बढ़ा सकते हैं जिससे इस जन्म में शांति और सुख का वरण होता है। अतः कर्मों की निर्जरा के लिए आत्म सुख पाने के लिए 12 भावनाओं के द्वारा अपनी आत्मा को निर्मल बनाकर भाव परिभ्रमण को रोक सकते हैं। समता महिला मंडल ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया! घेवरचंद नाहटा ने पर्युषण पर अपने विचार प्रस्तुत किये।

कार्यक्रम का संचालन साधु मार्गी संघ रांची के मंत्री उत्तम चौरड़िया ने किया। इस अवसर पर अशोक  सुराणा, जानकी दास बोहरा, श्री देव पींचा, शुभकरण बछावत,विमल दस्सानी, विनोद बैंगानी, ललित पींचा सहित जैन समाज के श्रावक उपस्थित थे। दोपहर में धर्म चर्चा और संध्या के समय प्रतिक्रमण एवं प्रवचन हुआ। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने दी।

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