टीम एबीएन, रांची। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) के विश्वविद्यालय अखड़ा में शुक्रवार को पूरे विधि विहान से सरहुल पूजा का आयोजन किया गया। सरहुल पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के टीआरएल विभाग के द्वारा किया गया।
इस अवसर पर पारंपरिक तरीके से सरहुल पूजा की गई।इस पूजा कार्यक्रम में पहान डॉ जुरन सिंह मानकी और महेश पाहन थे। मौके पर डीएसडब्ल्यू डॉ एसएम अब्बास ने वर्तमान संदर्भ में पर्यावरण संकट का उल्लेख करते हुए सरहुल पर्व की प्राकृतिक महत्ता के विषय पर चर्चा की।
उन्होंने इस महान पर्व को प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए अत्यंत आवश्यक और प्रासंगिक बताया। विशिष्ट अतिथि पूर्व कुलपति और मानवशास्त्री डॉ सत्यनारायण मुंडा ने सरहुल पर्व की महत्ता को बताते हुए जनजातीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं की चर्चा की।
उन्होंने कहा कि सरहुल पर्व जनजातीय संस्कृति को पर्यावरण के संरक्षण की बात पर बल देता है। टीआरएल विभाग के समन्वयक प्रोफेसर रामदास उरांव ने स्वागत भाषण और सरहुल पर्व पर अपने विचार रखें।
इस मौके विश्वविद्यालय के वित्त पदाधिकारी आनंद मिश्रा, डॉ जिंदर सिंह मुंडा, साहित्यकार महादेव टोप्पो, सोमा सिंह मुंडा और खोरठा भाषा के विभागाध्यक्ष डॉ विनोद कुमार ने भी सरहुल पर्व की महत्ता को दशार्ते हुए अपना उदबोधन दिया और सरहुल पर्व की प्रासंगिकता को बताया।
इससे पूर्व अतिथियों का स्वागत टीआरएल विभाग के विद्यार्थियों के पारंपरिक तरीके से किया गया। इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामूहिक नृत्य संगीत का कार्यक्रम भी हुआ। मंच संचालन डॉ डुमिनी मुर्मू और डॉ जयकिशोर मंगल ने और धन्यवाद डॉ पीपी महतो ने किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक, कर्मी और विभाग के विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। यह जानकारी विश्वविद्यालय के पीआरओ राजेश कुमार सिंह ने दी।