टीम एबीएन, रांची। सड़क सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भले ही दो दर्जन से अधिक दिशा निर्देश दिए हैं, लेकिन उनका अनुपालन नहीं हो रहा है। अभी भी स्कूली बच्चे बिना हेलमेट, तीन लोगों के साथ तेज रफ्तार बाइक चलाते दिख जाएंगे। मोटरयान एक्ट में हाल में हुए संशोधन में इस पर रोकथाम के लिए कड़े प्रविधान किए गए हैं। अगर नाबालिग स्कूली बच्चे बाइक चलाते हुए पकड़े जाते हैं, तो उनके माता-पिता को छह माह की जेल हो सकती है। लेकिन जिले में इसका अनुपालन नहीं हो रहा है। इसकी वजह जिला सुरक्षा कमेटी की समय से बैठक न होना।
साथ ही जिले में ट्रैफिक एसपी का पद खाली होना है। उक्त दोनों पर इस कानून के लागू कराने के साथ-साथ क्रियान्वयन कराने की भी जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट ने सड़क हादसों में लोगों की मौत के बाद निगरानी के लिए जिलास्तर पर सुरक्षा कमेटी बनायी गयी। पहले कमेटी के अध्यक्ष सांसद होते थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने मार्च माह में इसमें बदलाव किया है।
अब उक्त कमेटी के अध्यक्ष जिला अधिकारी (डीएम) या उपायुक्त (डीसी) होते। इसमें एसपी, सिविल सर्जन, पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता सहित दस सदस्य होंगे। जिन्हें कई जिम्मेदारियां दी गयी है। कमेटी की निर्धारित अवधि पर बैठक नहीं होने की वजह से कानून का अनुपालन नहीं हो पा रहा है।