त्रिवेणी दास
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी देश के निर्वाचित तीन बार से लगातार यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए तू-तड़ाक का भाषा का प्रयोग करते रहे हैं.. नरेंद्र मोदी रात को नहीं सोता है तो सहज ही देश के राजनीतिक वातावरण का अंदाज लगाया जा सकता है।
56 इंच का छोटा बंदर
जल्दी आओ संसद के अंदर
दिल्ली के पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के सुपुत्र कांग्रेस से पूर्व लोकसभा सदस्य संजीत दीक्षित (संदीप दीक्षित) ने संसद क्षेत्र में बंदर-छाप प्रदर्शन के दौरान कहा कि मेलोनी समझ के तो नहीं पकड़ा जबकि जॉर्जिया मेलोनी इटली के सम्मानित प्रधानमंत्री हैं, और राहुल गांधी दीक्षित को प्रसन्नता से पोटरा लेते हैं।
56 इंच के बंदर का टेडी मंकी ले कर प्रदर्शन करने वाले कांग्रेसी नेता पवन खेड़ा ने आज तक लोकसभा का कभी चुनाव नहीं लड़ा है अलबत्ता पिछले दरवाजे से राज्यसभा के सदस्य हैं। अपने आका को खुश करने के लिए कोई इतने निचले स्तर तक जा सकता हैं लोकतंत्र की परिभाषा में इसकी कल्पना भी नहीं की जाती है।
कांग्रेस के नेता राहुल गांधी का ऐसा प्रभाव है कि जहां जिस राज्य में जाते हैं कांग्रेस का भट्ठा बैठा देते हैं। बिहार बंगाल महाराष्ट्र जैसे अनेक राज्यों के चुनाव से तो यही सिद्ध होता रहा है। उनका अगला टारगेट उत्तर प्रदेश है जहां वह अखिलेश यादव के समाजवादी पार्टी का भट्ठा बैठा के हीं रहेंगे।
जवाहरलाल नेहरू, दादी इंदिरा गांधी, पिताजी राजीव गांधी जैसे प्रधानमंत्रियों के बारिश/युवराज कैसे बर्दाश्त करें कि कोई चाय बेचने वाला देश का प्रधानमंत्री चुने जाते रहे हैं। जनता ने ही मोदीजी को लोकप्रिय नेता बनाया है राहुल गांधी को जनता से ही सवाल पूछना चाहिए.. क्योंकि यह देश के जनता की जागीर है किसी खास की नहीं...।