एबीएन न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली/लोहरदगा। देश में प्रस्तावित परिसीमन (डीलिमीटेशन) और लोकसभा सीटों की संभावित बढ़ोतरी को लेकर सियासी बहस तेज हो गयी है। इस बीच लोहरदगा से कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के रुख का खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि संसद में सांसदों की संख्या बढ़ाना लोकतंत्र की मजबूती का उपाय नहीं है, बल्कि इससे व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ बढ़ सकता है।
संसद भवन परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए सुखदेव भगत ने कहा कि वह राहुल गांधी के विचारों से पूरी तरह सहमत हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लोकसभा में 543 सदस्य हैं और सभी सांसदों को जनता के मुद्दे उठाने तथा अपने विचार रखने के पर्याप्त अवसर मिलते हैं। ऐसे में केवल सांसदों की संख्या बढ़ा देना किसी समस्या का समाधान नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पहले से ही बहुस्तरीय है। राज्यों की अपनी सरकारें हैं, वहीं जिला परिषद, नगर निगम और अन्य स्थानीय निकाय स्थानीय स्तर पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। इसलिए प्रतिनिधित्व को केवल सांसदों की संख्या बढ़ाने तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।
सुखदेव भगत ने संसद की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि संसद का मूल दायित्व देश के लिए राष्ट्रीय नीतियों का निर्माण करना है। विदेश नीति, आर्थिक नीति तथा संघ और समवर्ती सूची से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर और गुणवत्तापूर्ण बहस ही संसद की वास्तविक पहचान है। उन्होंने कहा कि यदि केवल संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया तो निर्णय प्रक्रिया और संसदीय व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती प्रतिनिधियों की संख्या से नहीं, बल्कि उनकी प्रभावी भागीदारी, जवाबदेही और राष्ट्रीय मुद्दों पर सार्थक विमर्श से सुनिश्चित होती है। ऐसे में परिसीमन पर निर्णय लेते समय केवल सीटों की संख्या नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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