टीम एबीएन, रांची। रांची के पुंदाग स्थित श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संत शिरोमणि परमहंस स्वामी सदानंद महाराज के सान्निध्य में निर्जला एकादशी पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ मनाया गया।
इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन एवं सामूहिक आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुआ।
मंदिर के पुजारी पंडित अरविंद पांडे ने विधि-विधान से भगवान की आराधना संपन्न कराई तथा प्रसाद का भोग अर्पित किया। निर्जला एकादशी के अवसर पर श्री राधा रानी का विशेष एवं आकर्षक श्रृंगार नवीन पीले रंग के दिव्य पोशाक तथा जड़ित आभूषणों से किया गया। सुसज्जित स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। मंदिर परिसर में सजे पुष्पों, दीपों एवं धार्मिक सजावट ने वातावरण को और भी मनोहारी बना दिया।
पूजा-अर्चना के पश्चात भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ,जिसमें श्रद्धालुओं ने भगवान के भजनों का रसपान करते हुए भक्तिमय वातावरण का आनंद लिया। सामूहिक आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर भगवान के जयघोष एवं मंत्रोच्चार से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने एक स्वर में आरती कर विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं मानव कल्याण की प्रार्थना की।
कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं के बीच वेजिटेबल खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया गया। श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर सेवा, समर्पण और सहयोग की भावना को आत्मसात किया। मौके पर ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सचिव मनोज चौधरी एवं प्रवक्ता संजय सर्राफ ने निर्जला एकादशी की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनायी जाने वाली निर्जला एकादशी सभी एकादशियों में विशेष स्थान रखती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत, उपवास, जप, तप और भगवान विष्णु की आराधना करने से वर्षभर की समस्त एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होता है। यह पर्व संयम, आत्मशुद्धि, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक उन्नति का संदेश देता है।
प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि कार्यक्रम का समापन विश्व कल्याण, समाज की सुख-समृद्धि एवं मानवता के मंगल की कामना के साथ हुआ तथा उपस्थित श्रद्धालुओं ने ऐसे धार्मिक आयोजनों को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक सद्भाव को सुदृढ़ करने वाला प्रेरणादायी प्रयास बताया।