परमात्मा से मांगे तो सद्गुणों की सम्पदा : यज्ञ पुरोहित
एबीएन सोशल डेस्क (रांची)। त्रिवेणी संगम के रूप में गायत्री परिवार साधक-शिष्यों ने गायत्री महामंत्र का सामूहिक सस्वर पाठ, गुरु-ईश ध्यान, नमन वंदन सहित चलेंगे हम जगत जननी तुम्हारे ही इशारे पर... प्रज्ञागीत गायन वादन कर गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा यज्ञशाला में महायज्ञ 9 कुंडीय विधान से आज सोल्लास मनाया।
इस बीच कुछ नये परिजनों ने गायत्री महामंत्र की गुरुदीक्षा संस्कार ली और यज्ञोपवित परिवर्तन कराये। दो पाली में यज्ञीय आहुतियां दी गयी। अमृताशन का भंडारा हुआ।
इस क्रम में मंगलवार को दिन भर 12 घंटे का जप-अनुष्ठान किया गया। यज्ञ दौरान पुरोहित ने बताया कि परमात्मा से साधना, प्रार्थना में यदि मांगना हो तो सदगुणों की सम्पदा ही मांगनी चाहिए। बताया कि ईश्वरीय उपासना साधना में उपासना, साधना का उद्देश्य झोली पसारना नहीं, स्वार्थ की पूर्ति नहीं, दीन भावना नहीं, ये शोभनीय नहीं है।
यह न आत्मा को शोभनीय है न परमात्मा को प्रिय। आस्तिकता, उपासना, साधना से हमें जीवन चर्या में पवित्रता, पात्रता, योग्यता, क्षमता, बनानी व बढ़ानी चाहिए। हमारे जीवन के मुख्य उद्देश्य और ईश्वरीय मूल्यवान दर्शन को समझना एवं जीवन में उतारना और इसका पालन आवश्यक है।
हमारे आचरण की पार्वत्रता विचारों की शुद्धता और परिवार व समाज के प्रति कर्तव्य व उत्तरदायित्व का सुबोध व समावेश अपेक्षित होना चाहिए।प्रार्थना में यही कामना रहनी चाहिए कि परमात्मा हमें इस लायक बनाए कि उसके सच्चे भक्त, सही अनुयायी व पुत्र कहला सकने का गौरव प्राप्त करें। 9 कुंडीय यज्ञ दो पाली में संपन्न हुआ।
इसके साथ साथ रांची जिलांतर्गत बेड़ो, खलारी व बुंडु सबडिविजन तमाड़ आदि कई प्रखंड इकाइयों सहित गायत्री परिवार के अन्य पीठ केंद्र अलकापुरी शक्तिपीठ, बस स्टैंड धुर्वा प्रज्ञापीठ, टाटीसिलवे चेतना केंद्र सहित कई इकाई शाखाओं में भी यज्ञीय अनुष्ठान विधान से ये पर्व समारोह कार्यक्रम आयोजित किये गये।
कार्यक्रम में सर्वत्र लोकहित व विश्व शान्ति हेतु स्वस्तिवाचन सहित शान्ति पाठ कर मंगल कामनाएं की गयी। इस कड़ी में संध्या कालीन दीपयज्ञ विधान भी किये गये और पूज्यवर के आध्यात्मिक संविधान के 18 सूत्रीय सत्संकल्प पाठ सबसे कराये गये। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने दी।