एबीएन सोशल डेस्क। आज 9 कुंडीय गायत्री महायज्ञ आयोजन का शुभारंभ प्रात:काल 8 बजे से सर्वतोभद्र देवपूजन अनुष्ठान से हुआ। अच्छी संख्या में हर एक कुण्ड पर पति पत्नी जोड़ी की भी उपस्थिति रही। पूजन पद्धति में तैंतीस दैवशक्तियों का आवाहन नमन वंदन षोडशोपचार पूजन व स्वस्तिवाचन पाठ हुआ।
सायंकालीन सत्र में लोक कल्याण जिज्ञासा प्रकरण में भगवान विष्णु एवं नारद मध्य विशेष सद्ज्ञान तत्व संवाद पर चर्चा व कथा हुई। कथावाचक संतोष कुमार संगम ने कहा कि देवर्षि नारद को भगवान की विशेष अनुकम्पा मिली थी, क्यों कि उन्होंने परहित को अपना जीवनोद्देश्य माना था। बताया कि परमार्थ में सच्ची लगन हो तो पूण्य अर्जन के अतिरिक्त आत्म कल्याण का भी लाभ मिलता है।
इस विषय पर अनेक महत्वपूर्ण प्राचीन कालीन, शास्त्रीय और सामयिक घटना क्रम की कथा सुनायी। आधुनिक काल की महा चेतना का अवतार, उनकी प्रतिज्ञानुसार ऋतंभरा प्रज्ञा गायत्री एवं मंगलमय प्रज्ञावतार युगपुरुष युग सृजेता, उनका लीला संदोह, सही सच्ची भक्ति व भक्तों के लिए आज की सामयिक समस्या समाधान, भगवान विष्णु व देवर्षि नारद के परामर्श, मार्गदर्शन और पृथ्वी लोक पर क्रियान्वयन पर अनेक उदाहरण दृष्टांत पेश करके बताया।
प्रथम रामायण सीरियल निर्माण के संदर्भ में रामानंद सागर के साथ घटी घटना, अनुभूति और गुरुवरश्रीपूज्यवर के साथ विशेष भेंट मुलाकात, परस्पर गहन संवाद पर प्रकाश डालकर विस्तार से बताया। आगे चर्चा में बताया कि गुरुदेव श्रीप्रज्ञावतार की लिखी 19 वें पुराण पावन प्रज्ञा पुराण कथामृतम में रामायण काल, महाभारत काल में और प्रज्ञा पुराण कथामृतम में आधुनिक समस्याओं के शत प्रतिशत समाधान के सूत्र हैं।
तब के रावणवृति और आज के तुलनात्मक परिस्थिति विश्लेषण कर प्रज्ञागीत गायन माध्यम से बताया कि आदमी को आदमी सुहाता नहीं अचिंत्य चिंतन, अनैतिक आचरण व अनास्था का दौर, प्रेम का अभाव, प्रकृति का कोप आदि कई विषय पर स्वाध्याय करने का परामर्श दिया।
गंगा यमुना व त्रिवेणी से निकली एक एक अक्षर गा, य, त्री पर चर्चा करते हुए गयान् प्राणान् त्रायते सा गायत्री महामंत्र, यज्ञीय विधान, संस्कार प्रकरण पर विशेष ध्यानाकर्षित कर इसकी आवश्यकता व महत्ता पर प्रकाश डाला। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने दी।