- गायत्री महिमा का गान अनेक प्रकार से किया गया है : साधक-शिष्य
एबीएन सोशल डेस्क। हे गायत्री माता तेरी महिमा अपरम्पार है, यह अद्भुत अति सुन्दर तेरा रचा हुआ संसार है। कार्यक्रम प्रारंभ में प्रज्ञागीत गायन कर गायत्री महिला मंडल प्रतिनिधित्व में निष्ठावान परिवार मध्य चुटिया में गायत्री महामंत्र का अखंड जप-अनुष्ठान अखंड ज्योति एवं गुरुमाता जन्म शताब्दी वर्ष अनुयाज कार्यक्रम क्रम में तीन दिवसीय किया गया।
प्रथम दिन संध्याकाल संध्या वंदन में संकल्पित होकर षटकर्म, कलश पूजन, अखंड दीप ज्योति प्रज्ज्वलन कर गायत्री चालीसा पाठ, दूसरे दिन बारह घंटे का अखंड जप-अनुष्ठान, सायंकाल गायत्री दीपयज्ञ तथा तीसरे चरण में आज सुबह गायत्री हवन-यज्ञ विधान में विशिष्ट मंत्रों से अग्निहोत्र कर मनोरथपूर्ण पूर्णाहुति सोल्लास संपन्न किया।
इस अवसर पर गायत्रीपरिवार संस्थापक परम पूज्य गुरुदेव की लिखित गायत्री महामंत्र की महिमा और गायत्री महाविज्ञान पुस्तक पर अनेक विषयगत चर्चा की गई। यज्ञीय पुरोहित ने बताया कि इसे वेदमाता, देवमाता, विश्वमाता सर्वकामधुक् ( सभी श्रेष्ठ कामनाओं को पूरा करने वाली) कहा गया है। किन्तु यह गुह्य विद्या है।
आचार्य श्रीराम शर्मा पूज्य ने इस युग में मनुष्य मात्र को दुर्बुद्धि के चंगुल में जकड़ते, पीसते देखा तो सद्बुद्धि, सद्वभाव, सद्विचार, सद्ज्ञान प्रदायिनी, सन्मार्ग, सत्पथ गामिनी गुह्य गायत्री महाविद्या को जन-जन तक पहुंचाए जाने और जन सुलभ बनाने का भागीरथी तपोबल और अपने संकल्प बल का पुरुषार्थ सार्थक किया। इस पुण्य प्रसाद को जन-जन के लिए पुरुषार्थ स्वरूप गायत्री महाविद्या का युगानुरुप सफल प्रयोग कर गायत्री महाविज्ञान का सृजन व प्रकाशन किया।
इससे शिष्य जिज्ञासुओं एवं विशिष्ट साधकों की रूचि बढ़ती गई और समस्याओं के समाधान, निराकरण करते गये। गुरुवर श्रीपूज्यवर ने बताया है कि गायत्री महामंत्र की महिमा एक ऐसा तत्व है, उदाहरण व दृष्टांत हैं,जिसे सभी महापुरूषों एवं ऋषि महर्षियों ने एक मत से स्वीकार किया है।
गुरुवरश्री ने बताया है कि गायत्री ही ब्रह्म की सर्वोत्कृष्ट चेतना है, गायत्री उपासना साधना सर्वदा हितकारी, शुभकारी और लाभकारी है। श्रद्धापूर्वक गायत्री माता का आंचल पकड़ने का परिणाम सदा कल्याणकारक होता है।गायत्री मंत्र को भारतीय संस्कृति में सबसे श्रेष्ठ मंत्र माना गया है। नवरात्र महापर्व काल में गायत्री महामंत्र का जप-अनुष्ठान आत्म विकास में एक स्वर्णिम अवसर माना गया है।
परम पूज्य श्रीगुरुदेव ने इसमें साधना संबंधित कुछ भ्रांतियों के निवारण का भी जिक्र किया है।यजमान ने देव दक्षिणा में एक दुर्गुण का त्याग और एक सद्गुण ग्रहण का संकल्प सहित पूर्णाहुति सोल्लास संपन्न किया।इस कार्यक्रम में अपर चुटिया, मकचून्द टोली और रेलवे कॉलोनी महिला मंडल प्रतिनिधियों ने पूरा सहयोग किया। उक्त जानकारी जय नारायण प्रसाद और बैद्यनाथ केशरी ने दी।