बच्चों में सद्गुण जगायें और बढ़ाये जायें विषय पर हुआ स्वाध्याय
एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री परिवार साधकों का आज स्वाध्याय पाठ-संवाद हुआ। बच्चों में सद्गुण जगायें और बढ़ाये जायें। बताया गया कि हम सब और हमारे बच्चे भी सामाजिक व्यक्ति हैं। हमारे बच्चे बचपन में पारिवारिक अधिक हैं, यद्यपि उनका भी इस उम्र में एक समाज है, जो बाल समाज स्वरूप है, फिर उन्हें भी अगले दिनों चलकर, युवावस्था पाकर सामाजिक व्यक्ति बनना है, एक उत्तरदायी नागरिक बनना है।
फिर दूसरों की नागरिकता, सज्जनता और उनकी प्रतिष्ठा का ध्यान, ख्याल करते हुए, सन्मार्ग, सत्कर्म का अनुसरण करना, उनकी नागरिकता व प्रतिष्ठा का मूल्यांकन करना आदि सद्गुण आवश्यक व अपेक्षित होता है। अत: हम सब अभिभावकों का कर्तव्य है कि बच्चों में अभी से ऐसा सुसंस्कार, शिष्टता, सदाचार, अनुशासन का मनोभाव, सुंदर वातावरण माहौल, स्वच्छता, शुचिता, परिश्रम, परोपकार, सेवाभाव, सद्ज्ञान व सद्गुण का भाव जगाने, बढ़ाने में सहयोग व सद्भाव उत्पन्न करें कि सबमें सज्जनता, नागरिकता, सभ्यता का मान प्रतिष्ठा का भाव बढ़ें।
मूल्य समझें और आगे चलकर, उनकी रक्षा करते हुए वे एक सफल नागरिक बन सिद्ध व गौरवान्वित हों सकें। प्रेमलता दीदी ने अपने संवाद सार में में बताया कि नागरिकता, सज्जनता व प्रतिष्ठा का सबसे बड़ा आधार है सद्गुण। उपर्युक्त विषय पर गायत्री परिवार आनलाइन स्वाध्याय पाठ-संवाद समूह के साधक-शिष्य भाई-बहनों ने आज सुबह पूज्यगुरुदेवश्री वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पं• श्रीरामशर्मा आचार्य द्वारा लिखित युग साहित्य हमारी भावी पीढ़ी और उसका नवनिर्माण नामक युग-साहित्य का राष्ट्रीय आनलाइन स्वाध्याय पाठ व संवाद किये।
प्रारंभ गायत्री महामंत्र के मंत्रोच्चारण एवं गुरु-ईश वंदना सस्वर पाठ से और पाठ समापन शांतिपाठ से किया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ-साधक जय नारायण प्रसाद ने दी।