Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
समाज

हरतालिका तीज पर्व 26 अगस्त को

शेयर करें: WhatsApp Facebook X
हरतालिका तीज पर्व 26 अगस्त को
विज्ञापन

भगवान शिव-पार्वती एवं गणेश जी की पूजा का विशेष महत्व 

हरतालिका तीज नारी शक्ति, श्रद्धा, तपस्या और प्रेम का प्रतीक : संजय सर्राफ 

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता सह झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री संजय सर्राफ ने कहा है कि हरतालिका तीज भारत के प्रमुख हिंदू त्योहारों में से एक है, जो विशेष रूप से महिलाओं द्वारा श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। यह पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष यह व्रत 26 अगस्त दिन मंगलवार को मनाया जायेगा? 

इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए हरतालिका तीज का निर्जला व्रत रखती हैं। हरतालिका तीज का व्रत सुहागिने और कुंवारी कन्याएं भी रहती हैं। हिंदू धर्म में हरतालिका तीज का बड़ा महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरतालिका तीज व्रत रखने से ही मां पार्वती को भगवान शिव पति के रूप में मिले थे। 

हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने से सुहागिनों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और कन्याओं के विवाह में आ रही परेशानियां दूर होती हैं। इसके साथ ही इस व्रत के प्रभाव से अच्छा वर भी मिलता है। हरतालिका तीज व्रत की शुरुआत करने के बाद जीवनभर इस व्रत को रखा जाता है। हालांकि,अगर व्रत रख पाना संभव ना हो, तो हरतालिका तीज व्रत का उद्यापन जरूर करना चाहिए। 

हरतालिका तीज का नाम दो शब्दों हरित (हरण करना) और आलिका (सखी) से मिलकर बना है। इस दिन माता पार्वती द्वारा भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए किए गए कठिन तप और संकल्प को स्मरण किया जाता है। मान्यता है कि पार्वती जी को जब उनके पिता ने भगवान विष्णु से विवाह के लिए बाध्य किया, तो उनकी सखियां उन्हें वन में ले गयी, जहां पार्वती जी ने कठोर तपस्या की। 

अंतत: भगवान शिव ने उनका तप स्वीकार किया और उन्हें पत्नी रूप में स्वीकारा। तभी से यह दिन सुहागिनों और कुंवारी कन्याओं के लिए विशेष माना गया। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, यानी जल तक ग्रहण नहीं करतीं। वे पूरे दिन उपवास रखकर रात्रि में शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। पूजा में शुद्ध मिट्टी या रेत से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्तियां बनाई जाती हैं। 

महिलाएं पारंपरिक वस्त्रों, विशेष रूप से हरे रंग की साड़ी,चूड़ियां पहनकर और मेंहदी लगाकर सजती हैं, गीत गाती हैं और झूला झूलती हैं। हरतालिका तीज व्रत का आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टियों से अत्यधिक महत्व है। यह व्रत पति की दीघार्यु, पारिवारिक सुख-शांति और सुयोग्य वर प्राप्ति के लिए किया जाता है। 

इसके साथ ही यह पर्व महिलाओं को सामाजिक रूप से जोड़ता है और संस्कृति से जुड़ाव को भी बढ़ावा देता है। हरतालिका तीज नारी शक्ति, श्रद्धा, तपस्या और प्रेम का प्रतीक है। यह पर्व भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान, उसकी आस्था और उसकी शक्ति को एक सुंदर रूप में अभिव्यक्त करता है। यही कारण है कि यह पर्व आज भी पूरी भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

विज्ञापन

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ 24 अपने सभी पाठकों और प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और विश्वास के लिए धन्यवाद।

विज्ञापन

© 2026 ABN News 24. All Rights Reserved.

कुल पाठक (Total Visitors): 82,351