श्री जैन श्वेतांबर के पर्युषण पर्व में दिव्य प्रवचन
टीम एबीएन, रांची। श्री जैन श्वेताम्बर संघ के पर्युषण पर्व के आज दूसरे दिन जैन मंदिर डोरंडा एवं दिगंबर जैन भवन में प्रवचन हुआ। श्री दिगंबर जैन भवन में उपासिका संतोष श्रीमाल एवं सीमा डूंगरवाल का प्रवचन सुबह 8:30 बजे से हुआ। पर्युषण पर्व का दूसरा दिन स्वाध्याय दिवस के रूप में मनाया गया।
श्रीमती श्रीमाल ने स्वाध्याय के ऊपर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वाध्याय आत्मदर्शन का दर्पण है। यह हर व्यक्ति की आत्मा पर जमी हुई कालिमा को दूर कर व्यक्तित्व को सजाता संवारता है स्वाध्याय से हमारे पूर्व संचित कर्मफल की विशुद्धि होती है, स्वाध्याय करते-करते साधक आत्मविद्या को प्राप्त होता है। स्वाध्याय अनेक प्रकार की लब्धियां सिद्धियां प्राप्त करने का सोपान है।
उन्होंने आगे कहा कि स्वाध्याय एक महकता गुलशन है, जिसके सौरभ से मन प्रसन्न होता है तथा विचारों की पवित्रता बढ़ती है। ज्ञानावरणीय कर्म का क्षय होता है। सम्यग् ज्ञान की प्राप्ति के लिए आगम स्वाध्याय का विशेष महत्व बताया गया है। श्रीमती डुंगरवाल ने स्वाध्याय की महत्ता को उजागर करते हुए अपने विचार व्यक्त किए एवं गीतिका प्रस्तुत की। विशाल दस्सानी के आज 22 उपवास की तपस्या चल रही हैं।
प्रवचन में अध्यक्ष बिमल दस्सानी, अमर चंद बैगानी, कोमल गेलड़ा, प्रकाश नाहटा, मूलचंद सुराणा, राजेश पींचा, ललित सेठिया के अलावा भारी संख्या मे श्रावक एवं श्राविकाएं मौजूद थे। श्री जैन मंदिर डोरंडा में सुबह 7 बजे नमिनाथ भगवान की प्रक्षाल पूजा हुई एवं स्नात्र पूजा हुई। तत्पश्चात 9 बजे से मुंबई से पधारे स्वाध्यायी श्री हर्षिल सुरेश साह एवं जिनांग धीरेन साह का प्रवचन हुआ।
प्रवचन मे पर्युषण पर्व मे किये जाने वाले पांच कर्तव्यों के बारे में बताया गया, इन पांच कर्तव्यों मे अहिंसा साधार्मिक भक्ति, प्रत्याखान, चेत्य परिपाटी एवं क्षमापना है जो कि जिन शासन की पहचान है एवं गौरव भी है। पर्युषण के इन आठ दिनों मे प्रवचन स्वाध्याय करते है तो ज्ञान की महिमा, जिन पूजा करने से दर्शन की महिमा, सामायिक पौषध प्रतिक्रमण से चरित्र की महिमा, तप त्याग करने से तप की महिमा मिलती है इसलिये इसे पर्वाधिराज पर्युषण पर्व कहा जाता है।
मंदिर में आज अध्यक्ष सम्पत लाल रामपुरिया, धर्मचंद भंसाली, प्रमोद बोथरा, अनिल कोठरी, विनय नाहटा आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे। दोपहर मे ज्ञान शाला एवं शाम मे दोनों जगह पर प्रतिक्रमण के पश्चात भक्ति संध्या की गयी।