भगवान शिव की मानस पुत्री मनसा देवी की पूजा आस्था और विश्वास के साथ सम्पन्न
मान्यता: सांपों के काटने से होने वाली बीमारियों से सुरक्षा और संतान प्राप्ति के लिए की जाती है मनसा पूजा
कई स्थानों पर बत्तख की दी गई बलि
एबीएन संवाददाता,लोहरदगा। झारखंड के लोहरदगा के विभिन्न स्थानों में 17 अगस्त को भगवान शिव की मानस पुत्री मां मनसा देवी की पूजा विश्वास, भक्ति, आस्था और समर्पण भाव से किया गया। मनसा पूजा में विशेष रूप से झारखंड के रांची, धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़, पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम आदि इलाकों में ओडिया और बांग्ला भाषी के अलावा पंचपरगनिया,खोरठा भाषा-भाषी के लोग अधिकांश रूप से शामिल होते हैं। लोहरदगा के पतराटोली, थाना टोली, पावरगंज क्षेत्र, छत्तर बगीचा बाल्मीकि नगर आदि इलाकों में मां मनसा की प्रतिमा और चित्र स्थापित कर उनकी विधिवत पूजा अर्चना की गई। कुछ इलाके में वक्त की बलि दी गई।
नागों की देवी की आराधना को मनसा पूजा या नाग पूजा भी कहा जाता है।एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो क्षेत्रीय कैलेंडर के श्रवण संक्रांति के दिन में मनाया जाता है। यह देवी मनसा को समर्पित है, जिन्हें सांपों की देवी माना जाता है। इस त्योहार के दौरान, भक्त देवी मनसा की पूजा करते हैं, उनसे आशीर्वाद मांगते हैं और सांपों के काटने और बीमारियों से सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं।
मनसा देवी को सांपों की देवी माना जाता है। उनकी पूजा करने से सांपों के काटने और उनसे होने वाली बीमारियों से सुरक्षा मिलती है।
ऐसी भी मानता है कि मनसा देवी को संतान प्राप्ति के लिए भी पूजा जाता है। उनकी पूजा करने से निसंतान दंपतियों को संतान सुख मिलता है।
भक्तों को शारीरिक और मानसिक कष्टों से छुटकारा मिलता है।
मनसा पूजा में, भक्त देवी को फूल, फल, मिठाई, और दूध चढ़ाते हैं।
कुछ भक्त बत्तख या अन्य जानवरों की बलि भी चढ़ाते हैं।पूजा के बाद, भक्त प्रसाद ग्रहण करते हैं और दूसरों को भी प्रसाद वितरित किया गया। थाना टोली में पुरोहित सुभाष चंद्र चौबे ने पूजा संपन्न कराया इस मौके पर यजमान के रूप में संतोष मुखर्जी- बिनोती देवी, मृत्युंजय चौबे, सोम मुखर्जी अनीता ओझा, प्रतिमा मुखर्जी, सुमन ओझा, कृष्णा, पूजा, सुदीप्ता, ईशानी, अर्पिता, नील, रुद्रांश सावित्री करुआ समेत काफी संख्या में लोग शामिल हुए।
मनसा देवी को भगवान शिव की मानस पुत्री माना जाता है। उनकी पूजा सर्पदंश से सुरक्षा, संतान प्राप्ति और समृद्धि के लिए की जाती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, मनसा पूजा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है, कि यह चांद सौदागर और उनकी पत्नी बेहुला की कहानी से जुड़ी है।
मनसा पूजा की कथा मनसा मंगल काव्य में वर्णित है, जो 13वीं से 18वीं शताब्दी के बीच लिखा गया था। इस कथा के अनुसार, देवी मनसा, भगवान शिव की मानस पुत्री हैं। नागों की देवी हैं। कहा जाता है की मां मनसा का जन्म कश्यप ऋषि के मस्तिष्क से हुआ था। मनसा देवी को हलाहल विष से भगवान शिव की रक्षा करने के लिए भी जाना जाता है।
ऐसा भी कहा जाता है कि एक बार
देवी ने क्रोधित होकर उसके सातों पुत्रों को मार डाला। चांद सौदागर की पत्नी, बेहुला, ने अपने पति को बचाने और देवी को प्रसन्न करने का फैसला किया। उसने एक नाव में अपने पति के शव को लेकर भागीरथी नदी में यात्रा की, और देवी मनसा की आराधना की। मनसा देवी, बेहुला की भक्ति से प्रसन्न हुईं और उसने चांद सौदागर के सातों पुत्रों को पुनर्जीवित कर दिया।
फोटो संकेत :- लोहरदगा के थाना टोली में मां मनसा की पूजा संपन्न करवाते पुरोहित सुभाष चंद्र चौबे पूजा में भाग लेतीं महिलाएं