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भारत ऋषि और कृषि प्रधान देश है : श्रीकांत

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भारत ऋषि और कृषि प्रधान देश है : श्रीकांत
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कथा का पंचम दिवस 

  • परम गुरु जी का श्री श्याम मंडल, मारवाड़ी ब्राह्मण सभा, श्री शिव मंडल, अग्रवाल युवा सभा, सुंदर कांड संस्था रांची के सदस्यों ने किया स्वागत और अभिनंदन  
  • गाये बचेंगी तो देश बचेगा : श्रीकांत शर्मा 

टीम एबीएन, रांची। रांची के अग्रसेन भवन के सभागार में श्री मदभागवत कथा के पंचम दिवस पर मुख्य यजमान श्री मति लता देवी केडिया, ओम प्रकाश केडिया, निरंजन, अजय, संजय केडिया संग परिवार ने श्री मदभागवत व ब्यास पूजन किया। वैदिक मंत्रोचारण के साथ ब्यास पीठ पर विराजमान परम श्रधेय कथा वाचक श्रीकांत जी शर्मा को मुख्य यजमान ओम प्रकाश केडिया सपत्नीक द्वारा चंदन, वंदन माल्यर्पण कर उनका अभिनंदन स्वागत किया गया। कथा के मुख्यसार को बताते हुए महाराज श्री कहते है ईश्वर रूपी धन जितना खर्च होगा उतना ही बढ़ेगा।

ईश्वर रुपी धन को जितना अधिक खर्च किया जाएगा, वह उतना ही बढेÞगा। सांसारिक धन खर्च करने पर काम होता है, लेकिन ईश्वर रूपी धन जितना खर्च होता है, उतना ही बढता जाता हैं। सांसारिक धन भी सद् कार्यों में इस्तेमाल किया जाय तो वह बढ़ता है। धन के साथ भक्ति होनी जरूरी हैं, क्योंकि भक्ति रहित धन विनाश की ओर ले  जाता है। कोई व्यक्ति जवान हो और उसके पास काफी धन हो, लेकिन उसे सत्सग नहीं मिले तो वह बिगड़ जायेगा, यह मानी हुई बात है। दुनिया के अन्य कामों में भी हो सकता है, लेकिन ईश्वर का नाम लेने पर लाभ होता है, इसलिए भगवान का नाम जपते रहना चाहिए। सही अर्थों में धनवान वही है, जो धन से समाज और राष्ट्र की सेवा करता है। 

परम पूज्य बाल व्यास श्रीकांत शर्मा जी श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस की कथा सुनाते हुए व्यास जी ने कहा कि गोधन को सबसे श्रेष्ठ कहा गया है। गाय जितना देती है उतना कोई भी नहीं दे सकता है। नंद बाबा के यहां नौ लाख गायें थी। जब उन्होंने पुत्र होने की खबर सुनी तो दो लाख गायें दान कर दी। भारत ऋषि और कृषि  प्रधान देश है। जब तक गाये  हैं तब तक भारत है। गाय नहीं रहेगी तो भारत भी नहीं रहेगा। गायों के खत्म होने पर यह देश भी खत्म हो जायेगा। किसान के अन्न और ऋषि के तप से ही खुशहाली आती है। 

भगवान को पाना हो या सही अर्थों में बड़ा आदमी बनना हो तो मन को बड़ा बनाएं। छोटे से तालाब  में पत्थर का टुकड़ा फेका जाता है तो हलचल मच जाती है, लेकिन वही पत्थर का टुकड़ा जब विशाल समुद्र मे फेंका  जाता है, तो उसमें ऐसा समा जाता है जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो। ईश्वर का आह्वान भी छोटे मन से नहीं हो सकता है। ईश्वर को मनाना है तो खुद को बड़े मन वाला बनायें। नंद बाबा महा मना है ।वे गो  की सेवा करते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि गो की सेवा करने वाला निरवंश नहीं रह सकता है। महाराज दिलीप ने नंदिनी गाय की सेवा की तो उन्हे रधु जैसा प्रतापी पुत्र हुआ। माताएं अपने बच्चों को विदेश भेजती है तो कहती है कि बेटे खाने-पीने का ध्यान रखना, यही वे भूल जाती है। 

विदेश जाने वाले पुत्र से कहना चाहिए बेटे अपने मन का ख्याल रखना। मन वश में रहेगा तो सब कुछ वश में रहेगा। मन को वश में रखने वाले व्यक्ति को किसी प्रकार की तकलीफ नहीं होती है। कृष्ण बाल लीला एवं छप्पन भोग की कथाओं में देवराज इंद्र की अहंकार को भगवान श्री कृष्ण ने तोड़कर समस्त ब्रिज वासियों को गिरिराज जी की महिमा को ऊपर रखते हुए कहा कि इनसे बड़ा हमारे लिए कलिकाल में गिरिराज सबसे बड़ा देवता है। मनुष्य को अपनी ओहदे का कभी गुमान नहीं करना चाहिए। 

श्रीमद् भागवत कथाओं के पंचम दिवस कि कथाओं पर प्रकाश देते हुए कहा कन्हैया के बालरूप सहित उनकी लीलाओ का वर्णन माखनचोरी की कथा को बताया। भजनो से पूरा कथा स्थल श्रीकृष्ण मय हुआ। आज गोवर्धन भगवान की पूजा की गयी।भगवान को छपन भोग लगाया गया। कथा स्थल में भगवान शंकर के स्वरूप की झांकी, कृष्ण के बाल रूप की झांकी, बलराम ओर ग्वालबाल की झांकी के स्वरूप का दर्शन किया। कथा स्थल आज पूरी तरह महिलाओं ओर बच्चों से भरा था। 

कथा श्रवण करने वालों में ओमप्रकाश केडिया, निरंजन केडिया, अजय केडिया, संजय केडिया, निर्मल बुधिया, प्रमोद सारस्वत, राजेश गोयल सहित काफी संख्या में लोगो ने कथा श्रबन किया। चंद्रप्रकाश बागला, धीरज बंका, राजेश सारस्वत, अशोक पुरोहित, दिनेश चौधरी, अमित अग्रवाल, राजेन्द्र प्रसाद, रौनक झुनझुनवाला, रेखा साहू सहित कई लोगों ने महाराज श्री को माल्यार्पन व अंग वस्त्र देकर अभिनंदन, स्वागत किया। 

7 बजे पंचम दिवस की कथा आरती के साथ विराम की गयी। लोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। प्रमोद सारस्वत ने बताया कि छठे  दिवस की कथा दोपहर 3 बजे से 7 बजे तक होगी। आप सपरिवार समय पर आकर श्रीमद् भागवत कथा के रस पान का आनंद अवश्य उठायें। उक्त जानकारी संगठन के प्रमोद सारस्वत (9431325438) ने दी।

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