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अद्भुत अलौकिक और अवर्णणीय है महाकुंभ का नजारा

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अद्भुत अलौकिक और अवर्णणीय है महाकुंभ का नजारा
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महाकुंभ से लौटकर मुरलीधर 

टीम एबीएन, रांची। अद्भुत अलौकिक, अवर्णणीय, अविस्मरणीय, आस्था का महाकुंभ 2025। ईश्वरीय आस्था और आमजनों की उसमें आस्था का प्रबल प्रवाह। सनातन के ब्रह्मामांडीय ज्ञान का प्रतिबिंब। प्रकृति के सम्मान का प्रबल उद्घोष महाकुंभ। मातृरूप में मां गंगा की गोद में समर्पित यमुना का नाम रूप का गंगा में अपने को विलीन करने का संकेत। संदेश सनातन के उच्च आदर्शों का, जिसमें सन्निहित मापदंडों को सहज बुद्धि और दुबुर्द्धि से समझना असंभव। 

जीव का शिव से संगम। प्रबल आर्त से सनातन का उद्घोष। विश्व नहीं ब्रह्मांड के कल्याण की अवधारणा। नाश और निर्माण का संगम महाकुंभ तीर्थराज प्रयाग 2025 का चिंतन, मनन और आशीर्वाद देने वाले सभी जनों को सनातन गौरव का अहसास पाने का महाकुंभ। तन से न पायें तो मन से अवश्य जायें। दरश, परस अंजन अरू पाना। जय महाकुंभ जय सत्य सनातन। मौनी अमावस्या की शुभकामना। 29 जनवरी 2025

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