टीम एबीएन, रांची। झारखंडी भाषा खतियान संस्कृति समिति रांची टीम द्वारा राजधानी रांची के बीचों बीच अल्बर्ट एक्का चौक में राजधानी टुसू महोत्सव का अयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रुप में पुलिस उपाधीक्षक रांची यातायत शामिल होकर सामूहिक नृत्य किए।
मौके पर देवेन्द्र नाथ महतो ने बताया कि टुसू महोत्सव का उद्घाटन पारम्परिक रीति रिवाज परंपरा के साथ अविवाहित कन्या द्वारा टुसू स्थापना करके किया गया, महोत्सव में पूरे झारखंड प्रदेश से आदिवासी मूलवासी शामिल हुए अल्बर्ट एक्का चौक में ढ़ोल नगाड़ा के साथ टुसू प्रेमी थिरके, 100 के आस पास छौटा बड़ा टुसू शामिल हुआ, मौके गुड़ पिठा वितरण किया गया।
मौके पर देवेंद्र नाथ महतो टुसू की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि टुसू बारह मासे तेरह परब के रुप में मनाया जाने वाला अंतिम परब जो किसान बड़ी धूम धाम से मनाते है, किसान का प्रमुख फसल धान है जो रोहिन मास में बुना जाता जो अंकुर होकर बड़ा होता है फिर पकता होता है, खेत से जब सब धान काटते हैं तो तीन चार बुदा धान को छोड़ते हैं फिर पारम्परिक तरीके से खलिहान लाया जाता, खलियान पहुंचने से पहले जो धानी होता है।
वही धानी खेत पहुंचते ही डीनीमनी होता है जिसे अघन सक्रांति के दिन डिनिमनी को अविवाहित कन्या द्वारा टुसू मनी का स्थापना किया जाता है, किसान टुसू मनी को बेटी के सदृश्य मानती है, इसीलिए बेटी का आगमन पर किसान खुशी मनाते हुए तरह तरह खाने का व्यंजन पाकवान बनाते हैं।
एक माह बाद मकर संक्रांति के दिन बेटी रूपी टूसुमनी का बहती जलाशय में विसर्जन किया जाता है, मान्यता के अनुसार चौड़ाल टुसू मनी का विसर्जन समय का पालकी यानी वाहन है, और ढ़ोल नगाड़ा गाजा बाजा बिदाई के समय का नाच गान है, इस प्रकार टुसू किसानों द्वारा मनाया जाने वाला प्रसिद्ध लोक संस्कृति परब है, इसलिए इसका संरक्षण हेतु सर्वसम्मिति से प्रतिवर्ष 11 जनवरी को मनाने का निर्णय लिया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से देवेंद्र नाथ महतो, फलींद्र करमाली, सुमित खतियानी, लखींद्र, मार्शल, सूरज, विराट, रविन्द्र, नकुल, राजू, गोविन्द महतो, राजेश बैठा, शिवराज, अंगत नायक, अजीत, सुभाष, नरेश, लक्की रामू, के अलावा अन्य सैकड़ों लोगों का अहम योगदान रहा।