वंदे मातरम् ...
त्रिवेणी दास
एबीएन एडिटोरियल डेस्क। भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लाल किला के प्राचीर तक पहुंचने और गाए जाने में अंग्रेजों से अपने देश के आजादी के बाद 80 वर्ष लग गए।
वंदे मातरम् गीत की रचना आज से 150 वर्ष पूर्व बंगाल के बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में किया और अपने प्रसिद्ध उपन्यास "आनंद मठ" में 1882 में सम्मिलित करते हुए उपन्यास का अंग बनाया।
गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर ने इस गीत को 1896 में तत्कालीन कांग्रेस के एक सभा में आजादी के प्रेरणा-गीत के स्वरूप में पहली बार गया, और तब से यह गीत आजादी के मतवालों, जेल जाने वालों और फांसी के फंदे पर झूलने वालों का नारा (Slogan) बन गया।
आपस में मिलने वाले भारतीयों का दुआ-सलाम का वाक्य बन गया। गुलामी के समय ब्रिटिश सरकार चाहती थी कि राष्ट्रगीत के रूप में गौड सेभ द क्वीन (god save the queen) गया जाए, लेकिन आजादी के दीवानों ने उसका प्रतिकार किया।
भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद को 11 दिसंबर 1946 को संविधान सभा का स्थाई अध्यक्ष चुना गया और 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की स्वीकृति के बाद डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने इस गीत को राष्ट्रगीत का दर्जा प्रदान किया; तब से यह गीत राष्ट्रगीत के रूप में भारत में गया जा रहा है।
भारत के फिल्मों में प्रसिद्ध संगीतकार एवं गायक ए. आर. रहमान ने एक संगीत "मां तुझे सलाम" तैयार किया और इसे अपने एल्बम वंदे मातरम् सम्मिलित करते हुए इस गीत को जन-जन तक पहुंचाया। 30 जुलाई 2026 को लोकसभा में बिल पास करके वंदे मातरम् गीत को आंशिक नहीं गाते हुए पूर्ण स्वरूप में गाने का संरक्षण एवं सम्मान प्रदान किया गया।
आज 15 अगस्त 2026 को संपूर्ण देश एवं दुनिया भर के लोगों ने देखा कि तिरंगा ध्वजारोहण के बाद वंदे मातरम् के धुन बजाए गए तत्काल बाद राष्ट्रगान जन गण मन के धुन बजाए गए। वायुसेना के हेलीकॉप्टर M_17 ने वंदे मातरम् का बैनर लेकर लाल किला के ऊपर उड़ान भरते हुए तिरंगा के ऊपर फूलों की बरसात की। वंदे मातरम् गीत गाते हुए जिन स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी कुर्बानी दी थी आज पूरे राष्ट्र ने उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि समर्पित किया है..
भारत माता की जय _!
वंदे मातरम् _!!
जय हिंद_!!!