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नासूर...

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त्रिवेणी दास 

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। नासूर वह जख्म है जो कभी ठीक नहीं होता है और उसकी दर्द-भरी टीश भारी तकलीफ देती रहती है। देश के बंटवारे का नासूर हम भारतीयों के लिए कभी नहीं खत्म होने वाला एक ऐसा मर्ज है जो लाइलाज है। भारत को लगभग 200 वर्षों तक अंग्रेजों ने गुलाम बनाए रखा। ब्रिटिश सरकार के अंतिम गवर्नर-जनरल माउंटबेटन ब्रिटिश सरकार के प्रतिनिधि के रूप में भारत में कार्यरत थे। 

3 जून 1947 को भारत के विभाजन की योजना माउंटबेटन योजना के रूप में घोषित की गई और जुलाई 1947 को इसे ब्रिटिश संसद में पेश करते हुए पारित किया गया और भारत का विभाजन सुनिश्चित हो गया।  14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान ने अपना स्वतंत्रता दिवस मनाया और दुनिया के नक्शे में एक नए राष्ट्र का उदय हो गया। भारत ने 15 अगस्त 1947 को अपने खंडित स्वरूप में अपना स्वतंत्रता दिवस मनाया। 

कश्मीर को लेकर भारत एवं पाकिस्तान के बीच 22 अक्टूबर 1947 को युद्ध शुरू हुआ और कश्मीर के भारत में विलय के बाद भी कश्मीर का एक भाग पाकिस्तान के कब्जे में चला गया जिसे आज भी पाक अधिकृत कश्मीर (ढडङ) कहा जाता है। 

देश के बंटवारा के बाद से आज तक पाकिस्तान भारत के साथ अनेक मुद्दों पर लड़ाई करते रहता है, कभी सीधा तो कभी छद्म अटैक भारत के ऊपर करते रहना उसकी आदत बन गयी है और यही वह नासूर है जो देशवासियों के लिए कभी नहीं ठीक होने वाला एक घाव बन गया है। बंटवारा के बाद पाकिस्तान से पलायन, खून खराबा और हत्या बलात्कार की एक अलग ही दर्द भरी दास्तान है जो नासूर को नीम चढ़ा बना देता है। 

कल 15 अगस्त 2026 को हम सभी देशवासी स्थापित परंपरा के अनुसार स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे और लाल किला के प्राचीर में प्रधानमंत्री तिरंगा का ध्वजारोहण करेंगे तथा राष्ट्र को संबोधित करेंगे। स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर हर वर्ष हम सभी एक नई उम्मीद, नई योजना के साथ राष्ट्र के सम्पूर्ण समृद्धि का संकल्प लेते हैं...। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं।)

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