बंगाल से आयी यह तस्वीर
कह गयी अनमोल कहानी
भारतीय संस्कृति की यह
सर्वोत्तम है बन गयी निशानी
त्रिवेणी दास
एबीएन एडिटोरियल डेस्क। मातृभूमि के सेवा के लिए जिस संगठन की नींव त्याग, तपस्या और राष्ट्र-साधना रूपी ईंट के उपर रखी गयी हो, उस संगठन का कार्यकर्ता अपना पूरा जीवन एक विचारधारा तथा राष्ट्रभक्ति की भावना को समर्पित कर देता है।
आज कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड मैदान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के गठन के शपथ ग्रहण समारोह में ऐसा ही एक भावभीनी गौरवपूर्ण परिदृश्य विशाल जनसमूह के सामने आया जिसने देशवासियों में गहरा एवं अमिट छाप छोड़ गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 98 वर्षीय वरिष्ठ कार्यकर्ता माखनलाल सरकार का चरण स्पर्श एवं शाल ओढ़ा कर उनका आशीर्वाद लिया। यह उस साधना, तपस्या, संघर्ष और समर्पण का चरण स्पर्श था जिसने दशकों पहले जनसंघ और राष्ट्रवादी विचारधारा की मजबूत नींव रखी थी।
माखनलाल सरकार वही राष्ट्र-साधक हैं, जिन्होंने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया, जेल और उनके साथ कश्मीर की यात्रा की उनके मृत शरीर को लेकर वापस लौटे और राष्ट्र सेवा में अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया।
राजनीति में किसी भी व्यक्ति का पद एवं सत्ता की शक्ति की आयु एक अवधि के बाद समाप्त हो जाती है, परंतु उसके द्वारा स्थापित आदर्श, संस्कृति, चरित्र और विचारधारा चिरस्थाई हो जाते हैं। (लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं।)