एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों और होर्मुज की खाड़ी के फिर से खुलने की संभावना के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आयी है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को थोड़ी राहत मिली है।
इस सप्ताह ब्रेंट क्रूड की कीमत में 11% की गिरावट दर्ज की गयी, जो पिछले सात हफ्तों में सबसे अधिक है। शुक्रवार को जुलाई डिलीवरी का ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 1.66 डॉलर यानी 1.8 फीसदी गिरावट के साथ 92.05 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
डब्ल्यूटीआई भी 1.7 फीसदी गिरावट के साथ $87.36 प्रति बैरल रह गया। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल होर्मुज की खाड़ी से गुजरता है, इसलिए वहां तनाव कम होना बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है।
भारत अपनी तेल जरूरतों का 90% आयात करता है, इसलिए कीमतों में यह कमी देश के लिए बड़ी राहत है। हालांकि, सरकारी तेल कंपनियों को अभी भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है; उदाहरण के लिए, उन्हें हर गैस सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का नुकसान हो रहा है।
मोर्गन स्टेनली ने चेतावनी दी है कि यदि जून में होर्मुज स्ट्रेट बंद रहता है, तो तेल की कीमतें एक बार फिर उबाल मार सकती हैं। सऊदी अरामको के सीईओ के अनुसार, वैश्विक तेल बाजार में यह उथल-पुथल 2027 के अंत तक बनी रह सकती है।
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