टीम एबीएन, रांची। झारखण्ड के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब झारखंड के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिभाशाली बच्चों को ब्रिटिश हाई कमीशन से शेवनिंग मरङ गोमके जयपाल सिंह मुंडा छात्रवृत्ति प्रदान की जायेगी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रयास से ब्रिटिश उच्चायोग द्वारा अधिकतम पांच छात्र, छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान करने के लिए मरङ गोमके जयपाल सिंह मुण्डा छात्रवृत्ति योजना के साथ साझेदारी करते हुए शेवनिंग मरङ गोमके जयपाल सिंह मुंडा छात्रवृत्ति योजना शुरू की गई है। यह वैश्विक छात्रवृत्ति योजना अपने आप में अनूठी है। अब यहां के पिछड़े समाज के प्रतिभाशाली बच्चों को वैश्विक छात्रवृत्ति मिलेगी। इस संबंध में राज्य सरकार विदेश राष्ट्रमंडल विकास कार्यालय (एफसीडीओ), ब्रिटिश उच्चायोग, नई दिल्ली के साथ 23 अगस्त को एमओयू करेगी।
अभी तक झारखण्ड सरकार मरङ गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना के जरिए यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एण्ड नॉर्दन आयरलैण्ड के चयनित संस्थानों, विश्वविद्यालयों के चयनित पाठ्यक्रम में अध्ययन के लिए अनुसूचित जनजाति के छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान कर रही थी। अब अन्य वर्गों यथा अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं को इससे लाभान्वित किया जायेगा। इस एमओयू के तहत प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष के लिए शेवनिंग मरङ गोमके जयपाल सिंह मुंडा छात्रवृत्ति योजना हेतु अधिकतम 5 (पांच) छात्र/छात्राओं का चयन किया जायेगा। चयनित पांच छात्र/छात्राओं का सम्पूर्ण ट्यूशन फीस झारखण्ड सरकार वहन करेगी। वहीं शेष लागतों का वहन विदेश राष्ट्रमंडल विकास कार्यालय और ब्रिटिश उच्चायोग (एफसीडीओ) करेगा। एमओयू के तहत सभी भुगतान भारत सरकार के द्वारा अनुमोदित दिशा निर्देश के आलोक में होगा।