वट सावित्री व्रत 16 मई को, अखंड सौभाग्य, समर्पण और नारी शक्ति का पावन पर्व

 

यह पर्व त्याग, आत्मविश्वास प्रेम और कर्तव्य निष्ठा का देता है संदेश : संजय सर्राफ 

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के अटूट प्रेम, समर्पण एवं अखंड सौभाग्य का प्रतीक माने जाने वाला वट सावित्री व्रत इस वर्ष 16 मई दिन शनिवार को श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा। 

यह पर्व मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना हेतु रखा जाता है। भारतीय सनातन परंपरा में यह व्रत नारी के त्याग, तप, निष्ठा और अटूट विश्वास का अद्भुत उदाहरण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व वट वृक्ष एवं सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है।

कहा जाता है कि पतिव्रता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प, तपस्या और बुद्धिमत्ता से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त कर लिये थे। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख का प्रतीक बन गया। इस दिन महिलाएं प्रात: स्नान कर नये वस्त्र धारण करती हैं तथा वट वृक्ष की पूजा-अर्चना करती हैं। वट वृक्ष के तने में कच्चा सूत या धागा लपेटकर परिक्रमा की जाती है और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी जाती है। 

व्रती महिलाएं निर्जला अथवा फलाहार व्रत रखकर अपने परिवार की सुख-शांति एवं पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। वट वृक्ष को भारतीय संस्कृति में अत्यंत पवित्र एवं जीवनदायी माना गया है। इसकी विशालता, दीर्घायु और सदैव हरा-भरा रहने का गुण जीवन में स्थिरता, समृद्धि और निरंतरता का संदेश देता है। धार्मिक दृष्टि से वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना गया है। 

यही कारण है कि इसकी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। वट सावित्री व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं, बल्कि भारतीय पारिवारिक मूल्यों, दांपत्य जीवन की मयार्दा और नारी शक्ति के सम्मान का भी प्रतीक है। यह पर्व महिलाओं को धैर्य, त्याग, आत्मविश्वास और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता है। साथ ही परिवार में प्रेम, विश्वास और आपसी सामंजस्य को मजबूत करने का संदेश भी देता है। 

वर्तमान समय में जब पारिवारिक संबंधों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं, ऐसे में वट सावित्री जैसे पर्व भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़े रहने और पारिवारिक मूल्यों को सहेजने की प्रेरणा देते हैं। यह पर्व समाज को यह संदेश देता है कि सच्चा प्रेम, समर्पण और विश्वास किसी भी कठिनाई को पराजित कर सकता है। 

आस्था, संस्कृति और पारिवारिक एकता का प्रतीक वट सावित्री व्रत भारतीय सनातन परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जो आज भी समाज में नारी सम्मान, दांपत्य प्रेम और संस्कारों की ज्योति को प्रज्वलित किए हुए है।

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