टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 9 मई को रांची जीपीओ में के डी राय व्यथित की अध्यक्षता में आॅल इंडिया पोस्टल/ आर एम एस पेंशनर्स एसोसिएशन झारखंड की बैठक आयोजित की गई जिसमें 3 दर्जन से अधिक पोस्टल/ आर एम एस पेंशनर्स के अलावा सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के शिव सेवक पाठक, देवेंद्र प्रसाद एवं एन पांडेय भी उपस्थित थे। बैठक में राष्ट्रीय आह्वान पर पेंशन अधिनियम में कथित संशोधन को लेकर एकजुट होकर संघर्ष किए जाने की बात कही गयी तथा अन्य पेंशनर्स एवं पेंशनर्स संगठनों को जागरूक किए जाने पर सहमति बनी। पेंशनर्स एसोसिएशन के 17 संगठनों ने इस ड्राकोनियन संशोधन के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में पिछले नवंबर में याचिका दायर की है जो अब तक हियरिंग स्टेज में है। ये संशोधन संविधान के अनुक्षेद 14 के विरुद्ध है जो समानता के अधिकार का हनन करता है। सी जी एच एस में फ्री हसल ट्रीटमेंट को लेकर भी चिंता व्यक्त की गयी तथा कहा गया कि लाभार्थियों विशेषकर पेंशनर्स को इलाज में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। दवा समय पर उपलब्ध नहीं करायी जाती है। इनडेंट की गयी दवा एक हफ्ते से पहले नहीं मिलती है, इसे तीन दोनों के अंदर मिलना चाहिए। लाइफ सेविंग दवा की उपलब्धता में भी काफी विलंब किया जाता है। 3 सालों से लोकल/ जोनल एडवाइजरी कमेटी की मीटिंग आयोजित नहीं की गई है जिसे प्रत्येक माह के दूसरे एवं तीसरे शनिवार को स्वास्थ मंत्रालय के प्रावधानों के अनुसार कराया जाना है। इसको लेकर एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल मार्च में अतिरिक्त निदेशक से मिलकर ज्ञापन भी सौंपा था और उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया था कि अप्रैल में इसे कर दिया जायेगा। बैठक में निर्णय लिया गया कि पूरे झारखंड में क्रमबद्ध तरीके से सदस्यता अभियान चलाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक पेंशनर्स को जागरूक किया जा सके। मई के अंतिम सप्ताह में आर्थराइटिस के मरीजों के लिए दिल्ली की एक कंसल्टेंट एजेंसी के सहयोग से पेंशनर्स एसोसिएशन के द्वारा मुफ्त मेडिकल कैम्प आयोजित किया जायेगा। चौथे राष्ट्रीय सम्मेलन में एम जेड खान को राष्ट्रीय संयुक्त सचिव चुने जाने पर उपस्थित सदस्यों बधाई देते हुए कहा कि ये झारखंड के लिए एक उपलब्धि से कम नहीं। आज की बैठक को एम जेड खान, राज्य सचिव, साधन कुमार सिंहा, बिपिन चौधरी, रंगनाथ पांडेय, शमीम अख्तर,के डी राय व्यथित, रामचंद्र प्रसाद, आर के वर्मा, जी डी साहू, शिव सेवक पाठक आदि ने संबोधित किया। मौके पर हसीना तिग्गा, अमिता कुजूर, इसहाक मिंज,मो रफी, नूर मोहम्मद, धनेश्वर गोस्वामी, त्रिलोकी नाथ साहू, धनेश्वर महतो, मन रखन महतो, भवन बारला, इसाक मिंज, डी जे मिंज, एस पी सिंह,रामचंद्र प्रसाद, शेख हबीब, सुशीला कुजूर, सरोज कुमार केसरी आर के मिंज आदि उपस्थित थे। उक्त जानकारी आॅल इंडिया पोस्टल/आर एम एस पेंशनर्स एसोसिएशन, रांची के राज्य सचिव एम जेड खान ने दी।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पाकुड़। जिले में एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देनेवाली भयावह घटना सामने आयी है। सदर प्रखंड के लखीनारायणपुर गांव में शुक्रवार रात सियारों के झुंड ने एक घर में घुसकर ढाई माह की मासूम बच्ची को उठा लिया और उसे नोचकर खा गये। वहीं दूसरी चार वर्षीय बच्ची पर भी हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। थाना प्रभारी ने बताया कि शुक्रवार देर रात सियारों का झुंड समीरुल शेख के घर घुसा। उस समय परिवार के सदस्य सो रहे थे। सियार ढाई माह की बच्ची आफीफा को मां जासमीन के पास से उठाकर ले गये। बाद में बच्ची के शरीर के कुछ अवशेष ही बरामद हो सके। पुलिस ने अवशेषों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है। सियारों ने घर में मौजूद चार वर्षीय जासमीन खातून पर भी हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गयी। बच्ची का अस्पताल में इलाज चल रहा है। मासूम आफीफा खातून के शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है। चीख सुनकर पहुंचे ग्रामीणजासमीन की चीख सुन परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। लोगों को आता देख सियारों का झुंड वहां से भाग निकला। गौरव कुमार ने बताया कि घटना की जानकारी वन विभाग और वरीय अधिकारियों को दे दी गयी है। वन विभाग की टीम इलाके में सियारों की गतिविधियों पर नजर रख रही है। घटना के बाद गांव में भय और मातम का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियों पर नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। क्या कहते हैं ग्रामीण स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल के दिनों में गांव के आसपास सियारों की संख्या बढ़ी है, जिससे लोगों में लगातार डर बना हुआ है। इस घटना के बाद पूरे गांव में दहशत और मातम का माहौल है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के निकट एक कब्रिस्तान के पास लगभग 300 से 400 सियार रहता है और रात्रि में यही सब गांव में घूमते रहते हैं। कुछ माह पूर्व एक बकरी को भी सियार ने अपना शिकार बना लिया था।
आजसू ने राज्य के सभी विश्विद्यालयों एवं अंगीभूत महाविद्यालयों एवं प्रस्तावित रिस्ट्रक्टिंग एंड क्लसटरिंग सिस्टम संबंधी संकल्प को तत्काल निरस्त करने हेतु राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को विरोध-पत्र सौंपा टीम एबीएन, रांची। आजसू ने ज्ञापन के माध्यम से राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को कहा कि झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा जारी संकल्प पत्रांक- 05/प0-13/2023 - 902, संकल्प पत्रांक-05/प0-06/2023 - 893 एवं अन्य संकल्प पत्रों के माध्यम से रांची विश्वविद्यालय, इसके अंतर्गत संचालित अंगीभूत महाविद्यालयों एवं झारखंड के अन्य विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों के रिस्ट्रक्टिंग एंड क्लसटरिंग सिस्टम को लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। यह प्रस्ताव राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था, विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा झारखंड की भाषाई एवं सांस्कृतिक अस्मिता के लिए अत्यंत चिंताजनक, अव्यावहारिक एवं जनविरोधी प्रतीत होता है। अत: आजसू इस संपूर्ण व्यवस्था का पुरजोर विरोध करते हुए माननीय राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री महोदय से इसे तत्काल निरस्त करने की मांग करती हैं। झारखंड सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से अभी भी विकासशील राज्यों की श्रेणी में आता है। राज्य के अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण, आदिवासी, दलित, पिछड़े एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। ऐसे विद्यार्थी सीमित संसाधनों के बीच अपने निकटवर्ती महाविद्यालयों में अध्ययन कर पाते हैं। वर्तमान व्यवस्था में एक ही महाविद्यालय में कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय उपलब्ध रहने से विद्यार्थियों को विषय चयन की स्वतंत्रता, सहज पहुंच तथा संतुलित शैक्षणिक वातावरण प्राप्त होता है। किंतु प्रस्तावित क्लसटरिंग सिस्टम अंतर्गत किसी महाविद्यालय को केवल विज्ञान, किसी को केवल कला तथा किसी को केवल वाणिज्य अथवा अन्य विशिष्ट विषयों तक सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है। यह व्यवस्था पूर्णत: अव्यावहारिक, छात्र-विरोधी एवं शिक्षा-विरोधी है। यदि विद्यार्थियों को अलग-अलग संकायों के लिए विभिन्न महाविद्यालयों में जाना पड़ेगा, तो राज्य की संपूर्ण उच्च शिक्षा व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित होगी। गरीब एवं ग्रामीण विद्यार्थियों पर प्रतिकूल प्रभाव : इस व्यवस्था के कारण गरीब एवं ग्रामीण विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्हें परिवहन, आवास एवं अन्य खर्च वहन करने पड़ेंगे, जो अधिकांश परिवारों के लिए संभव नहीं है। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा छोड़ने को विवश होंगे। झारखंड पहले से ही उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय औसत से पीछे है। ऐसी स्थिति में यह व्यवस्था विद्यार्थियों को शिक्षा से और दूर कर देगी। छात्राओं की शिक्षा पर गंभीर असर : ग्रामीण एवं पारंपरिक परिवारों की अनेक छात्राएं केवल निकटवर्ती महाविद्यालयों में ही अध्ययन कर पाती हैं। यदि विषयों के अनुसार उन्हें दूरस्थ महाविद्यालयों में जाना पड़े, तो उनकी शिक्षा बाधित होगी तथा महिला शिक्षा को गंभीर क्षति पहुंचेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मूल भावना के विपरीत : राष्ट्रीय शिक्षा नीति बहुविषयी शिक्षा की अवधारणा को बढ़ावा देती है, जहां विद्यार्थी विभिन्न विषयों का अध्ययन कर सकें। परंतु प्रस्तावित क्लसटरिंग सिस्टम महाविद्यालयों को संकीर्ण विषय-केंद्रित संस्थानों में बदलने का प्रयास कर रहा है। वास्तविक बहुविषयी शिक्षा तभी संभव है जब एक ही महाविद्यालय में कला, विज्ञान एवं वाणिज्य सभी संकाय उपलब्ध हों। महाविद्यालयों की ऐतिहासिक पहचान समाप्त होने का खतरा : वर्षों से स्थापित महाविद्यालय अपनी समग्र शैक्षणिक संरचना एवं बहुविषयी स्वरूप के कारण प्रसिद्ध हैं। यदि उनमें से विभिन्न संकाय समाप्त या स्थानांतरित कर दिये गये, तो उनकी ऐतिहासिक पहचान, शैक्षणिक गरिमा एवं सामाजिक महत्व प्रभावित होगा। शिक्षकों एवं कर्मचारियों के पदों पर संकट : इस संकल्प में अनेक शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों को सरेंडर करने तथा पुनर्गठन के नाम पर समाप्त करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में पहले से ही शिक्षकों एवं कर्मचारियों की भारी कमी है। पदों की कटौती से शिक्षा की गुणवत्ता, शोध कार्य, परीक्षा व्यवस्था, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं एवं प्रशासनिक कार्य गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं पर सीधा खतरा : झारखंड अपनी समृद्ध जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं, संस्कृति, परंपराओं एवं लोकजीवन के कारण पूरे देश में विशिष्ट पहचान रखता है। यहां की भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि आदिवासी एवं मूलवासी समाज की ऐतिहासिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत एवं सामाजिक अस्मिता की आधारशिला हैं। वर्तमान में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में संताली, हो, खड़िया, कुड़ुख, मुंडारी, नागपुरी, पंचपरगनिया, खोरठा एवं कुड़माली जैसी भाषाओं का अध्ययन-अध्यापन होने के कारण नयी पीढ़ी अपनी भाषा, संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़ी हुई है। किंतु प्रस्तावित क्लसटरिंग सिस्टम के अंतर्गत इन विभागों को सीमित अथवा स्थानांतरित किए जाने से जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के विभाग स्वत: कमजोर हो जायेंगे। अधिकांश विद्यार्थी दूरस्थ महाविद्यालयों में जाकर इन भाषाओं का अध्ययन नहीं कर पायेंगे, जिससे नामांकन घटेगा, विभाग निष्क्रिय होंगे तथा धीरे-धीरे ये भाषाएं उच्च शिक्षा व्यवस्था से समाप्त होने लगेंगी। यह केवल शैक्षणिक क्षति नहीं होगी, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक पहचान एवं भाषाई विरासत पर भी गंभीर आघात होगा। झारखंड को शिक्षा के क्षेत्र में और पीछे धकेलने वाला निर्णय : झारखंड जैसे राज्य में आवश्यकता उच्च शिक्षा संस्थानों को मजबूत करने की है, न कि उन्हें विभाजित एवं कमजोर करने की। महाविद्यालयों को तोड़ने के बजाय उनमें शिक्षकों की नियुक्ति, आधारभूत संरचना, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं, डिजिटल सुविधाएं एवं शोध व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाना चाहिए। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो झारखंड उच्च शिक्षा, भाषा एवं संस्कृति तीनों क्षेत्रों में और अधिक पिछड़ जायेगा। राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री से विनम्र प्रार्थना है कि रिस्ट्रक्टिंग एंड क्लसटरिंग सिस्टम संबंधी उक्त संकल्प को तत्काल निरस्त किया जाये। प्रत्येक महाविद्यालय में पूर्ववत कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकायों को यथावत रखा जाये। जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के विभागों एवं अध्ययन-अध्यापन की वर्तमान व्यवस्था को सुरक्षित रखा जाये। शिक्षकों एवं कर्मचारियों के पदों में कटौती बंद कर नियमित नियुक्तियां की जायें। किसी भी नयी व्यवस्था को लागू करने से पूर्व विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं शिक्षाविदों से व्यापक विमर्श किया जाये। हमें पूर्ण विश्वास है कि राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं राज्य के शैक्षणिक तथा सांस्कृतिक भविष्य के हित में संवेदनशील निर्णय लेते हुए इस जनविरोधी संकल्प को तत्काल निरस्त करने की कृपा करेंगे। ज्ञापन सौंपने में प्रदेश सचिव सक्षम झा, प्रदेश सचिव राजेश सिंह, महानगर अध्यक्ष अमन साहू, निशांत लिंडा, मोहन कुमार, संदीप सिंह इत्यादि उपस्थित थे। उक्त जानकारी अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश सचिव सक्षम झा और राजेश सिंह ने दी।
लोहरदगा में एसपी आवास के पास डिवाइडर पर चढ़ी कार, 1 की मौत, 4 घायल एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। जिले में शनिवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गयी जबकि चार अन्य घायल हो गये। हादसा लोहरदगा एसपी कोठी के समीप उस समय हुआ जब रघुटोली की ओर से शहर की तरफ आ रही एक सफारी कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगे बैरिकेडिंग से टकराते हुए डिवाइडर पर चढ़ गयी। दुर्घटनाग्रस्त कार का नंबर बिहार के मुजफ्फरपुर जिले का है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वाहन की रफ्तार काफी तेज थी। अचानक चालक नियंत्रण खो बैठा जिसके बाद कार जोरदार टक्कर के साथ दुर्घटनाग्रस्त हो गयी। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गयी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गयी, जबकि चार अन्य घायलों का इलाज जारी है। दुर्घटना के कारण कुछ देर तक सड़क पर यातायात प्रभावित रहा। बाद में क्रेन की मदद से दुर्घटनाग्रस्त वाहन को सड़क से हटाया गया जिसके बाद आवागमन सामान्य हो सका। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
रांची में नकली विदेशी शराब के खिलाफ बड़ी कार्यवाही, 1000 पेटी अवैध शराब बरामद टीम एबीएन, रांची। रांची में अवैध नकली विदेशी शराब के कारोबार के खिलाफ उत्पाद विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 1000 पेटी अवैध विदेशी शराब बरामद की है। इस कार्रवाई से अवैध शराब कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। यह कार्यवाही रांची के सहायक उत्पाद आयुक्त उमाशंकर सिंहके निर्देश पर की गयी। इस दौरान एक आरोपी राहुल नायक को गिरफ्तार किया गया है। उत्पाद विभाग की टीम ने नगड़ी, रातु और धुर्वा थाना क्षेत्र में एक साथ दबिश देकर कार्यवाही को अंजाम दिया। छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नकली विदेशी शराब बरामद की गयी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार बरामद शराब को दूसरे जिले से रांची लाकर शहर के विभिन्न इलाकों में खपाने की तैयारी की जा रही थी। कार्यवाही के दौरान विभाग ने एक कार और दो पिकअप वैन समेत कुल तीन वाहनों को भी जब्त किया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। उत्पाद विभाग ने संकेत दिया है कि राजधानी और आसपास के इलाकों में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ आगे भी लगातार अभियान चलाया जायेगा।
टीम एबीएन, रांची। आॅपरेशन सिंदूर स्मृति दिवस के अवसर पर एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल, पुंदाग के एनसीसी तथा स्काउट एंड गाइड के विद्यार्थियों की ओर से देश के वीर सशस्त्र बलों को नमन किया गया। मौके पर उन सभी सैनिकों, अधिकारियों और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी, जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान के लिए अपना जीवन समर्पित किया। आॅपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के विरुद्ध भारत की सटीक, संयमित और निर्णायक कार्रवाई के रूप में याद किया गया है। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ तापस घोष ने देशभक्ति प्रदर्शित करते हुए तिरंगा झंडा फहराया तथा सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह दिन केवल एक सैन्य उपलब्धि का स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकता, संकल्प और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का प्रतीक भी है।आॅपरेशन सिंदूर ने यह संदेश दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने में सक्षम है। आॅपरेशन सिंदूर आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस, संयम और राष्ट्र-रक्षा के अद्वितीय उदाहरण के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।
राम अवतार कंपनी की ओबी डंपिंग से भारी मात्रा में उड़ रही धूल, लोयाबाद के लोग हो रहे बीमार के शिकार एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ जिलाध्यक्ष रत्नेश कुमार ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखते हुए कहा कि सिजुआ क्षेत्र संख्या-05 अंतर्गत कनकनी कोलियरी में संचालित राम अवतार आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा लोयाबाद के घनी आबादी वाले क्षेत्र में अवैध ढंग से ओबी डंप किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में भारी प्रदूषण फैल रहा है तथा स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। जहां ओबी डंप किया जा रहा है उसके समीप नदी, ईदगाह, हाई स्कूल एवं सार्वजनिक मैदान स्थित है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग मॉर्निंग वॉक एवं अन्य गतिविधियों के लिए आते-जाते हैं। कंपनी द्वारा लगातार ओबी गिराने से पूरे क्षेत्र में धूल एवं प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है, जिससे आमजन परेशान हैं। इसके अतिरिक्त जिस स्थान पर ओबी डंपिंग की जा रही है, वहां लगभग पूर्व बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया गया था और वे पेड़ काफी बड़े हो चुके थे, किंतु कंपनी ने अवैध डंपिंग कर उन पेड़-पौधों को नष्ट कर दिया, जिससे पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंची है। राम अवतार आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा लोयाबाद 05 नंबर में मुख्य सड़क पार कर ओबी डंपिंग की जा रही है। लगातार भारी वाहनों के आवागमन से सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है तथा बड़े-बड़े गड्ढे बन गये हैं, जिससे कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। साथ ही कंपनी द्वारा डीजीएमएस नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। कंपनी द्वारा जबरन हाई डंपिंग की जा रही है, जिससे पूर्व में डंपिंग स्थल के आसपास जमीनों में दरारें भी आ चुकी हैं और भविष्य में भू-धसान जैसी गंभीर घटना घट सकती है। कंपनी मजदूरों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ कर रही है। मजदूरों को न तो आवश्यक सेफ्टी किट उपलब्ध कराया जा रहा है, न ही बीटीसी परीक्षण कराया जा रहा है तथा न ही उन्हें पहचान पत्र (आई-कार्ड) ओर नहीं हाई कमेटी द्वारा निर्धारित वेतन दिया जा रहा है। अत: आप से आग्रह है कि उक्त मामले की उच्चस्तरीय जांच कराते हुए अवैध ओबी डंपिंग पर तत्काल रोक लगाने एवं कंपनी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की कृपा करें, ताकि क्षेत्रवासियों को प्रदूषण, दुर्घटना एवं संभावित भू-धसान जैसी घटनाओं से बचाया जा सके।
बोकारो हवाई अड्डा के पास अतिक्रमण हटाने गयी बीएसएल सिक्योरिटी टीम पर पथराव, हमले में दो होमगार्ड जवान घायल एबीएन न्यूज नेटवर्क, बोकारो। स्टील सिटी बोकारो में अतिक्रमण हटाने गयी बीएसएल सिक्योरिटी टीम पर अतिक्रमणकारियों ने पथराव कर दिया। घटना शनिवार की सुबह की है। पथराव की इस घटना में दो होमगार्ड के जवान घायल हो गये हैं। दोनों घायलों का इलाज बोकारो जनरल अस्पताल में चल रहा है। मिली जानकारी के अनुसार बोकारो के सेक्टर 12 थाना क्षेत्र के सेक्टर 12 ए काली मंदिर के पास खाली जमीन पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है और झोपड़ीनुमा घर बनाकर रह रहे हैं। जानकारी मिलने के बाद बीएसएल की सिक्योरिटी टीम तीन गाड़ियों पर सवार होकर शनिवार को अतिक्रमण हटाने गयी थी। इससे आक्रोशित अतिक्रमणकारियों ने बोकारो स्टील के सिक्योरिटी विभाग के पदाधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों पर पत्थर से हमला कर दिया। जिसके बाद बीएसएल की टीम जान बचाकर भाग खड़ी हुई। इस हमले में दो होमगार्ड के जवान अकरम अंसारी और बबलू कुमार गंभीर रूप से घायल हो गये। इस घटना में घायल दोनों होमगार्ड के जवानों को बोकारो जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां इनका इलाज चल रहा है। दरअसल, बोकारो जिला प्रशासन ने बोकारो एयरपोर्ट बाउंड्रीवॉल से सटे अतिक्रमण को हटाने का निर्देश दिया था। जहां से सभी को हटाने का काम किया गया था। हटाये गये लोग सेक्टर 12 ए में अतिक्रमण कर झोपड़ीनुमा घर बना लिया है। जिसे हटाने के लिए BSL की सिक्योरिटी विभाग की टीम गयी थी।इस संबंध में सेक्टर 12 थाना प्रभारी सूरज कुमार ने कहा कि बोकारो में हवाई सेवा शुरू करने को लेकर बीते कई दिनों से अतिक्रमण को लेकर अभियान चलाया जा रहा था। इसी क्रम में आज शनिवार को अचानक भीड़ उग्र हो गयी और पथराव करना शुरू कर दिया। जिसके कारण होमगार्ड के दो जवान घायल हो गये हैं। घायल जवानों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं घटना में शामिल लोगों को चिह्नित कर उन पर नियम संगत कार्रवाई की जायेगी।
झारखंड कांग्रेस के अंदर कलह, मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ खोला मोर्चाटीम एबीएन, रांची। झारखंड कांग्रेस के अंदर कलह अब खुलकर सामने आने लगा है। मामला अब कार्रवाई तक पहुंचता दिख रहा है। दरअसल, सूबे के वित्त मंत्री सह कांग्रेस नेता राधाकृष्ण किशोर ने खुलकर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी है। यूं कहें तो उन्होंने बगावती सुर अपना लिया है। इसके बाद पार्टी अब उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। पार्टी सूत्रों की मानें तो राधाकृष्ण किशोर को मंत्री पद से हटाने के साथ-साथ उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी तैयारी चल रही है।बताया जा रहा है कि राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इससे पार्टी के अंदर असहज स्थिति बन गई है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में राधाकृष्ण किशोर पर कार्रवाई को लेकर लगातार मंथन चल रहा है और कभी भी उनके खिलाफ बड़ा फैसला लिया जा सकता है।संगठन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवालवैसे झारखंड कांग्रेस में असंतोष कोई नया मुद्दा नहीं है। लंबे समय से संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं। पार्टी प्रभारी के. राजू को लिखे गए संदेशों में भी नाराजगी साफ झलकती है। राधाकृष्ण किशोर ने आरोप लगाया है कि संगठन के अंदर भेदभाव की स्थिति है।योगेंद्र साव और रामा खलखो का दिया उदाहरणउन्होंने उदाहरण के तौर पर पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और रामा खलखो का मामला उठाया। मंत्री का कहना है कि योगेंद्र साव को पार्टी से तीन साल के लिए निष्कासित कर दिया गया, वहीं रामा खलखो को सार्वजनिक आलोचना के बावजूद चुनाव समिति में शामिल किया गया। इससे कार्यकर्ताओं के बीच नाराजगी बढ़ गई है।जंबो समिति पर भी उठाए सवालइतना ही नहीं, 81 विधानसभा सीटों के लिए संगठन में बनाई गई जंबो समिति पर भी सवाल खड़ा किया गया है। राधाकृष्ण किशोर का कहना है कि इतनी बड़ी समिति प्रभावी नहीं हो सकती और संगठन को मजबूत करने के लिए ठोस फैसलों की जरूरत है।सियासी हलकों में बढ़ी हलचलइन सब बातों के बीच अब यह साफ हो गया है कि राधाकृष्ण किशोर ने खुलकर प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अब देखना होगा कि प्रदेश नेतृत्व उनके खिलाफ क्या फैसला लेता है और क्या कार्रवाई करता है। फिलहाल पूरे मामले पर सत्तापक्ष के साथ-साथ विपक्ष की भी नजरें टिकी हुई हैं।
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