वीर सावरकर राष्ट्रभक्ति,साहित्य और स्वाभिमान के महान प्रतीक : संजय सर्राफ टीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक, ओजस्वी साहित्यकार एवं कवि विनायक दामोदर सावरकर की जयंती प्रतिवर्ष 28 मई को मनायी जाती है। उनका जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के भगूर गांव में हुआ था। वीर सावरकर केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि उच्च कोटि के लेखक, इतिहासकार, कवि, समाज सुधारक और दूरदर्शी विचारक भी थे। उनकी जयंती राष्ट्रप्रेम, त्याग, साहस और स्वाभिमान की प्रेरणा देने वाला दिवस माना जाता है।वीर सावरकर ने कम उम्र में ही देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष का मार्ग चुन लिया था। उन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध युवाओं में क्रांतिकारी चेतना जागृत करने के लिए अभिनव भारत संगठन की स्थापना की। बाद में वे इंग्लैंड गए, जहां उन्होंने भारत की आजादी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज बुलंद की। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक-1857 का स्वातंत्र्य समर ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नयी दिशा दी। अंग्रेज सरकार ने इस पुस्तक को प्रतिबंधित कर दिया था, क्योंकि इसमें 1857 की क्रांति को भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम बताया गया था।वीर सावरकर का जीवन संघर्षों से भरा रहा। उन्हें अंग्रेजों ने दो-दो आजीवन कारावास की कठोर सजा देकर अंडमान निकोबार की सेल्युलर जेल भेज दिया था। वहां उन्होंने अमानवीय यातनाएं सहते हुए भी अपने राष्ट्रभक्ति के संकल्प को कभी कमजोर नहीं होने दिया। जेल में रहते हुए उन्होंने अनेक कविताएं और लेख लिखे, जिन्हें साथी कैदी याद करके बाहर तक पहुंचाते थे। उनकी लेखनी में राष्ट्रप्रेम, आत्मबल और सामाजिक जागरण की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। वीर सावरकर जयंती मनाने का उद्देश्य नयी पीढ़ी को देशभक्ति, साहस, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का संदेश देना है। उन्होंने जाति-पांति और छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों का विरोध किया तथा हिंदू समाज में एकता पर बल दिया। वे शिक्षा, संगठन और आत्मनिर्भरता को राष्ट्र निर्माण का आधार मानते थे। उनके विचार आज भी युवाओं को राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।इस जयंती का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि वीर सावरकर ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को वैचारिक और क्रांतिकारी दोनों स्तरों पर मजबूती प्रदान की। वे ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने अपनी लेखनी को राष्ट्र सेवा का माध्यम बनाया। उनकी कविताएं और लेख आज भी देशभक्ति की भावना को प्रज्ज्वलित करते हैं।आज आवश्यकता है कि वीर सावरकर के जीवन, संघर्ष, साहित्य और राष्ट्रवादी विचारों से प्रेरणा लेकर समाज में राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक सद्भाव और आत्मगौरव की भावना को मजबूत किया जाये। वीर सावरकर जयंती केवल एक महान व्यक्तित्व का स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति समर्पण और कर्तव्यबोध का प्रेरणादायी पर्व है।
टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 25 5 2025 को जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), रांची एवं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के संयुक्त तत्वाधान में बुंडू प्रखंड कार्यालय में एक दिवसीय विधिक जागरूकता सह रक्तदान शिविर का आयोजन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के राज्य प्रभारी राजेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में लगाया गया।इस शिविर के मुख्य अतिथि राकेश रौशन, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, हंश हेंब्रम, अंचल अधिकारी, बुंडू प्रखंड एवं रितेश कुमार, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन मुख्य रूप से उपस्थित थे। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य कार्यक्रम में आए हुए लोगों के बीच विधिक जागरूकता एवं सरकार के कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देना एवं एवं उनकी समस्याओं को सही पटल पर रखकर त्वरित निष्पादन करवाना है। इस शिविर में उपस्थित प्रखंड की ग्रामीण जनता को विधिक एवं सरकार के द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के पैनल अधिवक्ता राजेश कुमार सिन्हा के द्वारा दी गई एवं काफी संख्या में ग्रामीणों के द्वारा मुकदमों से संबंधित आवेदन, अबुआ आवास, राशन कार्ड, वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन, भूमि विवाद से संबंधित आवेदन इस शिविर में आगे की कार्यवाही के लिए जमा किये। इसके साथ ही सदर अस्पताल से रक्त संग्रहण दल रविन्द्र कुमार के नेतृत्व में इस शिविर में उपस्थित थे, जिन्होंने इस रक्तदान शिविर में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के सदस्यों के द्वारा दिये गये रक्त का संग्रहण किया। सचिव एवं अंचलाधिकारी ने रक्तदाताओं के बीच बिस्कुट, पानी एवं जूस का वितरण किया। सचिव ने शिविर में आये आवेदनों पर त्वरित कार्यवाही करने एवं सबको सस्ता एवं सुलभ न्याय प्राप्त करने की बात कही। सचिव को रितेश कुमार, राष्ट्रीय अध्यक्ष ने रुद्राक्ष का पौधा देकर इस शिविर में आने के लिए अपने संगठन की ओर से आभार व्यक्त किया। राज्य प्रभारी राजेश सिंह ने पैनल अधिवक्ता राजेश सिन्हा एवं सीओ, हंस हेंब्रम को भी पौधा देकर सम्मानित किया। इस शिविर में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के बुंडू प्रखंड प्रभारी चौधरी महतो, राम सिंह, जागेश्वर, मुन्ना लाल, जगरनाथ मुंडा, बगराए मुंडा, बिकेस्वर महतो, सदर अस्पताल से रविन्द्र कुमार एवं काफी संख्या में ग्रामीणों का इस एक दिवसीय विधिक जागरूकता एवं रक्तदान शिविर को सफल बनाने में सराहनीय सहयोग रहा।
लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत ने पद्मश्री सिमोन बाबा से की मुलाकात, स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत प्रख्यात समाजसेवी एवं पद्मश्री से सम्मानित सिमोन बाबा से उनके आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान सांसद ने सिमोन बाबा का कुशलक्षेम जाना और उनके स्वस्थ एवं दीघार्यु जीवन की कामना की। मुलाकात के दौरान सांसद भगत ने कहा कि सिमोन बाबा को जल संरक्षण और जंगल बचाने के लिए बचाने के उनके असाधारण कार्यों के लिए 2016 में पद्म श्री से इन्हें सम्मानित किया गया था। झारखंड का जल पुरुष भी इन्हें कहा जाता है। 1960 के दशक से ही इन्होंने बिना किसी सरकारी मदद के पारंपरिक तरीका इस्तेमाल करते हुए कहीं कुएं, तालाब और बांध बनायें। इससे इलाके में जलस्तर में काफी सुधार हुआ और किसानों को काफी फायदा हुआ।उन्होंने स्थानीय लोग को संगठित करके हजारों पेड़ लगाए और वनों की कटाई रोकने के लिए कड़े सामाजिक नियम भी बनाये थे। पद्मश्री सम्मान उनके नि:स्वार्थ सेवा का प्रतीक है। हम सबके लिए वे प्रेरणास्रोत हैं। बाबा का आशीर्वाद और मार्गदर्शन हमेशा समाज को नई दिशा देता रहा है। सांसद ने कहा कि सिमोन बाबा जैसे व्यक्तित्व हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। इनके अनुभवों से नई पीढ़ी को सीखना चाहिए। पद्मश्री सिमोन बाबा ने सांसद सुखदेव भगत को आशीर्वाद देते हुए लोहरदगा क्षेत्र के विकास और आदिवासी हितों की रक्षा के लिए निरंतर कार्य करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि यदि जमीन से जुड़कर काम करें तो समाज का भला निश्चित है। मौके पर मांडरविधानसभा सांसद प्रतिनिधि, बेडो प्रखंड सांसद प्रतिनिधि एवं अनेक कांग्रेस जन उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। खुशबू बरनवाल सीपी की तीन पुस्तकों का लोकार्पण सह कृति चर्चा प्रेस क्लब मोराबादी रांची में संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम दो सत्र में चला। पहले सत्र में पुस्तक लोकार्पण के साथ कृति चर्चा हुई और दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। पुस्तक लोकार्पण के मुख्य अतिथि केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ थे। विशिष्ट अतिथियों में राज्यसभा सांसद महुआ मांझी थी। डॉ पंपा सेन विश्वास और अनिता रश्मि भी विशिष्ट अतिथि रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता रांची विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के पूर्व प्रोफेसर अशोक प्रियदर्शी ने किया। मुख्य अतिथि ने अपनी अनुपस्थिति में शुभकामनाएं वीडियो से दिये। उन्होंने कहा- ऐसी साहित्यिक गतिविधियों द्वारा हिंदी का प्रचार-प्रसार होता है। खुशबू सीपी की साहित्यिक यात्रा भविष्य में उज्जवल हो ऐसी शुभकामनाएं देता हूं। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। मंत्रोच्चारण रेणु झा रेणुका ने किया। सुमधुर सरस्वती वंदना डॉ सुरिन्दर कौर नीलम ने खुशबू की पुस्तक सुगंधित सोपान से गाकर भाव विभोर कर दिया। उसके बाद देशना खुशराज के द्वारा स्वागत वंदना भरतनाट्यम और कथक नृत्य की प्रस्तुति से सभी दर्शकगण आह्लादित हो गये। महुआ माजी के कर कमलों द्वारा तीनों पुस्तकों का विमोचन हुआ। खुशबू बरनवाल सीपी की तीनों पुस्तकें तीन भिन्न-भिन्न विधाओं में है। सुगंधित सोपान छंद बद्ध काव्य संग्रह है। सीपी छंदालय, लेखनी छंद की ओर... पुस्तक में छंद के विधि विधान के साथ उदाहरण स्वरूप छन्द बद्ध रचनाएं हैं। जो नवांकुरों और पाठकों के लिए छन्द सीखने की ओर मार्ग प्रशस्त करता है। तीसरी पुस्तक कलछी और कलम जो गद्य विधा में लघुकथा संग्रह है। यह पुस्तक उन गृहिणियों को समर्पित है जो कलछी के साथ-साथ कलम की जिम्मेदारी को भी हृदय से निभाती हैं। महुआ माजी ने कहा लेखिका जब मुझे विशिष्ट अतिथि के लिए आमंत्रित कर रही थी तो मैं उनकी पुस्तकों के बारे में पूछी तब उन्होंने बताया कि वह छंदबद्ध काव्य संग्रह लेकर आयी हैं तो मैं प्रभावित हुई। मुझे अपना वह समय याद आया जब मैं छन्द सूत्र सीखने का प्रयास कर रही थी मैं सीख नहीं पायी। फिर मेरी विधा बदल गयी और मैं उपन्यासकार व साहित्यकार बन गयी। उनकी पुस्तक नवांकुरों को छंद सीखने का माध्यम बनेगी। तीनों पुस्तकों की परिचर्चा के लिए डॉ राजश्री जयंती, चारुमित्रा, नितेश मिश्र, कामेश्वर कुमार कामेश, पूनम वर्मा, रंजना वर्मा उन्मुक्त ने अपने वक्तव्य दिये। वरिष्ठ साहित्यकार अनिता रश्मि ने लेखिका की लगन शीलता, सृजनशीलता और सीखने की चाह को सराहा। वहीं डॉ पंपा सेन विश्वास ने लेखिका के प्रयासों को सराहाते हुए कहा छंद पर रचनाएं कम हो रही हैं और वर्तमान समय में छन्दबद्ध काव्य संग्रह आना खुद में साहित्य जगत के लिए पुरस्कार है। छन्द का सबसे बड़ा उदाहरण हमारा हृदय स्पंदन है। घड़ी की टिक- टिक है। वरिष्ठ साहित्यकार अशोक प्रियदर्शी ने सभी गृहिणियों की सृजन शीलता को नमन किया और उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि यदि गृहिणियां अपना कुछ समय सृजन करने में बिताती हैं तो साहित्य जगत को समृद्ध करने में कोई रुकावट नहीं आयेगी। इस कार्यक्रम का सफल संचालन सुप्रसिद्ध लेखक राजीव थेपड़ा से हुआ। तीनों पुस्तकों का आवरण पृष्ठ देशना खुशराज ने बनाया जिसे राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। रियांशी कलछी और कलम पुस्तक में उत्कृष्ट चित्रकारी के लिए सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण यह था कि सभी साहित्यिक पुरोधाओं को कलछी-कलम और गीता देकर सम्मानित किया गया। धन्यवाद ज्ञापन इस कार्यक्रम के आयोजक रजनीश बरनवाल ने किया। इस कार्यक्रम के साक्षी बने- प्रशांत कर्ण, नंदिनी प्रणय, रेनू बाला धार, उर्मिला सिंहा, सोनल थेपड़ा, पुष्पा सहाय, रजनी शर्मा चंदा, ऋतुराज वर्षा, विभा वर्मा, कल्पना, किरण, अनिल गुड्डू, सरोज गर्ग, मनीषा सहाय, कल्पना केसर, सुजाता जागृति, रिम्मी वर्मा डीआर आकांक्षा चौधरी इत्यादि उपस्थित थे। दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन किया गया। जिसमें श्रोताओं के बीच पांच कवियों (नरेश बंका, पंकज धरोहर, सदानंद यादव, सूरज श्रीवास्तव, रंजन वर्णवाल ने काव्य पाठ कर सभी श्रोताओं को हंसा कर लोट-पोट कर दिया तो कभी मंत्र मुग्ध। इस कार्यक्रम का संचालन खुशबू बरनवाल सीपी ने किया। इसमें श्रोता के रूप में बरनवाल बंधु आमंत्रित थे। इस कार्यक्रम को बरनवाल सेवा ट्रस्ट, रांची के अध्यक्ष टीपी बरनवाल ने दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर सभी बरनवाल बंधुओं को सम्मानित किया गया। इसमें बरनवाल महिला समिति, रांची की अध्यक्ष पूर्णिमा बरनवाल ने कलछी और कलम पुस्तक सशक्त महिला के नाम बताया।
टीम एबीएन, रांची। आजसू छात्र संघ के नेतृत्व में सोमवार को श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में छात्रों की विभिन्न समस्याओं को लेकर ताला बंद कर जोरदार प्रदर्शन किया गया। आंदोलन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में काफी देर तक छात्र-प्रशासन के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।बाद में कुलपति, प्रॉक्टर एवं परीक्षा नियंत्रक मौके पर पहुंचे और छात्र प्रतिनिधियों के साथ वार्ता कर प्रशासनिक भवन का ताला खुलवाया। छात्रों की मुख्य मांग नई शिक्षा नीति (ठएढ-2020) के तहत सेशन 2023-27 के छात्रों को हो रही परेशानियों को लेकर थी। छात्रों का आरोप है कि वर्ष 2023 में नामांकन के समय विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी गयी कि वे चार वर्षीय पाठ्यक्रम एवं ठएढ के नए नियमों के अंतर्गत अध्ययन करेंगे। साथ ही यह भी नहीं बताया गया कि प्रत्येक वर्ष दो सेमेस्टर की परीक्षाओं को मिलाकर 75 प्रतिशत पेपर पास करना अनिवार्य होगा, अन्यथा छात्रों को ईयर बैक का सामना करना पड़ेगा। छात्र नेताओं ने कहा कि कई छात्र वर्तमान में सेमेस्टर-5 तक पहुंच चुके हैं, लेकिन अभी तक सेमेस्टर-1 से सेमेस्टर- 4 तक की अंकपत्र उन्हें उपलब्ध नहीं करायी गयी है। ऐसे में छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है, जबकि उनका शैक्षणिक सत्र वर्ष 2027 में समाप्त होने वाला है। आंदोलन के दौरान छात्रों ने परीक्षा नियंत्रक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने छात्रों को एनईपी का एक्सपेरिमेंट छात्र बताते हुए समस्याओं को सहने की बात कही। छात्र नेताओं ने इसे गैर-जिम्मेदाराना एवं छात्र विरोधी बयान बताया। काफी देर तक चली वार्ता और छात्रों के दबाव के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सेशन 2023-27 के सेमेस्टर-5 के छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति देने पर सहमति जतायी। इसके बाद आंदोलन समाप्त किया गया। छात्र नेताओं ने इसे छात्र एकता और संघर्ष की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर आगे भी आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन का नेतृत्व प्रदेश सचिव राजेश सिंह, अनुष्का सिंह, शिवम सिंह, राज दुबे, योगेश महतो, बिट्टू वर्मा, रोशन नायक एवं रवि ने किया।
टीम एबीएन, रांची। रांची के पुंदाग स्थित श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा गंगा दशहरा पर्व श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। मंदिर परिसर में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में संत शिरोमणि परमहंस स्वामी सदानंद महाराज के सानिध्य में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ प्राप्त किया। पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण, मंत्रोच्चार एवं दीपों की दिव्य आभा से आलोकित हो उठा। कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना एवं भगवान की विशेष आरती से हुई। इस अवसर पर श्री राधा रानी का अलौकिक एवं आकर्षक श्रृंगार किया गया। वृंदावन से मंगाये गये नवीन पोशाक एवं जड़ित आभूषणों से सुसज्जित श्री राधा रानी की मनोहारी छवि श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रही। मंदिर में उपस्थित भक्तों ने भक्ति भाव से दर्शन कर सुख-समृद्धि एवं मंगल कामना की। मंदिर के पुजारी पंडित अरविंद पांडे द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न करायी गयी। भगवान को लड्डू, मेवा, फल एवं विशेष वेजिटेबल खिचड़ी का भोग अर्पित किया गया। साथ ही भगवान शिव का पाठ एवं गंगे हरि मंत्रों का जाप कर वातावरण को पूर्णत: आध्यात्मिक बना दिया गया। दीपों के साथ सामूहिक आरती में उपस्थित श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और मां गंगा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं के बीच वेजिटेबल खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया गया। श्रद्धालुओं ने भक्ति, सेवा और समर्पण के इस आयोजन की सराहना करते हुए इसे आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करने वाला बताया। आयोजन के माध्यम से सामाजिक समरसता, धार्मिक चेतना एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश भी दिया गया। मौके पर ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सचिव मनोज चौधरी एवं प्रवक्ता संजय सर्राफ ने गंगा दशहरा पर्व की महत्ता, उद्देश्य एवं आध्यात्मिक विशेषताओं पर विस्तृत प्रकाश डाला।वक्ताओं ने कहा कि गंगा दशहरा केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि मानव जीवन में पवित्रता, सेवा, सद्भाव एवं संस्कारों को आत्मसात करने का संदेश भी देता है। ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने जानकारी दी कि आगामी 27 मई को पद्मिनी एकादशी के पावन अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना एवं प्रसाद का आयोजन किया जायेगा।
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की एमआरपी संबंधी राष्ट्रव्यापी जनजागरण मुहिम को मिला राजभवन का समर्थनटीम एबीएन, रांची। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत द्वारा देशभर में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा तथा बाजार में व्याप्त मनमानी मूल्य वसूली पर रोक लगाने हेतु एमआरपी व्यवस्था को प्रभावी एवं जनहितकारी बनाने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, झारखंड प्रांत की पर्यावरण प्रमुख डॉ. अनीता शर्मा ने महामहिम राज्यपाल श्री संतोष गंगवार से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा।ज्ञापन के माध्यम से बाजार में उपभोक्ताओं से वस्तुओं पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) जिसका असली लागत मूल्य से कई गुणा अधिक राशि Mrp लेवल लगाकर वसूला जाता है, विभिन्न क्षेत्रों में एक ही उत्पाद की अलग-अलग कीमतें लेने तथा ग्राहकों के अधिकारों की अनदेखी जैसी समस्याओं की ओर महामहिम का ध्यान आकृष्ट कराया गया। साथ ही यह आग्रह किया गया कि एमआरपी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, कठोर एवं जनहितकारी बनाने हेतु प्रभावी कानून और सख्त क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।डॉ. अनीता शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में उपभोक्ता अनेक प्रकार की आर्थिक शोषणकारी प्रवृत्तियों का सामना कर रहे हैं। विशेष रूप से रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, सिनेमा हॉल, मॉल, अस्पताल तथा पर्यटन स्थलों पर उपभोक्ताओं से एमआरपी की अस्पष्ट नीति के कारण प्रत्येक खरीद में ग्राहक से अधिक मूल्य वसूले जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। इससे आम नागरिकों में असंतोष बढ़ रहा है।महामहिम राज्यपाल संतोष गंगवार ने विषय की गंभीरता को स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि वे इस महत्वपूर्ण जनहित विषय पर राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार से पत्राचार कर प्रभावी एमआरपी कानून बनाने तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक पहल करने का आग्रह करेंगे।अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने इस सकारात्मक पहल का स्वागत करते हुए कहा कि संगठन भविष्य में भी उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा हेतु जनजागरण और संवाद अभियान जारी रखेगा।
लोहरदगा में मंगलवार को होगा भव्य गंगा आरती का दिव्य आयोजन, 10 कुंवारी कन्याएं करेंगी विशेष प्रस्तुति : विजय खत्रीएबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। जिले में गंगा दशहरा के पावन अवसर पर 26 मई मंगलवार को लोहरदगा शहर स्थित बड़ा तालाब शिव मंदिर परिसर में आयोजित होने वाली भव्य गंगा आरती को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आयोजन समिति इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम को ऐतिहासिक और आकर्षक स्वरूप देने में जुटी हुई है। इसी क्रम में रविवार शाम लगभग 4 बजे बस स्टैंड स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण में 10 कुंवारी कन्याओं द्वारा गंगा आरती का विशेष अभ्यास किया गया।इस दौरान सामूहिक रूप से आरती की प्रस्तुति का पूर्वाभ्यास कराया गया, जिससे आयोजन की भव्यता का आभास देखने को मिला।आयोजन समिति से जुड़े सचिन कुमार साहू एवं अशोक कासकर, ममता देवी, रीता पांडे ने बताया कि इस वर्ष गंगा आरती को पहले से अधिक भव्य और दिव्य स्वरूप देने की तैयारी की गई है।श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए मंच निर्माण, प्रकाश सज्जा, ध्वनि व्यवस्था, सुरक्षा एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि गंगा दशहरा के अवसर पर आयोजित होने वाली यह भव्य गंगा आरती धार्मिक आस्था, सनातन संस्कृति और भारतीय परंपरा का अद्भुत संगम बनेगी। दीपों की जगमगाहट, मंत्रोच्चारण और भक्ति की धारा से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठेगा।इस दौरान बताया गया कि पिछले लगभग एक माह से 10 कुंवारी कन्याओं द्वारा नियमित रूप से गंगा आरती का अभ्यास किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को अनुशासित, आकर्षक एवं आध्यात्मिक प्रस्तुति देखने को मिल सके। आरती अभ्यास आयोजन समिति के सदस्य सचिन कुमार साहू की देखरेख में कराया जा रहा है।गंगा आरती में शामिल होने वाली कुंवारी कन्याओं में पूजा अग्रवाल, मानसी कुमारी, कुमारी अंतरा, राखी कुमारी, सिमरन गुप्ता, राजनंदिनी कुमारी, प्रियंका साहू, बृष्टि कश्यप, भावना मित्तल एवं सृष्टि पांडे शामिल हैं। सभी कन्याएँ पारंपरिक परिधान में सामूहिक रूप से गंगा आरती प्रस्तुत करेंगी। कार्यक्रम 26 मई 2026 को संध्या 7 बजे से बड़ा तालाब शिव मंदिर लोहरदगा में आयोजित किया जाएगा।आयोजन समिति ने लोहरदगा की समस्त माताओं, बहनों, युवाओं एवं सनातनी बंधुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है। इस दौरान अनिल कुमार गुप्ता, विजय खत्री, रंजीत साहू, चंदन गोयल, अशोक कासकर, सचिन कुमार साहू, सत्यम कुमार, चंदन गोप सहित अन्य लोग उपस्थित रहेंगे।
टीम एबीएन, रांची। भारत विकास परिषद्, दक्षिण झारखंड प्रांत द्वारा आयोजित प्रांतीय कार्यशाला का आयोजन होटल कुकवेल, रांची में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। कार्यशाला में दक्षिण झारखंड प्रांत के अंतर्गत आने वाली आठ शाखाओं के अतिरिक्त गढ़वा एवं चाईबासा से भी प्रतिनिधियों की सहभागिता रही। कार्यशाला में परिषद् के विभिन्न प्रकल्पों एवं संगठनात्मक गतिविधियों पर विस्तृत चर्चा की गयी तथा आगामी कार्ययोजनाओं को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। कार्यक्रम में परिषद् की क्षेत्रीय अध्यक्षा एवं राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्या सुमन सिंह, क्षेत्रीय संयुक्त महासचिव दिनेश प्रसाद, दक्षिण झारखंड प्रांत अध्यक्ष सुधीर कर्ण तथा प्रांतीय महासचिव अरुण मिश्रा का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। प्रांत संस्कार संयोजक गौरव पाण्डेय ने मंच संचालन किया। कार्यक्रम के दौरान सभी उपस्थित अधिकारियों ने अपने नवीन दायित्वों हेतु शपथ ग्रहण किया। कार्यक्रम में भारत विकास परिषद् के पांचों प्रमुख प्रकल्प संपर्क, सेवा, संस्कार, महिला सहभागिता एवं पर्यावरण पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई। क्षेत्रीय अध्यक्षा सुमन सिंह ने कहा कि भारत विकास परिषद् केवल एक संगठन नहीं, बल्कि समाज सेवा एवं राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम है। उन्होंने सभी शाखाओं से समन्वय एवं सक्रियता के साथ कार्य करने का आग्रह किया। अंत में प्रांतीय संगठन सचिव उमेश राजगढ़िया ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
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