टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रदेश के राजधानी रांची अंतर्गत धुर्वा के सेक्टर-2 में राष्ट्रगौरव महाराणा प्रताप चौक के नजदीक अवस्थित कार्यालय में भारत रत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण जयंती समारोह का आयोजन किया गया।मौके पर मौजूद गणमान्यों ने सर्वप्रथम भारतरत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण के तैलचित्र के पास दीप प्रज्वलित करने के पश्चात पुष्प अर्पित कर उन्हें आदरपूर्ण भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। दिन शुक्रवार को अपराह्न में आहूत इस जयंती समारोह में अपने संबोधन के दौरान जेपी जनता दल के प्रदेशाध्यक्ष अनिल मिश्रा ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता भारतरत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जन्म एकीकृत बिहार के सारण जिले के सिताब दियारा में 11 अक्टूबर 1902 को हुआ था। साथ ही श्री मिश्रा ने कहा कि देश में एक ऐसा समय आया कि सत्ता में बैठे लोग स्वयं को सर्वशक्तिमान समझ लोकतंत्र का दमन करते हुए देश में आपातकाल की घोषणा कर दिए तब भारतरत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने सम्पूर्ण क्रांति का आह्वान किया।श्री मिश्रा ने कहा कि लोकनायक कि सम्पूर्ण क्रांति में सात क्रांतियाँ शामिल है— राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक व आध्यात्मिक क्रांति। इन सातों क्रांतियों को मिलाकर सम्पूर्ण क्रान्ति होती है।इस मौके पर मौजूद एकीकृत बिहार के विधान पार्षद रहे स्वर्गीय रामानंद सिंह के सुपौत्र शिक्षाविद प्रो (डॉ) धीरज सिंह सूर्यवंशी ने भारत रत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी की जयंती पर कोटिशः नमन करते हुए कहा कि पांच जून 1975 को लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने घोषणा की थी- भ्रष्टाचार मिटाना, बेरोजगारी दूर करना, शिक्षा में क्रांति लाना, आदि ऐसी चीजें हैं जो आज की व्यवस्था से पूरी नहीं हो सकतीं; क्योंकि वे इस व्यवस्था की ही उपज हैं। वे तभी पूरी हो सकती हैं जब सम्पूर्ण व्यवस्था बदल दी जाए और सम्पूर्ण व्यवस्था के परिवर्तन के लिए क्रान्ति, सम्पूर्ण क्रान्ति आवश्यक है। साथ ही प्रो (डॉ) धीरज सिंह सूर्यवंशी ने कहा कि सम्पूर्ण क्रांति की तपिश इतनी भयानक थी कि केन्द्र में कांग्रेस को सत्ता से हाथ धोना पड़ गया था। एकीकृत बिहार से उठी सम्पूर्ण क्रांति की चिंगारी देश के कोने-कोने में आग बनकर भड़क उठी थी। जेपी के नाम से मशहूर जयप्रकाश नारायण घर-घर में क्रांति का पर्याय बन चुके थे। अंत में प्रो (डॉ) धीरज सिंह सूर्यवंशी ने कहा कि भारत रत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण का व्यक्तित्व हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्त्रोत है। भारत रत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण जयंती समारोह की अध्यक्षता जेपी जनता दल के प्रदेशाध्यक्ष अनिल मिश्रा ने की तो वहीं संचालन प्रो.(डॉ.) धीरज सिंह सूर्यवंशी" ने की। मौके पर जयंती समारोह में मनोज शर्मा, सनी सिंह राजपूत, शैलेश तिवारी, आरके सिंह, विजय सक्सेना, दिलीप मंडल, अश्विनी कुमार उर्फ (जट्टू), दिवाकर सिंह, सुनील पांडे, दीपक गुप्ता, प्रकाश गुप्ता, आयुष कुमार, अभिनव मिश्रा, बबलू मुंडा, संतोष साहू, संतु तिर्की आदि सहित भारी संख्या में लोग मौजूद थे।
रांची शहर के विभिन्न पूजा पंडालों में विधि व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम, यातायात और पंडालों में सुरक्षा मानकों की वस्तुस्थिति का जायजा लिया गयाउपायुक्त रांची, मंजूनाथ भजंत्री ने रांची शहर के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों का जायजा लियाप्रतिमा विसर्जन से पहले बिजली के तारों को हटाने और विसर्जन जुलूस तय रूट पर निकालने का निर्देशटीम एबीएन, रांची। उपायुक्त रांची, मंजूनाथ भजंत्री द्वारा आज दिनांक-10 अक्टूबर 2024 को रांची शहर के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों में सुरक्षा का जायजा लिया। उन्होंने रांची शहर के कई दुर्गा पूजा पंडालों का निरीक्षण किया। उपायुक्त रांची, मंजूनाथ भजंत्री द्वारा रांची शहर के विभिन्न पूजा पंडालों में विधि व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम, यातायात और पंडालों में सुरक्षा मानकों की वस्तुस्थिति का जायजा लिया गया। साथ ही उन्होंने पूजा समिति के सदस्यों को कई दिशा-निर्देश भी दिए। साथ ही प्रतिमा विसर्जन से पहले बिजली के तारों को हटाने और विसर्जन जुलूस तय रूट पर निकालने का निर्देश दिया। साथ ही पंडालों में सीसीटीवी कैमरा कंट्रोल रूम का भी निरीक्षण किया। महिलाओं के लिए अलग से व्यवस्था करने और पर्याप्त संख्या में वालंटियर तैनात रखने के निर्देश दिये गये हैं।उपायुक्त रांची, मंजूनाथ भजंत्री ने विभिन्न पूजा पंडालों में पूजा अर्चना करते हुए रांची जिला वासियों के सुख की भी कामना की। इस दौरान पुलिस अधीक्षक शहर रांची, श्री राजकुमार मेहता, अपर जिला दंडाधिकारी (विधि- व्यवस्था), राजेश्वर नाथ आलोक एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
जमशेदपुर में दुर्गा पूजा समितियों ने रतन टाटा के सम्मान में नहीं बजाया संगीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम किये रद्दएबीएन न्यूज नेटवर्क, जमशेदपुर। दिग्गज उद्योगपति रतन नवल टाटा के सम्मान में बीते बृहस्पतिवार को यहां 300 से अधिक दुर्गा पूजा समितियों ने संगीत नहीं बजाया और सांस्कृतिक कार्यक्रम रद्द कर दिये। जमशेदपुर शहर की केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि कुछ आयोजकों ने पंडालों के पास टाटा की तस्वीर भी लगायी है।केंद्रीय पूजा समिति के महासचिव आशुतोष कुमार सिंह ने बताया, हमने सभी सामुदायिक पूजा समितियों से अपील की है कि वे इस त्योहार को सादगी से मनाएं और रतन टाटा के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए ढाक जैसे अनिवार्य वाद्य यंत्रों को छोड़कर किसी तरह का संगीत न बजाएं। सिंह ने कहा केंद्रीय समिति से जुड़ी कुल 332 सामुदायिक पूजा समितियों ने इस आह्वान पर सर्वसम्मति से सहमति जताई और ढाक (एक तरह का वाद्य यंत्र) को छोड़कर अन्य संगीत बजाना बंद कर दिया।महासचिव ने बताया कि उनमें से कुछ ने बृहस्पतिवार को आयोजन किये जाने वाले सभी सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रद्द कर दिए। सिंह ने कहा कि टाटा ने शहर के विकास के साथ-साथ इसके उद्योगों, व्यापार और व्यवसायों में भी बहुत बड़ा योगदान दिया। इस बीच, जमशेदपुर फुटबॉल क्लब ने भी चार दिन के अंतराल के बाद खिलाड़ियों के अभ्यास शुरू करने से पहले टाटा को श्रद्धांजलि दी। क्लब ने एक बयान में कहा कि टीम ने टाटा की याद में कुछ क्षणों का मौन रखा।
टीम एबीएन, चौपारण/ इटखोरी। चौपारण-इटखोरी के कई गणमान्य प्रखंड के प्रमुख पूजा पंडाल पहुंचकर माता का दर्शन किया और क्षेत्र में सुख, शांति व समृद्धि की कामना की। जिसमें भद्रकाली महाविद्यालय इटखोरी के पूर्व प्राचार्य विनय कुमार सिंह, शहीद भगत सिंह उच्च विद्यालय झापा बिशनपुर के पूर्व प्रधानाध्यापक भास्कर प्रसाद सिंह, ज्ञान सरोवर विद्यालय इटखोरी के संस्थापक बीरबल पांडेय, समाजसेवी सुनील कुमार सिंह, शिक्षक सह समाजसेवी विशेश्वर यादव शामिल थे। बताते चलें कि ये सभी चौपारण स्थित ब्लॉक मोड में आयोजित दुर्गा पूजा पंडाल, ग्राम यवनपुर में आयोजित दुर्गा पूजा पंडाल, राजा गढ़ स्थित गढ़काली में आयोजित संध्या आरती में शामिल हुए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रजनी गुप्त वर्ष 2024 का आनंद सागर स्मृति कथाक्रम सम्मान चर्चित कथाकार रणेंद्र को दिया वीरेन्द्र सारंग जायेगा। कथाक्रम सम्मान समिति, जिसमें कथाक्रम संयोजक शैलेंद्र सागर, वरिष्ठ कहानीकार शिवमूर्ति, रंगकर्मी राकेश व चर्चित लेखिका रजनी गुप्त सदस्य हैं, ने यह निर्णय लिया। 04 मार्च 1960 को जन्मे रणेंद्र हिंदी कथा साहित्य के विशिष्ट एवं चर्चित कथाकार हैं। झारखंड के प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर अपने दायित्वों का पूरी योग्यता और दक्षता से निर्वहन करते हुए वह 2020 में सेवानिवृत्त हुए और बाद में अप्रैल 2024 तक वह झारखंड सरकार के जनजातीय कल्याण शोध संस्थान के निदेशक के रूप में कार्यरत रहे। साथ ही कथा साहित्य में उनकी सक्रियता बनी रही। 2003 में प्रकाशित अपने पहले उपन्यास ग्लोबल गांव का देवता से वह हिंदी साहित्य जगत में चर्चा में आये। वर्ष 2014 में उनका दूसरा उपन्यास गायब होता देश भी अत्यंत चर्चित हुआ किंतु 2021 में प्रकाशित उनके तीसरे उपन्यास गूंगी रुलाई का कोरस ने अपनी विशिष्ट कथावस्तु और प्रस्तुति के कारण उन्हें अपूर्व प्रतिष्ठा प्रदान की। इन उपन्यासों में रणेंद्र ने आदिवासी जीवन, समाज और संस्कृति का अत्यंत प्रामाणिक आख्यान प्रस्तुत कर हिंदी कथा साहित्य को समृद्ध किया है । उपन्यासों के अतिरिक्त उनके दो कहानी संग्रह रात बाकी एवं अन्य कहानियां व छप्पन छुरी बहत्तर पेंच और एक कविता संग्रह प्रकाशित हैं। उन्होंने चार खंडों में प्रकाशित झारखंड एनसाइक्लोपीडिया का भी संपादन किया है। रणेन्द्र को जेसी जोशी स्मृति जनप्रिय लेखक सम्मान, बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान, पहला विमलादेवी स्मृति सम्मान, वनमाली कथा सम्मान, श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान, ढींगरा फैमिली फाउंडेशन अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान, प्रेमचंद कथा सम्मान आदि से समादृत किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि प्रत्येक वर्ष एक कथाकार को प्रतिष्ठित आनंद सागर स्मृति कथाक्रम सम्मान दिया जाता है जिसके अंतर्गत इक्कीस हजार रुपए धनराशि, सम्मान चिह्न व पत्रक प्रदान किया जाता है।विगत सालों में संजीव, कमलाकांत त्रिपाठी, चंद्रकिशोर जायसवाल, मैत्रेयी पुष्पा दूधनाथ सिंह, ओमप्रकाश बाल्मीकि शिवमूर्ति, असगर वजाहत, भगवान दास मोरवाल, उदय प्रकाश, प्रियंवद, मधु कांकरिया, महेश कटारे, अब्दुल बिस्मिल्ला, स्वयं प्रकाश, तेजिन्दर, जयनंदन, नासिरा शर्मा, अखिलेश, राकेश कुमार सिंह, जया जादवानी, मनोज रूपड़ा, एस आर हरनोट, नवीन जोशी, पंकज मित्र, हृषीकेश सुलभ एवं योगेन्द्र आहुजा को यह सम्मान दिया जा चुका है। यह सम्मान कथाक्रम 2024 समारोह के अवसर पर दिनांक 09 नवंबर 2024 को लखनऊ में प्रदान किया जायेगा। (रणेंद्र संपर्क 09431114935)
पारसी धर्म से थे रतन टाटा, अनोखा होता अंतिम संस्कार! 3,000 साल पुरानी परंपरा, न शव को जलाया जाता न दफनाया जाता एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत के प्रमुख कारोबारी रतन टाटा का निधन मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में 86 वर्ष की आयु में हुआ। उनके योगदान और उपलब्धियों के लिए उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, पद्म भूषण (2000) और पद्म विभूषण (2008) से सम्मानित किया गया था। रतन टाटा पारसी समुदाय से थे और उनका अंतिम संस्कार पारसी परंपरा के अनुसार किया जायेगा। फिलहाल रटन टाटा के पार्थिव शरीर को सुबह करीब 10.30 बजे एनसीपीए लॉन में ले जाया जायेगा, ताकि लोग दिवंगत आत्मा को अंतिम श्रद्धांजलि दे सकें। अंतिम संस्कार की जानकारीरतन टाटा पारसी समुदाय से आते हैं लेकिन उनका अंतिम संस्कार पारसी रीति रिवाजों की जगह हिन्दू परंपराओं के अनुसार किया जायेगा। उनके पार्थिव शरीर को शाम 4 बजे मुंबई के वर्ली स्थित इलेक्ट्रिक अग्निदाह में रखा जायेगा। यहां करीब 45 मिनट तक प्रेयर होगी, इसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जायेगी। रतन टाटा का पार्थिव शरीर कोलाबा स्थित उनके घर ले जाया गया है। गुरुवार को उनका अंतिम संस्कार वर्ली के श्मशान घाट में किया जायेगा। सुबह करीब 10:30 बजे उनके पार्थिव शरीर को एनसीपीए लॉन में रखा जायेगा, ताकि लोग दिवंगत आत्मा को अंतिम श्रद्धांजलि दे सकें। बाद में, शाम 4 बजे, पार्थिव शरीर नरीमन पॉइंट से वर्ली श्मशान प्रार्थना हॉल के लिए अंतिम यात्रा पर निकलेगा। परिवार के अनुसार, श्मशान घाट पर उनके पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज में लपेटा जायेगा और पुलिस की बंदूक की सलामी दी जायेगी। इसके बाद पारसी रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार संपन्न होगा।पारसी अंतिम संस्कार की परंपरापारसी समुदाय का अंतिम संस्कार हिंदू, मुस्लिम और ईसाई परंपराओं से काफी अलग है। पारसी अपने मृतकों को जलाते नहीं हैं और न ही दफनाते हैं। उनकी परंपरा लगभग 3,000 साल पुरानी है, जिसमें शवों को टावर आॅफ साइलेंस या दखमा में रखा जाता है। टावर आफ साइलेंस क्या है?जब किसी पारसी व्यक्ति का निधन होता है, तो उनके शव को शुद्ध करने की प्रक्रिया के बाद टावर आॅफ साइलेंस में खुले में छोड़ दिया जाता है। इसे दोखमेनाशिनी कहा जाता है, जिसमें शव को सूरज और मांसाहारी पक्षियों के लिए छोड़ दिया जाता है। इस प्रक्रिया को आकाश में दफनाने के रूप में भी देखा जा सकता है। बौद्ध धर्म में भी इस तरह का अंतिम संस्कार किया जाता है, जहां शवों को गिद्धों के हवाले किया जाता है। रतन टाटा का अंतिम संस्कार न केवल उनके परिवार और प्रियजनों के लिए एक व्यक्तिगत क्षति है, बल्कि उनके द्वारा स्थापित मूल्यों और परंपराओं की भी याद दिलाता है। पारसी अंतिम संस्कार की यह अद्वितीय प्रक्रिया उनके जीवन के प्रति उनके दृष्टिकोण को दर्शाती है। पारसी लोग अपने अंतिम संस्कार के तरीकों में बदलाव करने के लिए मजबूरदरअसल, पारसी समुदाय, जो कभी मौजूदा ईरान यानी फारस को आबाद करता था, अब पूरी दुनिया में केवल कुछ ही बचे हैं। 2021 में हुए एक सर्वे के अनुसार, दुनिया में पारसियों की संख्या 2 लाख से भी कम है। इस समुदाय को अपनी अनोखी अंतिम संस्कार परंपरा के कारण कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। टावर आॅफ साइलेंस के लिए उपयुक्त स्थान की कमी और चील व गिद्ध जैसे मांसाहारी पक्षियों की घटती संख्या के कारण पिछले कुछ वर्षों में पारसी लोग अपने अंतिम संस्कार के तरीकों में बदलाव करने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
झारखंड बिजली विभाग के खाते से निकाली गयी राशि टीम एबीएन, रांची। झारखंड में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने आज राज्य सरकार पर बड़ा निशाना साधा है। मरांडी ने राज्य के मुख्यमंत्री सह ऊर्जा मंत्री को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि हेमंत सरकार में झारखंड ऊर्जा उत्पाद निगम लिमिटेड के खाते से 109 करोड़ की फर्जी निकासी हुई है जो गंभीर आर्थिक अपराध है। मरांडी ने कहा कि कुछ अधिकारियों पर केस दर्ज करा कर राज्य सरकार फर्जी निकासी मामले में सीआईडी जांच करने का नाटक कर रही है। उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार में सीआईडी जांच की विश्वसनीयता हमेशा शक- सवालों के घेरे में रही है। सीआईडी जांच करा कर सरकार क्या बड़ी मछलियों को बचाने का प्रयास कर रही है। मरांडी ने कहा कि अरबों रुपये की धोखाधड़ी एवं इसके तार दूसरे राज्यों से जुड़े होने के उद्भेदन हेतु राज्य सरकार अविलंब उक्त मामले की जांच सीबीआई को सौंपे। मरांडी ने कहा कि राज्य में बैंक कर्मियों और अधिकारियों के साथ मिलकर भ्रष्टाचारियों ने बड़े पैमाने पर बिजली विभाग में सुनियोजित तरीके से भ्रष्टाचार को अंजाम दिया है। झारखंड में यह नया मामला नहीं है, बल्कि इससे पहले भी मिड-डे मील योजना में ठीक इसी तरह का घोटाला सामने आ चुका है। मरांडी ने कहा कि अनौपचारिक रूप से अधिकारियों से हुई बातचीत में यह पता चल रहा है कि करीब 500 करोड़ रुपए से अधिक की सरकारी संपत्ति का गबन घोटालेबाजों एवं भ्रष्टाचारियों द्वारा किए जाने की संभावना है, जो राज्य सरकार की भ्रष्ट नीतियों और लचर प्रशासन का परिणाम है। मरांडी ने कहा कि पूरी घटना को क्रमबद्ध तरीके से देखें तो यह बात स्पष्ट होती है कि झारखंड के दूसरे विभागों में भी इस तरह की घोटाले हुए होंगे जो सामने आने बाकी हैं। इसमें बैंक अधिकारी, कर्मचारी तथा दूसरे राज्य के लोग भी मिले हुए हैं इसलिए इसकी जांच सीआईडी या झारखंड पुलिस के बस की बात नहीं है। उन्होंने कहा कि विभाग के मंत्री होने के नाते मुख्यमंत्री अपनी जिम्मेदारियों से भाग नहीं सकते। मरांडी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस मामले की तुरंत सीबीआई से जांच नहीं कराई तो यह स्पष्ट होगा कि सरकार खुद इस घोटाले को दबाने और दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है। मरांडी ने कहा कि बिना विलंब किये इस मामले की जांच सीबीआई को हस्तांतरित करना चाहिए ताकि घोटाले में घोटाले बाजों के साथ इस षड्यंत्र में शामिल लोगों का खुलासा हो सके। उन्होंने कहा कि यह भी साफ पता चल रहा है कि ये मनी लांड्रिंग का भी मामला है। इसलिए ईडी के निदेशक से अनुरोध है कि इस मामले को हाथ में लेकर तुरंत जांच शुरू करें।
देश के आर्थिक जगत का एक युग हुआ समाप्तटीम एबीएन रांची। देश के जाने-माने सुप्रसिद्ध उद्योगपति, समाजसेवी, भारत के अनमोल रत्न रतन नवल टाटा के आकस्मिक निधन पर रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन, अग्रवाल सभा एवं मारवाड़ी सहायक समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने गहरा शोक संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है। रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि सरल, मिलनसार, मृदुभाषी, समाजसेवी रतन टाटा एक असाधारण व्यक्तित्व के स्वामी थे। उन्होंने अपनी अतुलनीय संकल्प एवं क्षमता से टाटा समूह को आसमान पर बिठाया और भारत के आर्थिक ढांचे को भी ठोस आकार दिया। उनकी शालीनता, स्पष्टवादिता, सरलता और समाज के प्रति समर्पण पूरा राष्ट्र हमेशा याद रखेगा। देश ने रतन टाटा के रूप में एक अनमोल रत्न को खो दिया तथा देश के आर्थिक जगत का एक युग का समाप्त हो गया। उनके निधन से पूरे राष्ट्र को अपूरणीय क्षति हुई है। शोक संवेदना व्यक्त करने वालों में रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष ललित कुमार पोद्दार, महामंत्री विनोद कुमार जैन, अग्रवाल सभा के अध्यक्ष प्रमोद कुमार अग्रवाल, मंत्री अनिल अग्रवाल, मारवाड़ी सहायक समिति के अध्यक्ष मनोज चौधरी, सचिव रमण वोडा, सुरेश चंद्र अग्रवाल, सज्जन पाड़िया, पवन शर्मा, पवन पोद्दार, नंदकिशोर पाटोदिया, अशोक नारसरिया, कौशल राजगढ़िया, कमल कुमार केडिया, कमलेश संचेती, अजय डीडवानिया, विजय खोवाल, प्रमोद सारस्वत, किशन पोद्दार, नरेश बंका, कमल खेतावत, सुनील पोद्दार, कमल जैन, प्रमोद बगड़िया, राजकुमार मित्तल, रतन मोर, निर्मल बुधिया, किशन साबू, अनिल कुमार अग्रवाल, मनोज बजाज, जितेश अग्रवाल, बबलू हारित, मुकेश काबरा, अमर अग्रवाल, सौरभ बजाज,मनीष लोधा, अमित चौधरी, अंजय सरावगी, सुनील केडिया,सरवन अग्रवाल, अजय खेतान, राजेश कौशिक, किशन अग्रवाल, दीपेश निराला, आशीष अग्रवाल, विशाल पाड़िया, विकास अग्रवाल, रमाशंकर बगड़िया, मनोज रूईया, बिनोद कुमार टिबडेवाल, सुरेश पोद्दार, शिवभावसिका मनीष टांटिया, ललित पोद्दार, संजय सर्राफ आदि शामिल है। उक्त जानकारी रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी।
टीम एबीएन, रांची। रांची विश्वविद्यालय के अतिथि शिक्षकों को पिछले 17 महीनों से बकाया मानदेय नहीं मिलने की वजह से वे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही के कारण ये शिक्षक वित्तीय कठिनाइयों में हैं, यहां तक कि त्योहारों पर भी उन्हें कर्ज लेने की जरूरत महसूस हो रही है। संघ के अध्यक्ष अरविंद प्रसाद ने कहा कि इस बार दुर्गा पूजा घर में ही मनानी पड़ेगी क्योंकि धरना और आंदोलन के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है।झारखंड प्रदेश अतिथि शिक्षक संघ के संयोजक सह वरिष्ठ नेता डॉ धीरज सिंह सूर्यवंशी ने चेतावनी दी है कि पूजा के बाद अतिथि शिक्षक उग्र आंदोलन करेंगे, जिसमें अर्थी जुलूस, तालाबंदी, पुतला दहन, भूख हड़ताल, और आमरण अनशन जैसे कदम शामिल होंगे। डॉ धीरज ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और सूबे की सरकार को इस समस्या का अविलंब समाधान करना होगा।डॉ अशीष कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री ने हाल ही में बयान दिया कि यह सरकार सुनने वाली है, लेकिन शिक्षकों की समस्याओं को अनसुना किया जा रहा है। शिक्षकों ने मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें मुलाकात का मौका नहीं मिला। अतिथि शिक्षकों की बहाली 2015 से 2023 के बीच उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के निदेर्शानुसार हुई थी, लेकिन 17 महीनों से उनका मानदेय बकाया है और वे अब संघर्ष के रास्ते पर हैं।अतिथि शिक्षकों की इस बैठक में डॉ चक्षु पाठक, शुभम सौरभ, राजू हजम, शिवकुमार, सतीश तिर्की, कृष्णकांत और विकास कुमार सहित कई शिक्षक उपस्थित थे। उक्त जानकारी अतिथि शिक्षक संघ अध्यक्ष अरविंद प्रसाद ने दी।
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