जेपीएससी की 14वीं पीटी परीक्षा परिणाम में गंभीर अनियमितताओं की उच्चस्तरीय सीबीआई जांच हो बिना कट-आॅफ मार्क्स एवं आयोग के सदस्यों के हस्ताक्षर के जारी 14वीं जेपीएससी का परीक्षाफल असंवैधानिक है, रद्द किया जाये ओएमआर शीट का आयोग से बाहर आना अत्यंत गंभीर मामला है, इसकी सीबीआई जांच करायी जाये टीम एबीएन, रांची। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष एवं छात्र आंदोलनकारी नेता देवेन्द्र नाथ महतो ने आज मोराबादी स्थित आॅक्सीजन पार्क में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा जारी 14 वीं संयुक्त असैनिक सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा-2025 के परिणाम पर गंभीर सवाल उठाये। उन्होंने कहा कि जिस परीक्षा से झारखंड के लाखों युवाओं का भविष्य जुड़ा हो, उस परीक्षा की पूरी प्रक्रिया पूर्णत: पारदर्शी, निष्पक्ष एवं संवैधानिक होनी चाहिए। किंतु हाल में जारी परिणाम ने अनेक गंभीर संदेह उत्पन्न कर दिये हैं। देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा कि समाचारों के अनुसार परिणाम पर आयोग के संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं हैं तथा आयोग के भीतर मतभेद की बातें सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर-1 की एक ओएमआर शीट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें कथित रूप से केवल 48 प्रश्नों के उत्तर अंकित होने के बावजूद अभ्यर्थी को सफल घोषित किए जाने का दावा किया जा रहा है। यदि यह वायरल ओएमआर शीट और उससे जुड़े दावे सही पाए जाते हैं, तो यह अत्यंत गंभीर मामला है तथा परीक्षा की गोपनीयता और पूरी चयन प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। इसके अतिरिक्त आयोग द्वारा श्रेणीवार कट-आॅफ अंक भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, जिससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह और गहरा हो गया है। उन्होंने कहा कि परिणाम जारी होने के तुरंत बाद 18, 19 एवं 20 जुलाई 2026 को मुख्य परीक्षा निर्धारित कर दी गई है। अभ्यर्थियों को आवेदन एवं तैयारी के लिए अत्यंत कम समय दिया गया है, जिससे विशेषकर ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के अभ्यर्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। देवेन्द्र नाथ महतो ने यह भी कहा कि 19 जुलाई 2026 को खररउ की झारखंड क्षेत्रीय कार्यकर्ता प्रतियोगिता परीक्षा-2024, यूपीएससी सीएपीएफ परीक्षा तथा सीएसआईआर- यूजीसी नेट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाएं भी निर्धारित हैं। ऐसे में अनेक अभ्यर्थी एक साथ कई परीक्षाओं में शामिल होने से वंचित हो सकते हैं, जो समान अवसर के सिद्धांत के विपरीत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जेएलकेएम किसी भी राज्य अथवा किसी अभ्यर्थी के विरुद्ध नहीं है। संगठन की लड़ाई केवल पारदर्शी, निष्पक्ष एवं संविधानसम्मत भर्ती प्रक्रिया के लिए है। यदि चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष है, तो उसकी स्वतंत्र जांच कराने में किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। देवेन्द्र नाथ महतो ने मांग की कि 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा की संपूर्ण चयन प्रक्रिया की उच्चस्तरीय सीबीआई जांच करायी जाये। जांच पूरी होने तथा श्रेणीवार कट-आॅफ सार्वजनिक किये जाने तक मुख्य परीक्षा तत्काल स्थगित की जाये। साथ ही वायरल ओएमआर शीट एवं उससे जुड़े सभी तथ्यों की भी निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों एवं संबंधित एजेंसियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाये। उन्होंने कहा कि जेएलकेएम झारखंड के युवाओं के अधिकार, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था एवं न्यायपूर्ण चयन प्रक्रिया के लिए सदैव संघर्ष करता रहेगा। यदि अभ्यर्थियों के हितों की अनदेखी की गयी तो संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन चलाने को बाध्य होगा।
आज कुडू के रूद्र गांव में होगा अंतिम संस्कार एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। लोहरदगा शांति नगर निवासी सेवानिवृत्ति प्रधानाध्यापक राज किशोर भारती का निधन चार जुलाई की शाम को इलाज के दौरान हृदय गति रुक जाने के कारण रांची में हो गया। वह 72 वर्ष के थे। उन्होंने अपने पीछे अजय भारती बंटी, अभय भारती पम्मी और निर्भय भारती चंकी समेत तीन पुत्र और पत्नी समेत भरा पूरा परिवार छोड़ गये हैं। राज किशोर भारती 2014 में लोहरदगा प्रखंड के मन्हो मिडिल स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद से सेवानिवृत हुए थे। इसके पूर्व वह किस्को प्रखंड के सुदूरवर्ती गांव छोटचोरगाई मिडिल स्कूल में अपनी सेवा दी थी। मृदुभाषी, मिलनसार और सबों के साथ समभाव रखने वाले राजकिशोर भारती के निधन से पूरे शहर में शोक किला है। उनके पुत्र अभय भारती न केवल हिंडालको के कनीय अधिकारी हैं, बल्कि पतंजलि योग समिति के जिला अधिकारी और जिला स्तरीय योग शिक्षक भी हैं। उनकी पोती खुशी भारती जिला स्तरीय योग प्रशिक्षिका है। राजकिशोर भारती के निधन पर हिंडालको के कंट्री हेड बिजेश कुमार झा, एच आर अधिकारी नीरज कुमार, श्रीमती मोहंती लाल, लालनवल किशोर नाथ शाहदेव,बालकिशोर नाथ शाहदेव,शिक्षक विजय शंकर दुबे, शैलेंद्र कुमार सुमन, गुरुकुल शांति आश्रम के आचार्य शरच्चंद्र आर्य, वैद्यनाथ मिश्र, राजू गुप्ता, विनोद सिंह, अरुण बर्मा,राजेश साहू, रामनारायण प्रसाद,प्रभात भगत,आशीष आर्य, भूषण प्रसाद, ओमप्रकाश सिंह, मनोज गुप्ता मन्ना,निधिकांत प्रसाद, प्रवीण भारती, शिव शंकर सिंह, कृपा प्रसाद सिंह, अजय मधुर, संजय मधुर सावित्री मधुर समेत तमाम लोगों ने शोक व्यक्त किया है। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार रविवार को सुबह नौ बजे लोहरदगा शांति नगर से अंतिम यात्रा कुडू प्रखंड के रूद्र गांव में के लिए निकलेगी। उनका अंतिम संस्कार रूद्र गांव में किया जायेगा।
आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबोले के बयान पर लोहरदगा सांसद का पलटवार एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत ने आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा और आरएसएस पर गंभीर आरोप लगाये। उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोग इस पूरे मामले में दबाव में बयान दे रहे हैं और वास्तविक दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि भाजपा से जुड़े लोग आरएसएस से जुड़े हैं और उन्होंने जो बयान दिए हैं, वे पूरी तरह सरकार के दबाव में दिए गए हैं। वे राम का नाम तो लेते हैं, लेकिन राम से ज्यादा दाम (पैसे) पर भरोसा करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस मामले में निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए थी, उसमें अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनके अनुसार, जिन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए थी और जो इस पूरे प्रकरण के मुख्य दोषी हैं, उन्हें जानबूझकर बचाया जा रहा है। भाजपा उन्हें संरक्षण दे रही है और पाल-पोस रही है। सुखदेव भगत ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि यह कोई एक-दो दिन की घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से योजनाबद्ध और व्यवस्थित तरीके से चलाया गया मामला है। इसलिए इसकी गहन और निष्पक्ष न्यायिक जांच आवश्यक है ताकि पूरे सच का खुलासा हो सके और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जा सके। उन्होंने आगे कहा कि यदि सरकार वास्तव में पारदर्शिता और जवाबदेही में विश्वास करती है, तो जांच किसी एक संस्थान या ट्रस्ट तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। देश के उन सभी धार्मिक स्थलों और ट्रस्टों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जहां भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोगों का नियंत्रण या प्रभाव है। उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति या संगठन को राजनीतिक संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। सांसद ने केंद्र सरकार से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करायी जाये, मुख्य आरोपियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज हो तथा राजनीतिक प्रभाव से ऊपर उठकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाये।
राज अस्पताल ने मरीज राजू कुमार रंजन के इलाज को लेकर जारी किया आधिकारिक स्पष्टीकरण टीम एबीएन, रांची। राज अस्पताल, रांची ने सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल मरीज राजू कुमार रंजन के उपचार को लेकर लगाये जा रहे लापरवाही के आरोपों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। अस्पताल का कहना है कि मरीज का उपचार स्थापित चिकित्सा मानकों के अनुरूप किया गया और चिकित्सकीय टीम ने उसकी जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किये। अस्पताल के अनुसार, राजू कुमार रंजन को 24 मई 2026 को एक गंभीर सड़क दुर्घटना के बाद पॉलीट्रॉमा की स्थिति में भर्ती कराया गया था। अस्पताल ने बताया कि जांच में मरीज के मस्तिष्क में गंभीर रक्तस्राव (एसडीएच और आईवीएच), सिर की गंभीर चोट, गर्दन एवं रीढ़ की हड्डियों में फ्रैक्चर, दोनों फेफड़ों में गंभीर चोट तथा बाएं पैर सहित शरीर के विभिन्न हिस्सों में कई जटिल फ्रैक्चर पाए गए। अस्पताल के मुताबिक, मरीज को तत्काल आईसीयू में भर्ती कर वरिष्ठ न्यूरोसर्जन, आॅर्थोपेडिक सर्जन, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों तथा अन्य विभागों की बहु-विषयक टीम की निगरानी में उपचार शुरू किया गया। बयान में कहा गया है कि इलाज के दौरान समय-समय पर आवश्यक जांचें कराई गईं तथा मरीज की स्थिति के अनुसार वेंटिलेटर सपोर्ट, आईसीयू प्रबंधन, दवाइयां, रक्त आधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन), आॅपरेशन, डिब्राइडमेंट सहित सभी आवश्यक उपचार किये गये। अस्पताल का दावा है कि उपचार के प्रत्येक चरण में मरीज के परिजनों को उसकी स्थिति, संभावित जटिलताओं, उपचार की योजना और उससे जुड़े जोखिमों की जानकारी दी जाती रही तथा नियमित काउंसलिंग की गयी। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उपचार के दौरान मरीज के बायें पैर में गंभीर रक्त संचार अवरोध (वैस्कुलर कॉम्प्रोमाइज), संक्रमण और उससे उत्पन्न जटिलताओं को देखते हुए चिकित्सकों ने पिछले चार दिनों के दौरान कई बार पैर काटने (एम्प्यूटेशन) की सलाह दी थी। अस्पताल का कहना है कि मरीज के परिजनों ने इस प्रक्रिया के लिए सहमति देने से इनकार कर दिया, जिसका उल्लेख अस्पताल के अभिलेखों में दर्ज है। अस्पताल ने अपने बयान में कहा है कि मरीज की वर्तमान गंभीर स्थिति दुर्घटना में लगी गंभीर चोटों और उनसे उत्पन्न चिकित्सीय जटिलताओं का परिणाम है, न कि अस्पताल, चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ या प्रशासन की किसी लापरवाही का। अस्पताल ने लापरवाही के आरोपों को निराधार, तथ्यहीन और उपलब्ध चिकित्सीय अभिलेखों के विपरीत बताया है। राज अस्पताल ने यह भी आरोप लगाया कि उपचार के दौरान मरीज के परिजनों ने अस्पताल परिसर में विरोध-प्रदर्शन और हंगामा किया, जिससे कई घंटों तक अस्पताल की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित हुई और अन्य मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान उत्पन्न हुआ। अस्पताल के अनुसार, इस दौरान ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों का घेराव भी किया गया।अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि उसने परिजनों से कई बार शांतिपूर्ण व्यवहार बनाए रखने और अस्पताल की सेवाओं में बाधा नहीं डालने का अनुरोध किया, लेकिन इसका पालन नहीं किया गया। इसके बावजूद, अस्पताल का दावा है कि मरीज के उपचार में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने दी गयी और चिकित्सकीय टीम लगातार इलाज में जुटी रही। अस्पताल ने यह भी जानकारी दी कि 4 जुलाई को मामले की जांच के लिए सरकारी टीम अस्पताल पहुंची। अस्पताल के अनुसार, जांच के दौरान इलाजरत चिकित्सकों ने जांच दल को पूरा सहयोग दिया तथा मांगे गये सभी दस्तावेज और चिकित्सकीय रिकॉर्ड उपलब्ध कराये।
चलती ट्रेन में गूंजी किलकारी, 25-वर्षीय महिला ने दिया बच्चे को जन्म एबीएन सोशल डेस्क। देवघर जिले के मधुपुर रेलवे स्टेशन के नजदीक 25-वर्षीय एक महिला ने शुक्रवार को एक चलती रेलगाड़ी में बच्चे को जन्म दिया। रेलवे के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। मधुपुर रेलवे स्टेशन के अधीक्षक राज शेखर ने बताया कि फराह नशीन नामक महिला अपने भाई आफताब आलम के साथ हावड़ा-नई दिल्ली पूर्वा एक्सप्रेस के वातानुकूलित डिब्बे में सवार होकर हावड़ा से बिहार के जमुई स्थित अपने मायके जा रही थी। रेलवे अधिकारी ने बताया, नशीन को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। जब उनकी हालत बिगड़ने लगी, तो दूसरे यात्रियों ने उनकी निजता और सुरक्षा का ध्यान रखते हुए कपड़ों से एक अस्थायी आड़ बना दी। उन्होंने बताया कि इसके बाद, कोच अटेंडेंट ने रेलवे नियंत्रण कक्ष को मामले की जानकारी दी, जिसने मधुपुर स्टेशन मास्टर को सूचित किया और यात्री के लिए उचित चिकित्सा सुविधा का प्रबंध करने का निर्देश दिया। स्टेशन मास्टर ने मधुपुर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) को सतर्क किया।अधिकारी ने बताया कि जैसे ही रेलगाड़ी स्टेशन पर रुकी, स्वास्थ्यकर्मी डिब्बे में दाखिल हुए। हालांकि, चलती रेलगाड़ी में ही महिला का सुरक्षित प्रसव हो चुका था। उन्होंने बताया कि चिकित्सा दल ने तुरंत मां और नवजात शिशु को आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान की।अधिकारी ने बताया, मधुपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के पहुंचने पर, आरपीएफ और जीआरपी के अधिकारियों ने चिकित्सा टीम और पैरामेडिक कर्मी के साथ महिला और बच्चे की जांच की और इलाज के लिए दोनों को मधुपुर उपमंडल अस्पताल पहुंचाया।
टीम एबीएन, रांची। इंडियन एसोसिएशन आॅफ लॉयर्स आईएएल झारखंड चैप्टर हॉफमैन लॉ एसोसिएट्स के तत्वावधान में भारतीय संविधान की प्रस्तावना और नागरिक विषय पर एक राज्य स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन करेगा। रविवार पांच जुलाई को आयोजित इस एक दिवसीय सेमिनार में राज्य भर के प्रमुख न्यायविदों को शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। यह कार्यक्रम कामिल बुल्के पथ पुरुलिया रोड स्थित एक्सआईएसएस के सभागार में सुबह 11 बजे आंरभ होगा। इस कार्यक्रम में नागरिक के अधिकार, संविधान के प्रस्तावना, अधिवक्ताओं के कल्याण, संरक्षण और न्याय तक समान पहुंच विषय पर विमर्श किया जायेगा।
झारखंड इंटक महाधिवेशन में संगठन विस्तार का संकल्प टीम एबीएन, रांची। राजधानी रांची स्थित पुराना विधानसभा सभा भवन में शनिवार को झारखंड प्रदेश इंटक महाधिवेशन सह कार्यकारिणी बैठक का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सर्वप्रथम ध्वजारोहण के साथ हुई। इसके उपरांत इंटक के दिवंगत वरिष्ठ नेता स्वर्गीय चंद्रशेखर दुबे को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गयी। इसके बाद दीप प्रज्वलित कर महाधिवेशन का विधिवत शुभारंभ किया गया। उद्घाटन सत्र के पश्चात सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र भेंट कर भव्य स्वागत किया गया। महाधिवेशन में संगठन की मजबूती, मजदूर हितों की रक्षा, सदस्यता विस्तार और श्रमिकों के अधिकारों को लेकर विस्तृत चर्चा की गयी। मौके पर झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, झारखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, इंटक के राष्ट्रीय महासचिव एनजी अरुण, मणिका विधायक रामचंद्र सिंह, कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी, खिजरी विधायक राजेश कच्छप, इंटक प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार बलमुचू, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आर. एन. चौबे, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सच्चिदानंद चौधरी, छोटानागपुर बॉक्साइड एंड कोल वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष निशीथ जायसवाल, अरुण साहू, कुलदीप रवि सहित झारखंड इंटक के सभी पदाधिकारी, विभिन्न जिलों से आये प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित रहे। महाधिवेशन को संबोधित करते हुए इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद धीरज प्रसाद साहू ने कहा कि मजदूरों की सेवा और उनके अधिकारों की रक्षा उनके सार्वजनिक जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने बड़े भाई स्वर्गीय शिव प्रसाद साहू के सपनों को मजदूरों के बीच रहकर आगे बढ़ाने का प्रयास किया है और अब उनका संकल्प इंटक के महान नेता स्वर्गीय चंद्रशेखर दुबे के अधूरे सपनों को पूरा करना है। उन्होंने कहा कि संगठन तभी मजबूत होगा जब हर कार्यकर्ता और हर मजदूर स्वयं को इंटक परिवार का हिस्सा समझे। उन्होंने श्रमिकों से एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि उनके अधिकारों, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा के लिए इंटक का संघर्ष लगातार जारी रहेगा। धीरज प्रसाद साहू ने बैठक की अध्यक्षता कर रहे झारखंड इंटक प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार बलमुचू की सराहना करते हुए कहा कि वे केवल उनके मित्र ही नहीं बल्कि उनके विश्वसनीय सलाहकार भी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में झारखंड इंटक नयी ऊर्जा, नयी सोच और मजबूत संगठनात्मक ढांचे के साथ आगे बढ़ेगा तथा राज्य के प्रत्येक जिले में मजदूरों की आवाज को प्रभावी ढंग से उठायेगा। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने अपने संबोधन में कहा कि मजदूर देश और राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज प्रसाद साहू हमेशा मजदूरों के हितों की लड़ाई लड़ते रहे हैं और राज्य सरकार हर उस प्रयास में उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी जो श्रमिकों के कल्याण के लिए होगा। उन्होंने कहा कि मजदूरों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है तथा उनके हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जायेगा। झारखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का इतिहास श्रमिकों और किसानों के संघर्ष से जुड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि इंटक को जब भी कांग्रेस के सहयोग की आवश्यकता होगी, पार्टी पूरी ताकत के साथ उसके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि धीरज प्रसाद साहू के नेतृत्व में झारखंड इंटक संगठनात्मक रूप से और अधिक सशक्त बनेगा तथा मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा मिलेगी। बैठक के दौरान संगठन के विस्तार, सदस्यता अभियान को तेज करने, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को संगठन से जोड़ने, श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ प्रत्येक श्रमिक तक पहुंचाने तथा औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों की समस्याओं के समाधान को लेकर विस्तार से चर्चा की गयी। वक्ताओं ने कहा कि इंटक आने वाले समय में राज्य के प्रत्येक जिले में संगठन को मजबूत करते हुए मजदूरों की आवाज को और बुलंद करेगा। महाधिवेशन के अंत में सभी नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकतार्ओं ने एकजुट होकर संगठन को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाने तथा श्रमिकों के अधिकार, सम्मान और हितों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन संगठन की एकजुटता, मजदूर हितों के प्रति प्रतिबद्धता और झारखंड में इंटक को और अधिक मजबूत बनाने के संकल्प के साथ हुआ।
जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा कान्क्लेव- 2026 में भाषा संरक्षण, संवर्धन एवं उच्च शिक्षा के विकास पर हुआ व्यापक मंथन टीम एबीएन, रांची। रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत मंडप में शनिवार को आयोजित जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा कांक्लेव- 2026 का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन संयोजक एवं पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कांक्लेव में झारखंड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन, उच्च शिक्षा, शोध, रोजगार, डिजिटल विकास तथा नयी शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में लगभग 4000 छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों, भाषाविदों, साहित्यकारों, प्राध्यापकों, सहायक प्राध्यापकों, शिक्षकों, विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्रतिनिधियों तथा भाषा प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान झारखंड की भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता की जीवंत झलक देखने को मिली। कार्यक्रम का शुभारंभ झारखंड की पारंपरिक संस्कृति के अनुरूप नगाड़ा बजाकर एवं पारंपरिक विधि-विधान के साथ किया गया, जबकि कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ गरिमामय वातावरण में हुआ। मौके पर रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) सरोज शर्मा, डीएसडब्ल्यू प्रो. (डॉ.) सुदेश साहू, कोलेबिरा के विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी, संयोजक एवं पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की सहित झारखंड की नौ जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के विद्वान, साहित्यकार, शिक्षाविद, शोधार्थी एवं भाषा प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कांक्लेव के विभिन्न सत्रों में वक्ताओं ने कहा कि मातृभाषाएं केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की संस्कृति, इतिहास, परंपरा और पहचान की आधारशिला हैं। इनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सरकार, विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और समाज के सभी वर्गों को मिलकर कार्य करना होगा। विशेषज्ञों एवं विद्वानों ने सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे। इनमें जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षकों के रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति, विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में विभागों को सुदृढ़ करना, उच्च शिक्षा एवं शोध को बढ़ावा देना, डिजिटल अध्ययन सामग्री एवं ई-लर्निंग संसाधनों का विकास, लोक साहित्य एवं सांस्कृतिक धरोहर का दस्तावेजीकरण तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से भाषाओं के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार जैसे सुझाव प्रमुख रहे। कांक्लेव में उपस्थित सभी विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं ने राज्य सरकार से यह भी आग्रह किया कि जिन जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विषयों को क्लस्टर सिस्टम के नाम पर स्नातक नामांकन सूची से बाहर कर दिया गया है, उन्हें पुन: नामांकन प्रक्रिया में शामिल किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सके तथा इन भाषाओं के अस्तित्व, अध्ययन और विकास को नयी गति मिल सके। इसके साथ ही वक्ताओं ने नयी रूप से लागू करने तथा जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को रोजगार, शोध और तकनीकी विकास से जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं भाषा प्रेमियों ने जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन, प्रचार-प्रसार तथा भावी पीढ़ियों तक उनके प्रभावी हस्तांतरण के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया। जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा कांक्लेव- 2026 झारखंड की भाषाई एवं सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक पहल साबित हुआ।
हिमांशु सिंह की निर्मम हत्या हेमंत सरकार की ध्वस्त कानून-व्यवस्था का सबसे भयावह उदाहरण : आदित्य साहू एबीएन न्यूज नेटवर्क, जमशेदपुर। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने जमशेदपुर के हरिओम नगर, आदित्यपुर स्थित दिवंगत हिमांशु सिंह के आवास पहुंचकर शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना देते हुए इस हृदयविदारक घटना पर गहरा दु:ख व्यक्त किया। आदित्य साहू ने कहा कि विगत दिनों जमशेदपुर में पुलिस की मौजूदगी में हिमांशु सिंह की निर्मम हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। पुलिस की मौजूदगी में दिनदहाड़े एक युवक हिमांशु सिंह की निर्मम हत्या होना हेमंत सोरेन सरकार की ध्वस्त कानून-व्यवस्था का सबसे भयावह उदाहरण है। वहीं इस घटना में एक अन्य युवक कलकत्ता में जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहा है। जब अपराधी पुलिस के सामने ही हत्या कर फरार हो जायें, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि झारखंड में अपराधियों के मन से कानून का भय समाप्त हो चुका है। ऐसी घटनाएं राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती हैं। इस घटना ने यह भी साबित किया है कि झारखंड में पुलिस-प्रशासन की नहीं बल्कि अपराधियों की समानांतर सरकार चल रही है। राज्य सरकार पूरी तरह सो रही है। दौरे के दौरान प्रदेश अध्यक्ष से स्थानीय नागरिकों एवं क्षेत्रवासियों ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्हें राज्य सरकार और वर्तमान जांच प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है। उन्होंने इस जघन्य हत्याकांड की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच के लिए झारखंड उच्च न्यायालय के माध्यम से जनहित याचिका दायर कर सीबीआई जांच जांच की मांग की, ताकि पूरे मामले का सच सामने आये और दोषियों के साथ-साथ किसी भी स्तर पर लापरवाही बरतने वालों पर भी कठोर कार्रवाई हो सके। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा परिवार भी इस मांग का पूर्ण समर्थन करता है और हम मानते हैं कि स्वर्गीय हिमांशु सिंह एवं उनके परिवार को न्याय दिलाने के लिए इस मामले की सीबीआई जांच आवश्यक है। इस मामले को लेकर प्रारंभ से ही जिस प्रकार स्थानीय पुलिस-प्रशासन और राज्य सरकार की मंशा दिखी है, उसे देखते हुए सीबीआई जांच ही मामले में दूध का दूध और पानी का पानी कर सकती है। आदित्य साहू ने कहा कि आखिर पुलिस के सामने अपराधियों की इतनी हिम्मत कहां से आ गयी? पुलिस की कमर में जो पिस्टल है, क्या वह सिर्फ शो के लिए उन्हें दी गयी है? पुलिस केवल हवाई फायरिंग भी करती तो अपराधियों में दहशत होता लेकिन पुलिस मूकदर्शक बनी रही। कहा जा सकता है कि पुलिस की संरक्षण में, पुलिस की मिलीभगत से अपराधियों ने इस घटना को अंजाम दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा फिर यह मांग दोहराती है कि घटना के समय मौजूद पुलिसकर्मियों पर सरकार द्वारा 302 का मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाये ताकि फिर से कोई पुलिसकर्मी अपने दायित्व से भागने की हिम्मत नहीं कर सके। प्रशासन के लोग दूसरे पर 302 मुकदमा दर्ज कर मामले को डायवर्ट करना चाहते हैं। यह रवैया अनुचित है। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने, शोकाकुल परिवार को शक्ति देने और इलाजरत युवक के जल्द स्वस्थ होने की भी कामना की। इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही, प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी, प्रदेश मंत्री शैलेंद्र सिंह, द्वय प्रदेश प्रवक्ता अभय सिंह, प्रकाश सिंह, जिला अध्यक्ष हरेकृष्ण प्रधान, संजीव सिन्हा, आदित्यपुर के महापौर संजय सरदार सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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