भू-धंसान और ई-मेगा प्रोजेक्ट के विरोध में 27 सितंबर को सत्याग्रह कतरास कोयलांचल बचाओ समिति ने भरी हुंकारएबीएन न्यूज नेटवर्क, कतरास। लगातार हो रहे भू-धंसान और प्रस्तावित ई-मेगा प्रोजेक्ट के विरोध में कतरास कोयलांचल बचाओ समिति ने आंदोलन का ऐलान कर दिया है। शुक्रवार को भारतीय क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में समिति के सदस्यों ने कहा कि कोयलांचल में बढ़ते भू-धंसान से लोगों के सामने घर-बार छोड़कर पलायन का संकट खड़ा हो गया है।समिति के सदस्यों ने बिना नाम लिए कहा कि पिछले 17 वर्षों से क्षेत्र में एकछत्र राजनीतिक प्रभाव रहा, लेकिन आज जब लोग आपदा के बीच खड़े हैं, तो उन्हें संबंधित नेतृत्व की मौजूदगी और सक्रिय हस्तक्षेप का इंतजार है। समिति ने कहा कि अब स्थानीय लोग अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे और भू-धंसान तथा विस्थापन के मुद्दे पर निर्णायक संघर्ष किया जाएगा।समिति ने बीसीसीएल प्रबंधन और प्रशासन से अविलंब अवैध कोयला खनन पर रोक लगाने, भू-धंसान प्रभावित क्षेत्रों एवं भूमिगत खदानों में बालू भराई कराने तथा भूमिगत खदानों का सर्वे कराकर वैज्ञानिक तरीके से खनन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।इन मांगों को लेकर 27 सितंबर 2026 को कतरास थाना चौक स्थित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के समक्ष एक दिवसीय सत्याग्रह आंदोलन किया जाएगा।समिति ने कहा कि भू-धंसान की घटनाएं केवल जमीन धंसने का मामला नहीं हैं, बल्कि इससे लोगों की सुरक्षा, आवास और भविष्य सीधे प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन को तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए।प्रेस वार्ता में अशोक प्रकाश लाल, प्रभात मिश्रा, विनय सिंह, नवदीप गुप्ता, सुदाम गिरी, डॉ. विनोद गोस्वामी, राजेंद्र प्रसाद राजा, जावेद रजा, राजीव रंजन मिश्रा, शंकर चौहान, उमेश ऋषि, बाबू वर्मन, नवल किशोर सिंह, रणवीर सिंह, मो. बंटी समेत अन्य लोग मौजूद थे।
धनबाद : बांसजोड़ा कोलियरी ऑफिस में मुख्य दरवाजे पर तीन नंबर बंगला के ग्रामीणों का कड़ा विरोध प्रदर्शनएबीएन न्यूज नेटवर्क, लोयाबाद (धनबाद)। बांसजोड़ा कोलियरी ऑफिस में मुख्य दरवाजे पर तीन नंबर बंगला के ग्रामीणों का कड़ा विरोध प्रदर्शन। बिजली बहाल करने को लेकर घंटों भर तक चला हाई वोल्टेज ड्रामा ग्रामीणों का कहना है विश्वकर्मा पूजा के दिन हमलोगों का ट्रांसफार्मर चोरी हो गया था।प्रबंधक कमलेश कुमार का बयान इसी पोल से लोयाबाद तीन नंबर मोहल्ले के लोगों को बिजली दी जाएगी। बारिश के कारण आज कनेक्शन नहीं जोड़ा गया।यह बीसीसीएल की बिजली है किसी ग्रामीण की नही।आजतक हमलोगों को बिजली मुहैय्या नहीं हो सका, बच्चों को पढ़ने लिखने में और बरसाती उमस भरी गर्मी से बेहाल है। न दिन को चैन है न रात को, आज बीसीसीएल के उदासीन रवैया के ख़िलाफ़ पूरा मोहल्ला विरोध कर रहे है। शांति देवी, नागो देवी, चानमुनि भारती, समरी देवी, रोहित कुमार, उपेंद्र कुमार, मनीष कुमार, प्रेम कुमार सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद थे।वहीं बीसीसीएल कर्मी बांसजोड़ा कोलियरी के बगल में बसे 5 नंबर न्यू बस्ती के बिजली पोल से लाइन ले रहे थे। तभी वहां के महिला ग्रामीण उग्र हो गई। बीसीसीएल कर्मी पर भड़क गई, कहा जब हमलोग डेढ़ महीना से बिजली नहीं था तो हम किससे मांगने गए थे।विरोध के कारण लाइन लेने नहीं दिया गया। ग्रामीणों का कहना है आपको जहां से लाइन देना है दीजिए या नया ट्रांसफार्मर लगवा दीजिए। 5 नंबर न्यू बस्ती की आशा देवी कारी देवी बसंती देवी शगुनवा देवी हेमामलानी देवी गणेश मंडल आदि दर्जनों महिला पुरुष शामिल थे।
कतरास में FIR पर सियासत गरम! धरने के बाद कांग्रेस नेता अशोक प्रकाश लाल नामजदशिकायत को लेकर शुरू हुआ विवाद सड़क पर पहुंचा, थाना चौक पर धरना और जाम के बाद पुलिस कार्रवाईनेता बोले- गिरफ्तारी से नहीं डरता, कोयला चोरी का विरोध करता रहूंगाएबीएन न्यूज नेटवर्क, कतरास। अवैध खनन के विरोध में शिकायत दर्ज कराने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस प्राथमिकी और राजनीतिक बयानबाजी तक पहुंच गया है। कतरास थाना चौक पर 24 सितंबर को हुए धरना-प्रदर्शन और सड़क जाम के मामले में कांग्रेस नेता अशोक प्रकाश लाल को भी नामजद किए जाने के बाद क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। इस घटनाक्रम को लेकर जहां पुलिस प्राथमिकी में दर्ज आरोपों के आधार पर कार्रवाई की बात कर रही है, वहीं अशोक प्रकाश लाल ने इसे कोयला चोरी के खिलाफ उठाई गई आवाज से जोड़ते हुए कहा है कि वह गिरफ्तारी से नहीं डरते और विरोध जारी रखेंगे।मामले की शुरुआत वार्ड संख्या-05 की पार्षद निरूपमा देवी द्वारा अवैध खनन के संबंध में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश से जुड़ी बताई जा रही है। आरोप है कि शिकायत देने को लेकर थाना स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद समर्थकों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ी और मामला कतरास थाना चौक तक पहुंच गया।थाना चौक पर जुटी भीड़, सड़क जाम का आरोपपुलिस की लिखित शिकायत के अनुसार, 24 सितंबर को पार्षद निरूपमा देवी के नेतृत्व में करीब 90 से 100 लोग कतरास थाना चौक पर जुटे थे। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान सड़क पर सब्जी-फल की ट्रे लगाकर करीब दो घंटे तक आवागमन बाधित किया गया। पुलिस के अनुसार, इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई और यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। ताजा प्रकाशित रिपोर्टों में भी थाना चौक पर प्रदर्शन, सड़क जाम और पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हटाकर आवागमन बहाल कराने का उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक मौके पर कतरास थाना प्रभारी प्रवीण कुमार, धर्माबांध ओपी के प्रभारी धीरज कुमार और रामकनाली ओपी प्रभारी अलिशा कुमारी अग्रवाल पुलिस बल के साथ पहुंचे थे। पुलिस का कहना है कि मामले में कानून-व्यवस्था और यातायात बाधित होने से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। हालांकि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों का अंतिम सत्यापन जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।अशोक लाल बोले- कोयला चोरी, भू धसान के खिलाफ आवाज जारी रहेगीकांग्रेस नेता अशोक प्रकाश लाल का कहना है कि वह कोयला चोरी, भू धसान के विरोध और स्थानीय लोगों की शिकायत को लेकर धरने में शामिल हुए थे। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य शिकायत दर्ज कराना और संबंधित मामले में कार्रवाई की मांग करना था। अशोक लाल ने कहा है- गिरफ्तारी से नहीं डरता, कोयला चोरी का विरोध करता रहूंगा।उनके समर्थकों का कहना है कि यदि किसी नागरिक या जनप्रतिनिधि की शिकायत को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाई गई थी, तो उसके बाद FIR में नामजदगी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। वहीं पुलिस का पक्ष यह है कि कार्रवाई प्रदर्शन के दौरान सामने आए कथित कानून-व्यवस्था और सड़क जाम से जुड़े आरोपों के आधार पर की जा रही है।मामला सिर्फ FIR का नहीं, दो शिकायतों का भीइस पूरे विवाद का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग शिकायतें दी गई हैं। एक पक्ष ने मारपीट, गाली-गलौज, धमकी और अन्य आरोप लगाए हैं, जबकि दूसरे पक्ष की ओर से भी महिला के साथ कथित दुर्व्यवहार और मारपीट की शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। कतरास थाना प्रभारी ने दोनों पक्षों की शिकायत मिलने और जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है। ऐसे में पूरे मामले को केवल राजनीतिक विवाद के रूप में देखना फिलहाल जल्दबाजी होगी। शिकायतों की जांच महत्वपूर्ण है, तो दूसरी ओर सड़क जाम और प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था के नियमों के उल्लंघन के आरोपों की भी पुलिस जांच जरूरी है।अब जांच पर टिकी नजरकतरास में हाल के दिनों में भू-धंसान को लेकर पहले से ही लोगों में नाराजगी है। 24 सितंबर को भी क्षेत्र में भू-धंसान के विरोध में व्यापक बंद और प्रदर्शन हुआ था। ऐसे माहौल में थाना चौक के प्रदर्शन पर दर्ज FIR ने विवाद को नया राजनीतिक रंग दे दिया है।अब निगाहें पुलिस जांच पर हैं—क्या FIR में लगाए गए आरोपों के पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं, क्या दोनों पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो पाती है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि कतरास में विरोध से शुरू हुआ विवाद अब FIR बनाम आंदोलन की बहस में बदल चुका है।
धनबाद : तोपचांची में कतरी नदी पर अवैध पुल का खेल!जांच टीम के सामने हंगामा, किसकी शह पर चल रहा माइंस-क्रशर?कतरी नदी पर कथित अवैध पुल की जांच करने पहुंची जिला परिषद उपाध्यक्षक्रेसर संचालक पर डराने-धमकाने का आरोपएबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। तोपचांची प्रखंड के कालाझार में पत्थर क्रेसर और खदान से जुड़ी शिकायत की जांच करने पहुंची जिला परिषद की उपाध्यक्ष सरिता देवी को कथित तौर पर डराने-धमकाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि क्रेसर संचालक और उसके कुछ सहयोगियों ने जांच के दौरान जिला परिषद उपाध्यक्ष सरिता देवी और गिरिडीह सांसद प्रतिनिधि सुभाष रवानी से उलझने की कोशिश की। इसके बाद मौके पर माहौल बिगड़ गया और जांच की कार्रवाई प्रभावित हुई।मामला कतरी नदी पर कथित अवैध पुल निर्माण और पत्थर खदान में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों के उल्लंघन से जुड़ी शिकायत का है। जिला परिषद उपाध्यक्ष सरिता देवी ने इस संबंध में लिखित शिकायत की थी। शिकायत के बाद प्रशासन की ओर से मामले की जांच के लिए एक कमिटी गठित की गई थी।जांच के लिए मौके पर पहुंची थी कमिटीशुक्रवार को जांच कमिटी कालाझार स्थित संबंधित क्षेत्र में पहुंची। कमिटी में DMO राकेश तिग्गा, तोपचांची CO नूपुर कुमारी समेत अन्य अधिकारी शामिल थे। जिला परिषद उपाध्यक्ष सरिता देवी भी कमिटी की सदस्य के रूप में मौके पर पहुंचीं।बताया गया कि जांच के दौरान क्रेसर संचालक और उसके कुछ सहयोगियों की ओर से सरिता देवी और सांसद प्रतिनिधि सुभाष रवानी के साथ बहस की स्थिति बन गई। आरोप है कि उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया गया। इसके बाद मौके पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई और जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई।हालात बिगड़ने के बाद जिला परिषद उपाध्यक्ष को मौके से लौटना पड़ा। मामले में अब यह सवाल उठ रहा है कि जिस शिकायत की जांच के लिए प्रशासनिक कमिटी गठित की गई थी, उसी जांच के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष के प्रतिनिधि को ही कथित तौर पर विरोध और धमकी का सामना क्यों करना पड़ा।कतरी नदी पर कथित अवैध पुल का भी मुद्दाशिकायत का एक प्रमुख बिंदु कतरी नदी पर कथित तौर पर बनाए गए पुल से जुड़ा है। आरोप है कि नदी में ओबी पत्थर और सीमेंट के पाइप डालकर रास्ता बनाया गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इस निर्माण में पर्यावरणीय नियमों का पालन नहीं किया गया।कतरी नदी धनबाद के कोयलांचल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत मानी जाती है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नदी से आसपास की बड़ी आबादी की आजीविका जुड़ी हुई है और इसका स्थानीय जैव-विविधता पर भी असर पड़ता है।मामले में अब प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नदी पर निर्माण नियमों के अनुरूप है या नहीं और खदान-क्रेसर संचालन में NGT अथवा अन्य पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।वहीं, जिला परिषद उपाध्यक्ष के साथ कथित तौर पर डराने-धमकाने की घटना को लेकर भी कार्रवाई की मांग उठ रही है। क्रेसर संचालक या संबंधित पक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया फिलहाल सामने नहीं आई है।
धनबाद : बाघमारा क्षेत्र के तालाबों में गहरे गड्ढे, पंचायतों में सुरक्षा उपकरण नदारद; 14 वर्षीय बच्ची के डूबने के बाद उठे सवालपरिजन की चीख पुकार, माँ बेहोश, भाई बार बार तालाब की और दौड़ लगा अपनी बहन को निकालने की कोशिश करता हुआ, ग्रमीणों की आँखे नमएबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। बाघमारा क्षेत्र के झींझीपहाड़ी पंचायत अंतर्गत बूढ़ा बाबा मंदिर के समीप स्थित तालाब में नहाने के दौरान 14 वर्षीय शीतल कर्मकार, पिता लाला कर्मकार, के गहरे पानी में डूबने की घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में आपदा एवं सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।स्थानीय लोगों के अनुसार, शीतल तालाब में नहाने गई थी। इसी दौरान वह गहरे पानी में चली गई और डूब गई। घटना के बाद ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों की सफाई और जल संरक्षण के नाम पर गहरी खुदाई तो कराई जा रही है, लेकिन ऐसे जलाशयों के आसपास सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है।बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में सरकारी स्तर पर कई तालाबों की सफाई तथा जल संरक्षण के लिए तालाबों की गहराई बढ़ाने का काम कराया गया है। कुछ स्थानों पर तालाबों में 10 से 15 फीट तक गहरे हिस्से बनाए गए हैं। ऐसे में तालाबों के आसपास चेतावनी बोर्ड, सुरक्षित स्नान क्षेत्र, रस्सी, सीढ़ी, लाइफ जैकेट और तत्काल बचाव के लिए जरूरी उपकरणों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।पंचायत भवनों में आपदा प्रबंधन किट क्यों नहीं?ग्रामीणों का कहना है कि पंचायतों को गांव की स्थानीय सरकार के रूप में मजबूत करने की बात लंबे समय से कही जाती रही है, लेकिन किसी आपात स्थिति में तत्काल बचाव के लिए पंचायत स्तर पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं या नहीं, इसकी नियमित समीक्षा जरूरी है।तालाब में किसी बच्चे या ग्रामीण के डूबने, आग लगने, कुएं में गिरने अथवा किसी अन्य दुर्घटना की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ग्रामीण इलाकों में घटनास्थल से शहरी क्षेत्र के अस्पताल या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम तक पहुंचने में समय लग सकता है। ऐसे में पंचायत स्तर पर प्राथमिक बचाव उपकरण उपलब्ध रहने से तत्काल राहत कार्य शुरू किया जा सकता है।ग्रामीणों का सवाल है कि यदि पंचायत भवनों को स्थानीय प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, तो वहां रेस्क्यू रस्सी, सीढ़ी, लाइफ जैकेट, टॉर्च, फर्स्ट-एड किट, स्ट्रेचर और अन्य आवश्यक आपदा प्रबंधन उपकरण उपलब्ध कराने की व्यवस्था क्यों नहीं की जाती?करोड़ों की योजनाओं के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर भी हो ध्यानग्रामीण क्षेत्रों में विकास और जल संरक्षण पर बड़ी राशि खर्च की जा रही है। ऐसे में ग्रामीणों की मांग है कि तालाबों की सफाई और गहरीकरण के साथ-साथ सुरक्षा को भी योजना का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए।विशेषज्ञ स्तर पर भी किसी जलाशय में गहराई बढ़ाने के साथ उसके आसपास सुरक्षा संकेतक, बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और आपातकालीन बचाव व्यवस्था पर ध्यान देना महत्वपूर्ण माना जाता है।शीतल के तालाब में डूबने की घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि क्या ग्रामीण विकास योजनाओं में सुरक्षा व्यवस्था को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जा रही है, जितनी निर्माण और जल संरक्षण को?ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जिले की सभी पंचायतों में आपदा प्रबंधन एवं प्राथमिक बचाव उपकरणों की उपलब्धता की जांच कराई जाए। साथ ही तालाबों में गहरी खुदाई वाले स्थानों को चिन्हित कर वहां चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग और जरूरत के अनुसार सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं में तत्काल बचाव संभव हो सके।
मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड रांची द्वारा प्रायोजित लघु उत्पादन इकाई योजना के डोमचांच क्राफ्ट लघु वुडेन फर्निचर का उद्घाटन एबीएन न्यूज नेटवर्क, डोमचांच/ कोडरमा। डोमचांच प्रखंड क्षेत्र के बंगाईकला में दिन शुक्रवार को मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड, रांची द्वारा प्रायोजित योजना के तहत वुड क्राफ्ट लघु उत्पादन इकाई का उद्घाटन मुख्य अतिथि डोमचांच प्रमुख डॉ सतनारायण यादव फीता काटकर व दीप प्रज्वलित कर किया गया। उद्घाटन कार्यक्रम में मुखिया प्रतिनिधि धर्मेंद्र यादव, युवा समाज सेवी मनोज रजक, जिला उद्यमी समन्वयक श्रीश पति त्रिपाठी मौजूद थे। उद्घाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रमुख डॉ. सत्यनारायण ने कहा कि डोमचांच वुडन फर्नीचर का उद्घाटन होने से के लोगों को रोजगार का नया अवसर मिलेगा तथा क्षेत्र में भी इसका व्यापक फायदा होगा। डोमचांच वुडेन फर्नीचर लघु उत्पादन इकाई में कुल 55 सदस्य हैं। मुख्यमंत्री लघु कुटीर बोर्ड द्वारा उऋउ में काष्ठ कला संबंधित मशीन दी गयी है। उद्घाटन कार्यक्रम को मुखिया प्रतिनिधि धर्मेंद्र यादव ने कहा कि हमारे काराखूट पंचायत के लिए बहुत ही गर्व की बात है कि मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड रांची द्वारा प्रायोजित योजना के तहत डोमचांच वुडेन फर्नीचर का उद्घाटन आज हुआ है जो यहां के लोगों को हुनरबंद बनाकर रोजगार का अवसर प्रदान करेगा तथा क्षेत्र के लिए भी इसका व्यापक फायदा नजर आएगा। समाज सेवी मनोज रजक ने कहा कि झारखंड सरकार का धन्यवाद करते हैं कि इस उद्योग के लगने से यहां के लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे क्षेत्र में बहुमुखी विकास होगा। बता दे की मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड द्वारा स्थापित लघु उत्पादन इकाई सीएफसी भवन में 30 शिल्पकारों को 25 दिन का प्रशिक्षण दिया गया तथा शिल्पकारों को अध्ययन भ्रमण के लिए वूड एक्सपो कोलकाता ले जाकर वहां पर तकनीक को बारीकी से दिखाया गया ताकि उन्हें आधुनिकता के दौर में लाया जा सके। वही जिला उद्यमी समन्वयक श्रीश पति त्रिपाठी ने कहा कि सीएफसी सदस्यों के द्वारा यहां काम करने से उन्हें वर्क आर्डर वुड क्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग सेंटर में गांव का नाम होगा तथा और अधिकार को बढ़ावा मिलेगा विभिन्न जिला व राज्य स्तरीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर में प्रदर्शनी लगाने का अवसर मिलेगा।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएफसी के अध्यक्ष सुभाष राणा ने कहा कि सीएफसी भवन बन जाने से हम सभी उद्यमियों को अपने उद्योग को सामूहिक रूप से उत्पादन में बढ़ावा मिलेगा तथा ज्यादा से ज्यादा उत्पादन एक ही केंद्र पर हो पायेगा। वही कार्यक्रम का संचालन प्रखंड उद्यमी समन्वयक लेखराज कुमार द्वारा किया गया। मौके पर प्रखंड उद्यमी समन्वयक डोमचांच आशुतोष कुमार सिन्हा, मनोरंजन कुमार शर्मा अभिषेक कुमार अविनाश मिश्रा के अलावा अगल-बगल के लोग मौजूद रहे।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, झुमरी तिलैया। भारतीय जनता पार्टी कोडरमा जिला के झुमरी तिलैया उत्तरी मंडल की ओर से शुक्रवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम शाम 4 बजे भाजपा जिलाध्यक्ष अनूप जोशी के कार्यालय में आयोजित हुआ। कार्यक्रम की शुरूआत पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। इस दौरान उपस्थित कार्यकतार्ओं ने उनके जीवन, विचारों और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के संकल्प को याद किया। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष अनूप जोशी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान को सबसे अधिक महत्व दिया। उनका अंत्योदय का विचार आज भी हम सभी को सेवा और जनकल्याण के लिए प्रेरित करता है। उनके बताए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों में राष्ट्रसेवा, समाज के प्रति संवेदनशीलता और अंतिम व्यक्ति तक विकास की भावना प्रमुख थी। उनके विचार आज भी कार्यकतार्ओं को समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित होकर काम करने की प्रेरणा देते हैं। कार्यक्रम में जिला कार्यालय मंत्री हरी पंडित,विनोद सिनहा,महादेव दास,पूर्व जिला मीडिया प्रभारी चंद्रशेखर जोशी,मण्डल अध्यक्ष इंद्रदेव वर्णवाल,मण्डल महामन्त्री पप्पू भदानी, साकेत सिंह,राजेश वर्मा,लक्ष्मी वर्णवाल,सचिन कपसीमें,अंकित गुप्ता,अशोक वर्मा ऋषभ सुरोलिया ,ज्योति पहाड़ी,अरविंद कुमार,शंकर मोदी भाजपा के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम कोडरमा जिला के सभी मण्डलों में मनाया गया ।सभी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने और समाज के हित में लगातार कार्य करने का संकल्प लिया।
आॅपरेशन सतर्क के तहत आरपीएफ की कार्रवाई एबीएन न्यूज नेटवर्क, पलामू। जपला रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने आॅपरेशन सतर्क के तहत चेकिंग अभियान के दौरान 128 बोतल झारखंड निर्मित देसी शराब बरामद की है। बरामद शराब की कुल मात्रा 30.1 लीटर और अनुमानित कीमत 5,760 रुपये बताई गई है।आरपीएफ के अनुसार, 24 सितंबर को जपला स्टेशन पर एसीपी की रोकथाम, ज्वलनशील पदार्थों की जांच, आपराधिक गतिविधियों की निगरानी और अवैध शराब तस्करी के विरुद्ध चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान बरवाडीह-डेहरी आॅन सोन सवारी गाड़ी संख्या 53357 अप के जपला स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या तीन पर पहुंचने के बाद सामान्य कोच संख्या EC-104635 में जांच की गई। जांच के दौरान आगे वाले गेट के पास सीट के नीचे एक सफेद रंग की प्लास्टिक बोरी लावारिस हालत में मिली। यात्रियों से पूछताछ करने पर किसी ने बोरी पर अपना दावा नहीं किया। आरपीएफ ने बोरी को कब्जे में लेकर स्टेशन पर गवाहों की मौजूदगी में खोला।इसमें 60 बोतल (200 टछ) छबीली देसी शराब, 45 बोतल (300 टछ) टनाका देसी शराब और 23 बोतल (200 टछ) रसीली टाइट देसी शराब मिली। सभी बोतलों पर For Sale in Jharkhand Only अंकित था। आरपीएफ ने शराब को जब्त कर अग्रिम कानूनी कार्रवाई के लिए उत्पाद अधीक्षक, पलामू को भेजने की प्रक्रिया शुरू की है। कार्रवाई में उप निरीक्षक रामनरेश राम, प्रधान आरक्षी राजनाथ, आरक्षी मो। कबीर खान और आरक्षी होरी प्रसाद शामिल रहे।
विश्वास में दृढ़ता, प्रेम में प्रकाश और सेवा में एकजुटता का संदेश टीम एबीएन, रांची। काउंसिल आॅफ काथलिक विमेन आॅफ इंडिया (सीसीडब्ल्यूआई) का 26वां राष्ट्रीय सम्मेलन गुरुवार को रांची स्थित जेवियर इंस्टीट्यूट आॅफ सोशल सर्विस (आईएसएस) में शुरू हुआ। चार दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का विषय है- आज की महिलाएं : विश्वास में दृढ़ जड़ें, प्रेम में प्रकाशमान और सेवा में एकजुट। देश के विभिन्न भागों से आई काथलिक महिला प्रतिनिधियां इस सम्मेलन में भाग ले रही हैं। सम्मेलन का उद्देश्य महिलाओं को अपने विश्वास में दृढ़ बनाने, उनके मानवीय एवं सामाजिक योगदान को प्रोत्साहित करने तथा कलीसिया और समाज की सेवा में उनकी सक्रिय भागीदारी को और मजबूत करना है। सम्मेलन का उद्घाटन पवित्र यूखरिस्त समारोह के साथ हुआ। रांची के महाधर्माध्यक्ष आर्चबिशप विन्सेंट आइंद मुख्य याजक थे। खूंटी के बिशप विनय कंडुलना, सीबीसीआई के डिप्टी जनरल सेक्रेटरी फादर मैथ्यू कोझिकल, फादर बिशु बेंजामिन आइंद तथा फादर जॉन बरला सह-याजक के रूप में सहभागी हुए। समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए महिला प्रतिनिधि, धर्मगुरु, धर्मबहनें तथा आमंत्रित अतिथि उपस्थित थे। अपने प्रवचन में आर्चबिशप विन्सेंट आइंद ने सुसमाचार में वर्णित राजा हेरोद का उल्लेख करते हुए कहा कि येसु के कार्यों और चमत्कारों के बारे में सुनकर हेरोद भयभीत हो गया था। बाहरी रूप से शक्तिशाली दिखाई देने के बावजूद वह भीतर से अशांत था। उन्होंने कहा कि जब अंत:करण सत्य से दूर और अशुद्ध हो जाता है, तब मनुष्य के भीतर शांति नहीं रहती। इसके विपरीत, येसु सत्य, प्रेम और शांति का संदेश देते हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपने अंत:करण को शुद्ध रखने, सत्य को स्वीकार करने, ईश्वरीय विश्वास में गहराई से जुड़े रहने तथा नि:स्वार्थ भाव से मानवता की सेवा करने का आह्वान किया। आर्चबिशप ने कहा कि महिलाओं को ईश्वरीय विश्वास में गहराई से जड़ें जमाते हुए स्वयं प्रकाशमान बनना और उस प्रकाश से मानवता की सेवा करना चाहिए। सीबीसीआई के डिप्टी जनरल सेक्रेटरी फादर मैथ्यू कोझिकल ने भी सम्मेलन को संबोधित किया और महिलाओं की भूमिका तथा कलीसिया के जीवन में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीषा टोपनो ने अतिथियों एवं देश के विभिन्न हिस्सों से आये महिला प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने स्थापना की अवधारणा, उसकी गतिविधियों और सेवा-कार्यों की जानकारी देते हुए सम्मेलन के विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर उउहक की विभिन्न गतिविधियों पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म प्रस्तुत की गयी। अतिथियों ने सम्मेलन के स्मारिका का भी विमोचन किया। सम्मेलन के माध्यम से महिलाओं को अपनी इसाई पहचान और आध्यात्मिक जड़ों से जुड़े रहते हुए प्रेम, करुणा और सेवा की भावना के साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सम्मेलन में इस बात पर भी जोर दिया जा रहा है कि महिलाएँ परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ कलीसिया, समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी सक्रिय एवं रचनात्मक भूमिका निभायें। इस राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी संयुक्त रूप से राँची, जमशेदपुर, गुमला, खूंटी, सिमडेगा और डाल्टनगंज धर्मप्रांतों के डायोसिसन महिला संघों द्वारा की जा रही है। सम्मेलन में विभिन्न धर्मप्रांतों की महिला समितियां और स्थानीय सहयोगी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। चार दिनों तक चलने वाला यह सम्मेलन देशभर की काथलिक महिलाओं को एक साझा मंच प्रदान कर रहा है, जहां वे अपने विश्वास, अनुभव, चुनौतियों और सेवा-कार्यों को साझा करते हुए भविष्य की दिशा पर सामूहिक रूप से विचार करेंगी। सम्मेलन का उद्देश्य महिलाओं में विश्वास, प्रेम, एकता और सेवा की भावना को नयी ऊर्जा प्रदान करना है।
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