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17 से रांची में भी लगेगा राष्ट्रीय पुस्तक मेला
Published / 2025-01-13 20:59:30
17 से रांची में भी लगेगा राष्ट्रीय पुस्तक मेला

17 जनवरी से रांची में लगेगा राष्ट्रीय पुस्तक मेला, तैयारियां शुरू; उपलब्ध होंगी ये पुस्तकेंटीम एबीएन, रांची। झारखंड की शैक्षिक एवं सांस्कृतिक नगरी रांची के जिला स्कूल मैदान में बीते रविवार को भूमि पूजन के साथ लगने वाले 10 दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेला की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गयी है। यहां 17 से 26 जनवरी, 2025 तक नये वर्ष में सजेगी अक्षरों की दुनिया और उत्सवों की धूम रहेगी। यहां एक ही छत के नीचे हर आयु वर्ग के पाठकों के लिए हिन्दी, अंग्रेजी की बेइंतहा पुस्तकें उपलब्ध होंगी। समय इंडिया, नई दिल्ली किताबों को पाठकों से जोड़ने की मुहीम के तहत यह पुस्तक मेला लेकर आया है। पुस्तकों से रूबरू होने की समयावधि प्रात: 11 बजे से रात्रि 7-30 बजे तक की होगी। ये जानकारी समय इंडिया के प्रबंध न्यासी चन्द्र भूषण ने आज यहां दी। भूमि पूजन कार्यक्रम में भूषण के अतिरिक्त मंडप निर्माण करने वाली संस्था के कर्मचारी और प्रतिनिधि के साथ स्थानीय लेखक, जेबी पांडेय, संध्या पांडेय एवं संस्कृतिकर्मी उपस्थित थे। भूषण ने बताया कि इस पुस्तक मेले में भागीदारी को लेकर प्रकाशक एवं पुस्तक विक्रेताओं के बीच खासा उत्साह है और वे अपने साथ नई-पुरानी पुस्तकों की सौगात ला रहे हैं। पुस्तकें बोलेंगी, बातें करेंगी और ऐसी दुनिया में ले जायेंगी जहां आप थोड़ा संवेदनशील और मानवीय होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय पुस्तक मेले का उद्देश्य समाज में पुस्तकों के प्रति पनप रही उदासीनता की भावना को खत्म करना और किताबों के करीब पुस्तक प्रेमियों को लाना है। पुस्तक मेले में जिन प्रकाशकों एवं पुस्तक विक्रताओं की स्वीकृति मिल चुकी है उनमें राजपाल एण्ड संस, प्रकाशन संस्थान, समय प्रकाशन, यश प्रकाशन, लक्ष्मी प्रकाशन, नैय्यर बुक सर्विस, वर्मा बुक कम्पनी, रोहित बुक कम्पनी, विकल्प प्रकाशन, आर्यन बुक कम्पनी (नई दिल्ली), हिन्द युग्म (गौतम बुद्ध नगर), दिव्यांश प्रकाशन (लखनऊ), योगदा सत्संग सोसायटी आफ इंडिया, क्राउन पब्लिकेशन, झारखंड झरोखा, गीता प्रेस (रांची) कबीर ज्ञान प्रकाशन केन्द्र (गिरिडीह) आदि प्रमुख हैं। भूषण ने बताया कि मेले के दौरान स्कूली बच्चों के लिए कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम रखे गए हैं जिनमें कविता-कहानी सुनाओ प्रतियोगिता, बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता, बच्चों की गायन प्रतियोगिता, बच्चों की नृत्य प्रतियोगिता, देशभक्ति गीत, फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता आदि प्रमुख हैं। बच्चों की यह सभी प्रतियोगिताएं नि:शुल्क होंगी। पुस्तक प्रेमियों को कवियों एवं कवयित्रियों की कविताओं को करीब से सुनने का मौका पुस्तक मेले में मिलेगा। सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पुस्तक प्रेमियों के दिल जीतने के लिए होंगे।

जरूरतमंदों के लिए कपड़ा वितरण अभियान चला रहा बीआइटी मेसरा-लालपुर
Published / 2025-01-11 21:00:13
जरूरतमंदों के लिए कपड़ा वितरण अभियान चला रहा बीआइटी मेसरा-लालपुर

सर्दी में जरूरतमंदों की मदद के लिए बीआईटी मेसरा लालपुर कैंपस का अनोखा प्रयासटीम एबीएन, रांची। बीआईटी मेसरा लालपुर परिसर के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) ने 11 जनवरी, 2025 को रांची रेलवे स्टेशन और पहाड़ी टोला में एक सफल कपड़े वितरण अभियान चलाया। इस पहल का उद्देश्य जरूरतमंद व्यक्तियों को आवश्यक सर्दियों के कपड़े प्रदान करना और परिसर समुदाय के भीतर सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना था। वितरण से पहले, कपड़ों का दान अभियान चलाया गया, जिसमें छात्रों, संकाय सदस्यों और स्थानीय निवासियों से उदारतापूर्वक योगदान प्राप्त हुआ। एनएसएस स्वयंसेवकों ने कुशलतापूर्वक दान किये गये कपड़ों को एकत्र किया, छांटा और वर्गीकृत किया, ताकि कुशल वितरण सुनिश्चित हो सके। कार्यक्रम के दिन, स्वयंसेवकों ने वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और बच्चों को प्राथमिकता देते हुए वितरण का प्रबंधन किया। 15 से अधिक उत्साही एनएसएस स्वयंसेवकों ने सक्रिय रूप से अभियान में भाग लिया, जिसने सफलतापूर्वक 50 से अधिक व्यक्तियों की सहायता की। एनएसएस कार्यक्रम प्रमुख डॉ अभय रंजन श्रीवास्तव ने ह्रितिका, आर्यन, अभिषेक, साक्षी, आस्था, राहुल, ऐश्वर्या, अनन्या, आशीष जैसे स्वयंसेवकों को बहुमूल्य मार्गदर्शन प्रदान किया और कार्यक्रम के सुचारू संचालन को सुनिश्चित किया। इस सफल पहल से एनएसएस की सामुदायिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रदर्शन होता है और इस तरह के प्रयासों के सकारात्मक प्रभाव को उजागर करता है। प्रतिभागियों ने भविष्य में इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित करने के लिए मजबूत समर्थन व्यक्त किया, जो जरूरतमंद लोगों के जीवन में सार्थक बदलाव लाने की इच्छा को दर्शाता है।

प्रांतीय निबंध प्रतियोगिता  में प्रांत स्तर पर बहन अन्वेषा मुखर्जी ने परचम लहराया
Published / 2025-01-10 17:21:30
प्रांतीय निबंध प्रतियोगिता में प्रांत स्तर पर बहन अन्वेषा मुखर्जी ने परचम लहराया

टीम एबीएन, गुमला/ लोहरदगा। विद्या विकास समिति झारखंड के द्वारा आयोजित प्रांतीय सुलेख, कला एवं निबंध प्रतियोगिता 2024 में शीला अग्रवाल सरस्वती विद्या मंदिर के प्रतिभाशाली भैया-बहनों ने प्रांतीय सुलेख, कला एवं निबंध प्रतियोगिता में सफलता का परचम लहराया। इस परीक्षा में 8 भैया -बहन सफल हुए। इन भैया-बहनों ने सफलता का परचम लहराते हुए लोहरदगा जिले में विद्यालय का नाम रौशन किया। इस पर समस्त विद्यालय परिवार गौरवान्वित है। प्रांतीय परीक्षा में सफलता प्राप्त हुआ है। निबंध : ( मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम) कक्षा  दशम अन्वेषा मुखर्जी  प्रांतीय स्तरीय में प्रथम प्राप्त की।निबंध : (पर्यावरण संरक्षण में हमारी भूमिका) कक्षा नवम कशिश कुमारी  प्रांत स्तरीय में द्वितीय स्थान प्राप्त की।सांत्वना पुरस्कार : निबंध (जल ही जीवन है) कक्षा षष्ठ आस्था पांडे, निबंध (स्वामी दयानंद सरस्वती की देशभक्ति) कक्षा सप्तम सत्यम साहू,  निबंध (स्वच्छ भारत) कक्षा अष्टम तनिष्क राज, निबंध (पर्यावरण संरक्षण में हमारी भूमिका) कक्षा नवम  अंशु मिश्रा, कक्षा नवम वैभव भास्कर एवं कक्षा दशम हर्ष राज सिंह इन सभी प्रतिभाशाली भैया -बहनों को प्रांतीय पुरस्कार एवं  सान्त्वना के साथ  पुरस्कृत किया जायेगा। गुमला विभाग के विभाग प्रमुख अखिलेश कुमार, प्रधानाचार्य बिपिन कुमार दास, अध्यक्ष शशिधर लाल अग्रवाल, सचिव अजय प्रसाद, प्रबंधकारणी सदस्य एवं समस्त आचार्य जी, दीदी जी सफल मेधावी भैया- बहनों को बधाई एवं शुभकामनाएं प्रदान किया।

बेल्जियम के छात्रों ने किया संत जेवियर्स स्कूल, रांची का दौरा
Published / 2025-01-09 18:07:16
बेल्जियम के छात्रों ने किया संत जेवियर्स स्कूल, रांची का दौरा

सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमटीम एबीएन, रांची। बेल्जियम के क्लीन सेमिनरी रुसलेयर स्कूल के 24 छात्रों का एक दल, अपने प्रिंसिपल मिसेज क्लारा और शिक्षकों मिस्टर फिलिप और मिस्टर बियार्न के साथ भारत के सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के दौरान, रांची के संत जेवियर्स स्कूल, डोरंडा में एक यादगार यात्रा के साथ अपने दौरे का समापन किया। यह समूह 16 लड़कियों और 8 लड़कों का था, जिन्होंने भारत के विभिन्न प्रतिष्ठित स्थानों जैसे दिल्ली, आगरा, वाराणसी, कोलकाता और झारखंड के कई स्थानों, जिनमें रांची, गुमला, राजावल, टोंगो, मझाटोली, लोहरदगा, कांके, मानरेसा हाउस, रांची, और बिशप हाउस, रांची शामिल हैं, का दौरा किया। अपने अंतिम पड़ाव के रूप में, छात्रों ने संत जेवियर्स स्कूल के छात्रों के परिवारों के साथ समय बिताया, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी समझ को बढ़ावा मिला। स्कूल की यात्रा के दौरान, उन्होंने कक्षा 11 के छात्रों के साथ बातचीत की और भारत की विविध संस्कृति, स्वादिष्ट भोजन और गर्मजोशी से भरी मेहमाननवाजी के अपने अनुभव साझा किये। इसके साथ ही उन्होंने स्वच्छता और प्रदूषण जैसी चुनौतियों पर भी चर्चा की, जिससे उनकी गहरी पर्यवेक्षण और वैश्विक जागरूकता स्पष्ट हुई। बेल्जियम के छात्रों ने संत जेवियर्स आउटरीच प्रोग्राम के छात्रों के लिए 45 साइकिलें और 600 स्कूल यूनिफॉर्म का उदार दान देकर अपनी सद्भावना प्रकट की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने विभिन्न स्थानों के अन्य जरूरतमंद छात्रों के लिए भी कई वस्तुएं उपहार स्वरूप दीं, जो उनकी दया और एकजुटता की भावना को दर्शाता है। संत जेवियर्स स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम में कई विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया, जिनमें शामिल थे : फादर अजीत कुमार एक्सेस, प्रोविंशियल, रांची जेसुइट सोसाइटी फादर फुलदेव सोरेंग एसजे, प्रिंसिपल फादर रवि भूषण एक्सेस एस.जे., वाइस प्रिंसिपल फादर कुलदीप लिंडा एस.जे., वाइस प्रिंसिपल फादर सुधीर कुजूर एस.जे., सुपीरियर फादर संदीप एस.जे., बर्सरइस इंटरएक्टिव कार्यक्रम ने छात्रों और शिक्षकों को अपने विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान किया, जिससे वैश्विक मित्रता और सांस्कृतिक समझ के संबंध और मजबूत हुए। यह यात्रा बेल्जियम के छात्रों के भारतीय सफर का एक सार्थक समापन थी, जो आपसी सीख, परोपकार और साझा अनुभवों की विरासत को पीछे छोड़ गयी।

एसआर डीएवी पुंदाग की आरुषि, वर्षा और असीफा पुरस्कृत
Published / 2025-01-09 17:59:11
एसआर डीएवी पुंदाग की आरुषि, वर्षा और असीफा पुरस्कृत

टीम एबीएन, रांची। खादी ग्रामोद्योग, रांची के तत्वावधान में आयोजित निबंध लेखन प्रतियोगिता में भाग लेते हुए एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल, पुंदाग की एकादश कक्षा की छात्रा आरुषि श्रेया ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। कक्षा नवम की वर्षा रानी द्वितीय तथा असीफा अहमद तृतीय स्थान पर रही।  प्राचार्य एसके मिश्र ने विजयी प्रतिभागियों  को बधाई तथा शुभकामनाएं देते हुए कहा कि  पाठ्यक्रम के अतिरिक्त भी विद्यार्थियों को स्वाध्याय करते रहना चाहिए, इससे उनका ज्ञान बढ़ता है। रचनात्मक लेखन करते रहने से भाषा पर पकड़ मजबूत होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी विद्यार्थी अनेक महत्त्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करके अपने अभिभावकों तथा विद्यालय का नाम रोशन करेंगे।

इंजीनियरिंग में 12वीं के बाद एक रोमांचक और चुनौतीपूर्ण कैरियर विकल्प
Published / 2025-01-06 21:52:25
इंजीनियरिंग में 12वीं के बाद एक रोमांचक और चुनौतीपूर्ण कैरियर विकल्प

प्रशांत झाएबीएन कैरियर डेस्क। 12वीं कक्षा, एक छात्र जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस चरण के बाद, छात्रों के सामने कई कैरियर विकल्प खुलते हैं, जिनमें से एक लोकप्रिय और सम्मानजनक विकल्प है इंजीनियरिंग। इंजीनियरिंग एक ऐसा क्षेत्र है जो तकनीकी ज्ञान और नवीनतम तकनीकों का उपयोग करके समस्याओं का समाधान करने पर केंद्रित है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां रचनात्मकता, विश्लेषणात्मक कौशल और समस्या-समाधान क्षमता का व्यापक उपयोग होता है। इंजीनियरिंग में करियर विकल्प एक विस्तृत अवलोकन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अनेक विशेषज्ञताएं हैं, प्रत्येक अपने विशिष्ट क्षेत्र में योगदान दे रही हैं। कुछ प्रमुख इंजीनियरिंग शाखाएं निम्नलिखित हैं: सिविल इंजीनियरिंग : यह शाखा बुनियादी ढांचे के निर्माण और रखरखाव से संबंधित है। सड़कों, पुलों, बांधों, भवनों, परिवहन प्रणालियों, जल आपूर्ति और अपशिष्ट जल प्रबंधन जैसे बुनियादी ढांचे के विकास में सिविल इंजीनियर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग : यह तेजी से विकसित हो रहा क्षेत्र है जो सॉफ्टवेयर विकास, डेटाबेस, नेटवर्किं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ), मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों को शामिल करता है।मैकेनिकल इंजीनियरिंग : यह इंजीनियरिंग की एक प्रमुख शाखा है जो यांत्रिक प्रणालियों, उपकरणों और मशीनों के डिजाइन, निर्माण, परीक्षण और रखरखाव से संबंधित है। इसमें आटोमोबाइल, एयरोस्पेस, ऊर्जा, रोबोटिक्स, और विनिर्माण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग : बिजली उत्पादन, संचरण, वितरण और उपयोग से संबंधित सभी पहलुओं को यह शाखा संबोधित करती है। इसमें पावर प्लांट्स, विद्युत ग्रिड, बिजली वितरण नेटवर्क, नियंत्रण प्रणाली और विद्युत उपकरणों का डिजाइन और विकास शामिल है। इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग : यह शाखा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, जैसे ट्रांजिस्टर, एकीकृत सर्किट, और संचार प्रणालियों, जैसे मोबाइल फोन, रेडियो, टेलीविजन, और उपग्रह संचार के डिजाइन और विकास से संबंधित है। केमिकल इंजीनियरिंग : यह रासायनिक प्रक्रियाओं, उत्पादों और संयंत्रों के डिजाइन और संचालन से संबंधित है। इसमें पेट्रोलियम, पेट्रोकेमिकल्स, दवाइयां, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यावरण इंजीनियरिंग और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। बायोमेडिकल इंजीनियरिंग : यह जीव विज्ञान और चिकित्सा के सिद्धांतों को इंजीनियरिंग के साथ जोड़ती है। इसमें चिकित्सा उपकरणों, जैसे कृत्रिम अंग, इमेजिंग सिस्टम, और जैवसेंसरों का विकास शामिल है। सामग्री विज्ञान और इंजीनियरिंग : यह विभिन्न प्रकार की सामग्रियों के अध्ययन, विकास और अनुप्रयोग से संबंधित है। इसमें धातु, पॉलिमर, सिरेमिक, और कंपोजिट सामग्री शामिल हैं। ऊर्जा इंजीनियरिंग : यह नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास और उपयोग से संबंधित है। इसमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल विद्युत, परमाणु ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता जैसे क्षेत्र शामिल हैं। एयरोस्पेस इंजीनियरिंग : यह विमानों, अंतरिक्ष यान और अन्य वायुयानों के डिजाइन, निर्माण और रखाव से संबंधित है। इंजीनियरिंग में प्रवेश के अवसर भारत में, इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए कई प्रवेश परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं, जिनमें सबसे प्रतिष्ठित है आईआईटी जेईई। यह परीक्षा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों  में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है, जो देश के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग संस्थानों में से हैं। आईआईटी जेईई एक कठिन यात्रा : आईआईटी जेईई एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण प्रवेश परीक्षा है, जिसके लिए गहन तैयारी और समर्पण की आवश्यकता होती है। लाखों छात्र हर साल इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन केवल एक छोटा सा प्रतिशत ही सफलता प्राप्त करता है। आईआईटी जेईई की संरचना : आईआईटी जेईई दो चरणों में आयोजित किया जाता है। जैसे - जेईई मेन : यह पहला चरण है, जो एक कंप्यूटर-आधारित परीक्षा है। इसमें गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान के बहुविकल्पीय प्रश्न शामिल होते हैं। जेईई मेन्स परीक्षा वर्ष में दो बार आयोजित की जाती है। यह परीक्षा राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित की जाती है और यह परीक्षा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एनआईटी), और अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है। जेईई मेंस परीक्षा के दो सत्र होते हैं: सत्र 1: जनवरी में सत्र 2: अप्रैल में उम्मीदवार दोनों सत्रों में से किसी एक में या दोनों में भाग ले सकते हैं। यदि उम्मीदवार दोनों सत्रों में भाग लेते हैं, तो उनके उच्चतम स्कोर को माना जायेगा। जेईई एडवांस्ड : यह दूसरा और अंतिम चरण है, जो केवल जेईई मेन में सफल छात्रों के लिए ही आयोजित किया जाता है। इसमें गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान के अधिक चुनौतीपूर्ण प्रश्न शामिल होते हैं।आईआईटी जेईई की तैयारी : आईआईटी जेईई की तैयारी के लिए गहन अध्ययन, नियमित अभ्यास और एक व्यवस्थित दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। छात्रों को 11वीं और 12वीं कक्षा से ही तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। आईआईटी जेईई कोचिंग : कई कोचिंग संस्थान आईआईटी जेईई की तैयारी के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। ये संस्थान छात्रों को कक्षाएं, अध्ययन सामग्री, टेस्ट सीरीज और अन्य सहायता प्रदान करते हैं। इंजीनियरिंग कॉलेज और सीटें : एक विस्तृत अवलोकन भारत में सैकड़ों इंजीनियरिंग कॉलेज हैं, जिनमें सरकारी और निजी दोनों शामिल हैं। इन कॉलेजों में सीटों की संख्या अलग-अलग होती है।  इस वर्ष (2024), आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी और जीएफटीआई , में कुल 59,917  (लगभग) सीटें पेश की गईं, जो पिछले वर्ष से 2,765 सीटों की वृद्धि को दशार्ती हैं। विशेष रूप से, आईआईटी ने अपनी सीट क्षमता में 355 की वृद्धि की है, जो बदलती शैक्षिक अवसरों को दशार्ती है जो बढ़ती मांग के बीच विकसित हो रही हैं। आईआईटी : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान देश के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग संस्थानों में से हैं। इनमें सीमित सीटें होती हैं और प्रवेश अत्यंत प्रतिस्पर्धी होता है। यहां कुछ महत्वपूर्ण बिंदु दिये गये हैं:- आईआईटी में वर्ष 2024 के लिए उपलब्ध कुल सीटों की संख्या 17,740 थी। (लगभग) यह पिछले वर्ष से 355 सीटों की वृद्धि थी। जोसा ने वर्ष 2024 के लिए सीट मैट्रिक्स जारी किया। आईआईटी में उपलब्ध सीटों की संख्या हर साल बढ़ती है। जेईई एडवांस्ड 2024 के माध्यम से 23 आईआईटी में लगभग 17,740 सीटों पर प्रवेश के लिए, प्रत्येक आईआईटी सीट के लिए अनुमानित 11 छात्र दावेदार थे। कुल सीटों में से 20% महिला-अतिरिक्त कोटे के तहत आरक्षित हैं। आमतौर पर, जेईई एडवांस परीक्षा में लिंग अनुपात 65% लड़कों पर 35% लड़कियों का होता है, जो संभावित रूप से महिला आवेदकों के लिए आईआईटी सीटें हासिल करने की संभावनाओं को अनुकूल बनाता है। आईआईटी में प्रवेश के लिए जोसा द्वारा आयोजित किए जाने वाले संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) में उत्तीर्ण होना आवश्यक है। एनआईटी राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान भी उच्च गुणवत्ता वाली इंजीनियरिंग शिक्षा प्रदान करते हैं। इनमें भी सीटों की संख्या सीमित होती है। एनआईटी का अर्थ है राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, और यह भारत में सार्वजनिक अभियांत्रिकी संस्थानों के एक समूह को संदर्भित करता है जो भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त और वित्त पोषित हैं। एनआईटी भारत में सबसे प्रमुख अभियांत्रिकी कॉलेजों में से एक है, और स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रम प्रदान करते हैं। संयुक्त सीट आवंटन प्राधिकरण (जोसा) ने 2024 की सीट मैट्रिक्स जारी की, जिसमें राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एनआईटी) में स्नातक कार्यक्रमों के लिए कुल सीटों की संख्या 24,229 थी। (लगभग) आईआईआईटी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान कंप्यूटर विज्ञान और सूचना प्रौद्योगिकी में विशेषज्ञता प्रदान करते हैं। ये भारत में 26 तकनीकी संस्थानों का एक समूह है जो सूचना प्रौद्योगिकी और संचार अध्ययन पर ध्यान केंद्रित करते हैं। ये भारत में शीर्ष कॉलेजों में से एक माने जाते हैं, जो भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एनआईटी) के बाद आते हैं। आईआईआईटी में से पांच राष्ट्रीय महत्व के संस्थान हैं, जबकि शेष 21 सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर स्थापित किए गए हैं। संयुक्त सीट आवंटन प्राधिकरण (जोसा) ने 2024 की सीट मैट्रिक्स जारी की, जिसमें भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईआईटी) में स्नातक कार्यक्रमों के लिए कुल सीटों की संख्या 8,546 थी। (लगभग) जीएफटीआई सरकार द्वारा वित्त पोषित तकनीकी संस्थान भी इंजीनियरिंग शिक्षा प्रदान करते हैं। जीएफटीआई, या सरकारी वित्त पोषित तकनीकी संस्थान, भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों का एक समूह है जो भारत सरकार या राज्य सरकारों द्वारा वित्त पोषित हैं। जीएफटीआई में विश्वविद्यालय, अभियांत्रिकी कॉलेज और वास्तुकला कॉलेज शामिल हैं। यहाँ भारत के शीर्ष जीएफटीआई (सरकार द्वारा वित्त पोषित तकनीकी संस्थान) कॉलेजों की सूची दी गई है: बिरला इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी, मेसरा: यह कॉलेज रांची में स्थित है और इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ जीएफटीआई कॉलेजों में से एक माना जाता है। विश्वविद्यालय हैदराबाद: यह कॉलेज हैदराबाद में स्थित है और इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ जीएफटीआई कॉलेजों में से एक माना जाता है। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज: यह कॉलेज चंडीगढ़ में स्थित है और इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ जीएफटीआई कॉलेजों में से एक माना जाता है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय: यह कॉलेज नई दिल्ली में स्थित है और इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ जीएफटीआई कॉलेजों में से एक माना जाता है। असम विश्वविद्यालय: यह कॉलेज सिलचर में स्थित है और इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ जीएफटीआई कॉलेजों में से एक माना जाता है। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय: यह कॉलेज हरिद्वार में स्थित है और इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ जीएफटीआई कॉलेजों में से एक माना जाता है। सेंट लॉन्गोवाल इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी: यह कॉलेज लोंगोवाल में स्थित है और इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ जीएफटीआई कॉलेजों में से एक माना जाता है। स्कूल आफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर: यह कॉलेज नई दिल्ली में स्थित है और इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ जीएफटीआई कॉलेजों में से एक माना जाता है। इंडियन इंस्टीट्यूट आफ कार्पेट टेक्नोलॉजी: यह कॉलेज भदोही में स्थित है और इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ जीएफटीआई कॉलेजों में से एक माना जाता है। नेशनल इंस्टीट्यूट आफ फाउंड्री एंड फॉर्ज टेक्नोलॉजी: यह कॉलेज रांची में स्थित है और इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ जीएफटीआई कॉलेजों में से एक माना जाता है। संयुक्त सीट आवंटन प्राधिकरण (जोसा) ने 2024 की सीट मैट्रिक्स जारी की, जिसमें सरकारी वित्त पोषित तकनीकी संस्थानों (जीएफटीआई) में स्नातक कार्यक्रमों के लिए कुल सीटों की संख्या 9,402 थी। (लगभग) राज्य स्तरीय इंजीनियरिंग कॉलेज: प्रत्येक राज्य में कई राज्य स्तरीय इंजीनियरिंग कॉलेज हैं, जो गुणवत्तापूर्ण इंजीनियरिंग शिक्षा प्रदान करते हैं। निजी इंजीनियरिंग कॉलेज:  भारत में बड़ी संख्या में निजी इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। इन कॉलेजों की फीस और गुणवत्ता में भिन्नता होती है। भारत में टॉप  प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों की सूची निम्नलिखित है: बिट्स पिलानी: यह कॉलेज पिलानी, गोवा, हैदराबाद और दुबई में स्थित है और इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक माना जाता है। वेलोर इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी (वीआईटी), वेलोर: यह कॉलेज तमिलनाडु में स्थित है और इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक माना जाता है। एमआईटी पुणे: यह कॉलेज पुणे में स्थित है और इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक माना जाता है। एसआरएम यूनिवर्सिटी: यह कॉलेज तमिलनाडु में स्थित है और इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक माना जाता है। थापर यूनिवर्सिटी: यह कॉलेज पंजाब में स्थित है और इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक माना जाता है। डी जे सांघवी कॉलेज आफ इंजीनियरिंग: यह कॉलेज मुंबई में स्थित है और इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक माना जाता है। आरवी कॉलेज आफ इंजीनियरिंग: यह कॉलेज बैंगलोर में स्थित है और इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक माना जाता है। एमएस रामैया इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी: यह कॉलेज बैंगलोर में स्थित है और इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक माना जाता है। सिद्धगंगा इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी: यह कॉलेज कर्नाटक में स्थित है और इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक माना जाता है। बीएमएस कॉलेज आफ इंजीनियरिंग: यह कॉलेज बैंगलोर में स्थित है और इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक माना जाता है।

भगवान बिरसा मुंडा के परिवार से मिले एसआर डीएवी पुंदाग के विद्यार्थी
Published / 2025-01-05 16:30:45
भगवान बिरसा मुंडा के परिवार से मिले एसआर डीएवी पुंदाग के विद्यार्थी

टीम एबीएन, रांची। एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल, पुंदाग की कक्षा चतुर्थ के विद्यार्थी, शिक्षक एवं शिक्षिकाओं ने आर्य समाज मंदिर में आयोजित महाहवन, चरित्र निर्माण एवं सत्संग कार्यक्रम में भाग लिया। उक्त हवन आर्य समाज मंदिर के यज्ञ पुरोहित ने संपन्न करवाया। वहीं वे भगवान बिरसा मुंडा के परिजनों से मिले। हवन के उपरांत सत्संग में महर्षि दयानंद कृत सत्यार्थ प्रकाश पर चर्चा की गयी। तत्पश्चात विद्यार्थियों ने गायत्री मंत्र शीर्षक कविता का पाठ करके सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।विद्यालय के प्राचार्य एसके मिश्र ने अपने संदेश में शिक्षकों से विद्याथियों में ज्ञानवर्धन के साथ वैदिक मूल्यों के संवर्धन एवं चरित्र निर्माण पर जोर देने का आह्वान करते हुए कहा कि विद्यार्थियों में आर्य मूल्यों का संवर्धन उन्हें देश की सेवा हेतु उद्यत करता है। अत: इस प्रकार के आयोजनों में भाग लेना विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए अत्यंत लाभप्रद है। उन्होंने आर्य समाज रांची प्रकोष्ठ के सभी आर्य श्रेष्ठजन प्रधान राजेंद्र कुमार, आर्य मंत्री अजय आर्य, एसएल गुप्ता, पीपी आर्य के प्रति आभार किया। वैदिक जयघोष के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ।

एसआर डीएवी पुंदाग में बच्चों की सुरक्षा के लिए चला पॉक्सो एक्ट जागरूकता अभियान
Published / 2025-01-02 19:10:42
एसआर डीएवी पुंदाग में बच्चों की सुरक्षा के लिए चला पॉक्सो एक्ट जागरूकता अभियान

टीम एबीएन, रांची। एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल पुंदाग में बच्चों के सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सुरक्षा  के प्रति जागरूकता अभियान चलाया गया। इस कार्यक्रम के तहत कक्षा छठी  तथा सातवीं के छात्र-छात्राओं को अपनी सुरक्षा के प्रति सचेत किया गया।ध्यातव्य रहे कि इस अवस्था के बच्चे किशोरावस्था में होते हैं। बहुत सी ऐसी बातें होती हैं, जिन्हें वे समझ नहीं पाते। यदि उन्हें कुछ असहज सा लगे, तो भी वे संकोचवश किसी से कुछ कह नहीं पाते। इन सब परेशानियों से बाहर निकालने के लिए उन्हें कई उदाहरण देकर, वीडियो दिखाकर, दृश्य - श्रव्य के माध्यम से जागरूक किया गया, ताकि वे किसी अप्रिय घटना की शिकार न बनें। उन्हें अच्छे और बुरे स्पर्श का अंतर भी समझाया गया।उन्हें यह बताया गया कि किसी अप्रिय स्थिति को खामोश रहकर बर्दाश्त करने से समस्या और भी जटिल हो जाती है। इसलिए शोषण के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। इस कार्यक्रम का प्रतिफल यह हुआ कि अनेक छात्र-छात्राओं ने अपने अनुभव साझा किये और अपनी समस्याएं बताकर अपनी शिक्षिकाओं से सलाह लीं। विद्यालय की वरिष्ठ शिक्षिका पुष्पा त्रिवेदी, जेनिफर खन्ना तथा अर्चना प्रिया ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया।प्राचार्य एसके मिश्र ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में इस तरह के कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं। छात्राओं को पॉक्सो एक्ट की जानकारी अवश्य होनी चाहिए ताकि वे अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें। उक्त कार्यक्रम सीबीएसई तथा झारखंड सरकार द्वारा जारी किये गये दिशा-निर्देश; पॉक्सो एक्ट के प्रति जागरूकता अभियान के आलोक में आयोजित किया गया।

नेताजी एकेडमी उवि होचर, कांके के शिक्षक-शिक्षिका शैक्षणिक व धार्मिक यात्रा से लौटे
Published / 2024-12-31 22:47:30
नेताजी एकेडमी उवि होचर, कांके के शिक्षक-शिक्षिका शैक्षणिक व धार्मिक यात्रा से लौटे

मानव को अपनी आस्थाओं के साथ जुड़े रहने की प्रेरणा सहित धार्मिक, सांस्कृतिक व भौगोलिक तथ्यों का ज्ञानार्जन कराते हैं यात्राएं : डॉ बिरेन्द्र साहुटीम एबीएन, रांची। नेताजी एकेडमी उच्च विद्यालय होकर कांके रांची के शिक्षक-शिक्षिका परिवार के 41सदस्य समूह ने पांच दिवसीय शैक्षणिक एवं धार्मिक यात्रा कर आज रांची लौटे। सभी शिक्षक शिक्षिकाओं एवं उनके परिवार ने उड़ीसा के पुरी स्थित भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी जी, भगवान बलराम जी व बहन सुभद्रा जी के साथ-साथ चिल्का झील, गोल्डन बीच, चंद्रभागा कोणार्क बीच, कोणार्क सूर्य मंदिर, नंदनकानन प्राणी उद्यान, धौलागिरी महादेव मंदिर, धौलागिरी बौद्ध मंदिर, लिंगराज मंदिर, सहित कई धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थानों पर दर्शन-पूजन कर रांची लौटे।विद्यालय के प्रधानाचार्य व विश्व हिंदू परिषद, झारखंड-बिहार के सहमंत्री डॉ बिरेन्द्र साहु ने कहा मानव जीवन को यात्रा से अनेक प्रकार के लाभ होते हैं। शैक्षिक जगत में रहने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को धार्मिक आस्थाओं से जुड़े रहने की प्रेरणा के साथ-साथ धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, पौराणिक व भौगोलिक स्थितियों का ज्ञानार्जन कर अपने विद्यार्थियों को मूल स्थिति का दर्शन व पठन-पाठन करने में अत्यंत लाभकारी होते हैं।मौके पर प्रधानाचार्य डॉ बिरेन्द्र साहु, ललिता देवी, दीपक साहू, सुजीत उपाध्याय, नीतीश साहू, मनीष साहू, उर्मिला करकेट्टा, अनु देवी, रामकिशोर साहू, सुनीता मुंडा, विजय उरांव, प्रीति देवी, रेखा कुमारी, नीतू तिर्की, बबलू साहू, गौरी साहु, अनुराधा देवी, रूबी देवी आदि शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सपरिवार यात्रा की।

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