टीम एबीएन, रांची। सर्जरी विभाग के प्राध्यापक डॉ दिपेन्द्र कुमार सिन्हा को रिम्स के कार्यकारी व्यवस्था अंतर्गत तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक निदेशक का प्रभार दिया गया है।
इस प्रस्ताव को विभागीय मंत्री-सह-अध्यक्ष, शासी परिषद् डॉ इरफान अंसारी का अनुमोदन प्राप्त है। इससे पहले डॉ राजकुमार ने रिम्स के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पांकी /पलामू। उपायुक्त पलामू ने मनातू के अंचल पदाधिकारी सह प्रभारी प्रखंड विकास पदाधिकारी मदन कुमार सुमन को पांकी अंचल पदाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। बुधवार को पांकी पहुंचकर उन्होंने विधिवत पदभार ग्रहण किया।
उपायुक्त ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि मदन कुमार सुमन एक सुलझे हुए, कर्मठ एवं अनुभवी अधिकारी हैं, जिनके नेतृत्व में पांकी अंचल के राजस्व एवं प्रशासनिक कार्यों में गति आएगी। पदभार ग्रहण करने के बाद मदन कुमार सुमन ने कहा कि वे अपने अधीनस्थ कर्मियों के साथ आपसी समन्वय और बेहतर तालमेल स्थापित करते हुए कार्य करेंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्व से जुड़े मामलों के त्वरित निष्पादन को प्राथमिकता दी जायेगी तथा सभी कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर संपन्न कराये जायेंगे। उन्होंने कहा कि आम जनता की समस्याओं का समाधान पारदर्शी और जवाबदेही के साथ किया जाएगा।
भूमि संबंधी मामलों, दाखिल-खारिज, म्यूटेशन तथा अन्य राजस्व कार्यों के निष्पादन में अनावश्यक विलंब नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कर्मचारियों से भी टीम भावना के साथ कार्य करने की अपील की, ताकि आम लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ समय पर मिल सके।
टीम एबीएन, रांची। भीषण गर्मी को देख रांची सिविल कोर्ट में चल रही मॉर्निंग कोर्ट की व्यवस्था अब समाप्त होने जा रही है। आगामी 29 जून 2026 से सिविल कोर्ट में दोबारा डे सिटिंग (दिन की अदालत) शुरू हो जायेगी। इस संबंध में रांची के न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा (नंबर-1) ने सोमवार (22 जून 2026) को कार्यालय आदेश संख्या 4/(Misc.) जारी कर दिया है।
इससे पहले जारी कार्यालय आदेश संख्या 02/(Misc.)/2026 और 03/(Misc.)/2026 के तहत रांची सिविल कोर्ट में 6 अप्रैल 2026 से मॉर्निंग कोर्ट की व्यवस्था लागू की गई थी। यह व्यवस्था आगामी 27 जून 2026 तक प्रभावी रहेगी। 28 जून को रविवार होने के कारण, सोमवार (29 जून) से सभी कोर्ट सामान्य रूप से दिन में संचालित होंगे।
मेमो संख्या 3878-87/दिनांक 22.06.2026 के तहत इस आदेश की प्रतिलिपि झारखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, रांची के उपायुक्त (DC), वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP), जज-इन-चार्ज, रांची जिला बार एसोसिएशन के सचिव, बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार (होटवार) के अधीक्षक, फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) के प्रधान मजिस्ट्रेट और रेलवे मजिस्ट्रेट सहित सभी संबंधित अधिकारियों को सूचनाार्थ और आवश्यक कार्रवाई हेतु भेज दी गई है। इस आदेश को सिविल कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड करने का निर्देश दिया गया है।
टीम एबीएन, रांची। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को उनके कार्यालय कक्ष में ट्रांसप्लांटेशन आॅफ ह्यूमन आॅर्गन्स (अमेडमेंट) एक्ट, 2011 के तहत गठित एडवाइजरी कमेटी की बैठक आयोजित की गयी।
बैठक में राज्य के पांच अस्पतालों के पंजीकरण प्रस्तावों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
जिन संस्थानों के प्रस्तावों पर चर्चा हुई, उनमें टाटा मेन हॉस्पिटल, जमशेदपुर, कफकर सुपर स्पेशलिटी आई केयर सेंटर, रांची, एमजीएम मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, जमशेदपुर, लोकनायक जयप्रकाश नारायण आई हॉस्पिटल तथा कोडरमा रोटरी चैरिटेबल ट्रस्ट शामिल हैं।
समिति ने सभी प्रस्तावों की तकनीकी एवं कानूनी मानकों के अनुरूप समीक्षा के उपरांत टाटा मेन हॉस्पिटल, जमशेदपुर तथा कफकर सुपर स्पेशलिटी आई केयर सेंटर, रांची को कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए तथा एमजीएम मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, जमशेदपुर को कॉर्निया ट्रांसप्लांट के साथ-साथ आई बैंक की स्थापना एवं संचालन के लिए पांच वर्षों की अवधि के लिए पंजीकरण प्रदान करने का निर्णय लिया। वहीं, अन्य दो संस्थानों के प्रस्तावों पर प्रशिक्षित मानव संसाधन एवं मशीन उपकरण मानक के अनुरूप उपलब्ध नहीं होने के कारण पंजीकरण नहीं किया गया।
इस दौरान संबंधित अस्पतालों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों, उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, विशेषज्ञ मानव संसाधन एवं अधिनियम के तहत निर्धारित मानकों के अनुपालन की विस्तृत समीक्षा की गयी। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण सेवाओं का विस्तार गुणवत्ता, पारदर्शिता और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप किया जायेगा, ताकि मरीजों को राज्य में ही बेहतर एवं समयबद्ध उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
बैठक में निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, रिम्स के हृदय रोग विभाग के प्राध्यापक डॉ. हेमंत नारायण, रिम्स नेफ्रोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा पंत घोष, रिम्स नेत्र रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर सुनील कुमार, झारखंड उच्च न्यायालय की अधिवक्ता निरूपमा, भीम बिरसा वूमेन्स फाउंडेशन की सरिता पांडेय, सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिव नारायण सिंह, ध्रुव प्रसाद, उप सचिव सहित एडवाइजरी कमेटी के सभी सदस्य उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड आंदोलन के प्रणेता, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। झामुमो और कांग्रेस के नेताओं ने उनके संघर्ष, योगदान और झारखंड राज्य के निर्माण में निभायी गयी ऐतिहासिक भूमिका का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित करने की मांग की है।
यह मांग ऐसे समय में उठी है जब मंगलवार को नयी दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में स्वर्गीय शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान प्रदान किया गया। यह सम्मान उनकी पत्नी रूपी सोरेन ने ग्रहण किया। झारखंड की राजनीति में इसे गौरव का क्षण माना जा रहा है। हालांकि, झामुमो और कांग्रेस का कहना है कि गुरुजी का योगदान इतना व्यापक और ऐतिहासिक है कि उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए।
झामुमो के केंद्रीय उपाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद बैद्यनाथ राम ने कहा कि शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन आदिवासी, मूलवासी, मजदूर और वंचित समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए बिताया। झारखंड राज्य के गठन की लड़ाई में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है।
उन्होंने कहा कि पद्म भूषण सम्मान स्वागत योग्य है, लेकिन गुरुजी का योगदान भारत रत्न के योग्य है। उनका संघर्ष केवल झारखंड तक सीमित नहीं था, बल्कि सामाजिक न्याय और जनाधिकारों के लिए पूरे देश में प्रेरणा का स्रोत रहा है।
वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता किशोरनाथ शाहदेव ने भी शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन को राष्ट्रीय पहचान दिलाने और आदिवासी समाज की आवाज को मजबूत करने में गुरुजी की भूमिका अतुलनीय रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को उनके योगदान का सम्मान करते हुए उन्हें भारत रत्न प्रदान करना चाहिए। इससे न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के आदिवासी समाज का सम्मान बढ़ेगा। आदिवासी इस देश के मालिक होते हैं।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में ग्रामीण क्षेत्रों की सड़क संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ग्रामीण कार्य विभाग सक्रिय हो गया है। विभाग ने राज्य के सभी विधायकों से उनके विधानसभा क्षेत्रों में नई ग्रामीण सड़कों एवं अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए औपचारिक अनुशंसा भेजने का आग्रह किया है।
इसके लिए विभागीय अभियंता लगातार जनप्रतिनिधियों और उनके प्रतिनिधियों से संपर्क कर क्षेत्र की प्राथमिकता वाली योजनाओं की सूची तैयार करने में जुटे हैं।
सूत्रों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विधायक अनुशंसा आधारित योजनाओं की सीमा बढ़ाकर 15 करोड़ रुपये प्रति विधायक कर दी गई है।
राज्य के 81 निर्वाचित और एक मनोनीत विधायक सहित कुल 82 विधायकों से उनके क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप प्रस्ताव मांगे गए हैं। इन योजनाओं में ग्रामीण सड़कें, संपर्क मार्ग, छोटी पुलिया तथा अन्य आवश्यक आधारभूत संरचना परियोजनाएं शामिल होंगी। विधायकों से प्राप्त प्रस्तावों की सबसे पहले तकनीकी जांच की जाएगी।
इसके बाद प्रत्येक योजना की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार की जाएगी, जिसमें सड़क की लंबाई, लागत अनुमान, गुणवत्ता मानक, भूमि की उपलब्धता और निर्माण तकनीक जैसे सभी पहलुओं का विस्तृत आकलन होगा। तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद योजनाओं को प्रशासनिक मंजूरी प्रदान कर निर्माण प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
ग्रामीण कार्य विभाग का लक्ष्य बरसात के मौसम का उपयोग अधिकतम डीपीआर तैयार करने में करना है, ताकि मानसून समाप्त होते ही निर्माण कार्य तेजी से शुरू कराया जा सके। वहीं, खजरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक राजेश कच्छप, खूंटी से राम सूर्या मुंडा ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत जगहों पर नई सड़कों का निर्माण होना है और कई जर्जर सड़कों का फिर से जीर्णोद्धार का कार्य होना है।
विधायकों का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा बेहतर होगी, गांवों का सड़क संपर्क मजबूत होगा और विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। सरकार की इस पहल से राज्य के दूरदराज क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विस्तार को भी बल मिलने की उम्मीद है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। आधिकारिक घोषणा से पहले ही राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गयी कि भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी को 28 वोट मिले हैं, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को 25 वोट प्राप्त हुए हैं। विधानसभा परिसर में भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने जय श्री राम के नारे लगाये, जिससे माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंग गया।
परिमल नथवानी देश के प्रमुख उद्योगपतियों और अनुभवी राजनेताओं में गिने जाते हैं। वे वर्ष 2008 से 2020 तक झारखंड का राज्यसभा में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसके बाद वे आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सदस्य बने। उनका मौजूदा कार्यकाल समाप्ति की ओर है और इसी बीच उन्होंने झारखंड से फिर राज्यसभा पहुंचने की दावेदारी पेश की।
इस बार का चुनाव शुरुआत से ही बेहद दिलचस्प माना जा रहा था। झारखंड विधानसभा में जीत के लिए 28 वोटों की जरूरत थी, जबकि एनडीए के पास केवल 24 विधायक थे। ऐसे में नथवानी की जीत का रास्ता क्रॉस वोटिंग से होकर गुजरता दिख रहा था। मतदान के बाद सामने आये आंकड़ों ने इसी संभावना को मजबूत किया।
अगर 28 वोट मिलने की खबर आधिकारिक नतीजों में बदलती है, तो यह परिमल नथवानी की बड़ी राजनीतिक वापसी मानी जायेगी। साथ ही यह भी साफ संकेत होगा कि चुनाव में क्रॉस वोटिंग ने निर्णायक भूमिका निभायी। झारखंड की राजनीति में 2026 का यह राज्यसभा चुनाव लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा।
टीम एबीएन, रांची। आने वाले समय में सबसे बड़ा संकट पानी का है। पीने के पानी का। खेती-बाड़ी के लिए पानी का। इसलिए जरूरी है कि हम पानी बचायें। जल संचय करें। खेतों में, बंजर भूमि में पानी संचय के लिए जगह बनायें। अगर पानी नहीं बचेगा, तो हम भी नहीं बचेंगे। यह बात तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेला का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कही।
कार्यक्रम में ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, सांसद महुआ माजी के अलावा कृषि विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे। दुनिया में आज जो चल रहा है, उससे सबसे अधिक प्रभावित किसान हो रहे हैं। इस संकट में हम कैसे किसानों को तैयार करें। कम पानी में अधिक खेती कैसे करें। हर जगह जलवायु परिवर्तन की चिंता है।
आने वाले वक्त में पानी की घोर समस्या होने जा रही है। पीने व खेती के लिए पानी को लेकर। वैसे तो धरती में सबसे अधिक पानी ही है। लेकिन वह उपयोग का नहीं है। किसानों से आग्रह है कि अपने-अपने खेतों में जल संचय के लिए काम करना शुरू कर दें। यह आपके पीढ़ियों के लिए वरदान साबित होगा। इसके लिए किसी के आदेश की जरूरत नहीं है।
हमने बंजर जमीनों में जल संचय करने का काम शुरू किया। जो नये आंकड़े आ रहे हैं, वह बता रहे हैं चापाकल में पानी खत्म हो जायेगा। अगर आज से जल संचय का काम शुरू किया, तो आपदा से राहत मिलेगी। जहां भी चापाकल है, वहां पर रिचार्ज करने के लिए सॉकपीट बनाइये।
जल संचय का काम करिये। आने वाला समय पानी को लेकर बड़ी चुनौती वाली है। कई सारे आंकड़े उपलब्ध हैं। जिसमें विकास की लकीर खींचने की तैयारी हो रही है। हम नये युग में प्रवेश तो करेंगे, लेकिन विनाश भी आयेगा। हमें संतुलन बनाना होगा। सड़क-उद्योग के नाम पर जंगल उजाड़े जा रहे हैं।
50-100 साल पुराने पेड़ों को उजाड़ा जा रहा है। इसके मुकाबले वृक्षारोपण का काम चींटियों की तरह चल रहा है। हमारे पास जो आंकड़े हैं और देश के जो आंकड़े कहते हैं, इस तरह बोरिंग किया गया है, मानो छलनी से ज्यादा छेद जमीन में कर दिया गया है।
छलनी में पानी नहीं रूकेगा। यह मानिये जितना इस धरती से लेते हैं, उसका कुछ हिस्सा हमें देना भी पड़ेगा। इसलिए सभी किसान भाइयों, आज के इस तकनीक युग में कम पानी में अधिक से अधिक खेती करें। ड्रिप एरिगेशन इसलिए लाया गया। ताकि हम कम पानी में खेती कर पायें।
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