जनसंघ के पहले आदिवासी विधायक रोपना उरांव की पुण्यतिथि भी भूल गये भाजपाई
ABN Bureau• 11 Sep, 2022
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टीम एबीएन, रांची। दुर्गा सोरेन एवं स्वर्गीय रोपना उरांव दोनों की पुण्यतिथि थी। जहां दुर्गा सोरेन जी की जयंती बहुत भव्य पैमाने पर वर्तमान मुख्यमंत्री एवं उसके केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन के उपस्थिति में मनाई गई। वहीं पुराने जनसंघी एवं भारतीय जनता पार्टी / जनसंघ के वर्तमान झारखंड के पहले आदिवासी विधायक रोपना उरांव के लिए पार्टी स्तर पर एक पुष्प भी अर्पित करते हुए कोई भी पार्टी का वरिष्ठ कार्यकर्ता या अधिकारी नहीं दिखा। जहां भारतीय जनता पार्टी दीनदयाल उपाध्याय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, अटल बिहारी वाजपेई के जन्मदिन बहुत धूमधाम से मनाती है बिरसा मुंडा जयंती को राष्ट्रीय आदिवासी दिवस के तौर पर भी मनाने का श्रेय अर्जित करती है। लेकिन कल अपने पहले आदिवासी विधायक रोपना उरांव को ही भूल गई वह भी उस विधायक को जिसने अपने दम पर जनसंघ को झारखण्ड मे पहली बार जितवाया था, मैंने देखा है परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद, सुमित्रानंदन पंत को भाजपा नेता फेसबुक पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दिखे एक-दो तो दुर्गा सुरेंद्र को भी श्रद्धांजलि अर्पित करते नजर आए लेकिन पता नहीं क्यों ऐसे शख्स जिन्होंने अपने संपूर्ण जीवन को जनसंघ पार्टी के नाम से अर्पित कर दिया उन्हें लोग भूलते जा रहे हैं, आज तक गुमला कल भारतीय जनता पार्टी का महिला मोर्चा एवं युवा मोर्चा का प्रशिक्षण वर्ग चला कई नेता आए उनके स्वागत में सारे फेसबुक भरे हुए थे, राष्ट्रीय मंत्री एवं रांची की मेयर आशा लकड़ा के स्वागत को लेकर भी फेसबुक भरे रहे थे लेकिन आप ही विचार कीजिये कि कितना अफसोस जनक है न ही गुमला जिला नाही प्रांत स्तर पर एक छोटा सा भी श्रद्धांजलि समारोह रोपना उरांव के पुण्यतिथि पर नहीं हुआ। पार्टी एवं कार्यकर्ताओं के लिए कितने शर्म की बात है अध्यक्ष राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति मोर्चा राज्यसभा सांसद समीर उरांव उसी गुमला जिला से आते हैं उन्होंने ललित उरांव की मूर्ति सिसई में लगाने काभी महत्वपूर्ण काम किया है, भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी भी आदिवासी हैं। प्रदेश अनुसूचित जनजाति मोर्चा अध्यक्ष शिव शंकर उरांव भी गुमला के विधायक भी रह चुके हैं, राष्ट्रीय मंत्री आशा लकड़ा का पैतृक आवास भी उसी गुमला जिले में है। प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष आरती कुजूर भी आदिवासी हित के लिए लड़ने वाली कहलाती हैं। अधिकतर आदिवासी दायित्व धारी भाजपाई नेता उराव जनजाति से ही आते हैं। आखिर क्या ऐसी स्थिति हो गई जिसमें अपने इतने बड़े नेता के लिए एक छोटा सा समारोह नहीं एक पुष्प भी नहीं क्या कारण क्या इन हालात पर भारतीय जनता पार्टी आदिवासी क्षेत्रों में अपनी पैठ बना पाएगी इस पर पार्टी संगठन को पुनः विचार करना चाहिए, बस सर की बात है कि जनसंघ के घोर विरोधी रहे कार्तिक उरांव जी की जयंती भारतीय जनता पार्टी बड़े धूमधाम से मनाती है यहां तक की रायडीह जोकि रोपना उरांव जी का कर्मभूमि रहा था वहां लोगों ने डॉ कार्तिक उरांव की मूर्ति लगाई थी जिस पर 2017 में उनकी सुपुत्री गीताश्री उरांव ने टिप्पणी भी करी थी भारतीय जनता पार्टी में कोई नेता है ही नहीं लिए भारतीय जनता पार्टी डॉ कार्तिक उरांव यानी गीताश्री उरांव के पिता का नाम उपयोग करती है।
क्या बिगड़ जाता भारतीय जनता पार्टी का जो दो स्थानों पर उनका प्रशिक्षण शिविर चल रहा है अगर श्रद्धांजलि के दो बोल दो पुष्प रोपना उरांव के अर्पित कर दिए जाते और कुछ फेसबुक पर ट्विटर हैंडल पर उनके फोटो और विनम्र श्रद्धांजलि पुण्यतिथि पर ऐसा करके लिख देते तो...