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झारखंड : गवर्नर के दिल्ली दौरे ने बढ़ायी विधायकों की चिंता

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झारखंड : गवर्नर के दिल्ली दौरे ने बढ़ायी विधायकों की चिंता
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टीम एबीएन, रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधायकी पर जारी सस्पेंस के बीच राज्यपाल रमेश बैस शुक्रवार को दिल्ली चले गए। इससे एक दिन पहले यानी गुरुवार को ही यूपीए का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला था। राज्यपाल ने उन्हें आश्वासन दिया था कि वे दो दिन में मामले में फैसला ले लेंगे। इसके बाद से अटकलें लगाई जा रही हैं कि राज्यपाल दिल्ली से लौटते ही मामले में जारी सभी संदेहों को दूर कर देंगे। हालांकि, राजभवन के सूत्रों ने कहा कि वे चिकित्सा जांच के लिए एक व्यक्तिगत यात्रा है। इस बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में सूखे के आकलन को लेकर मंत्रियों बन्ना गुप्ता, बादल पत्रलेख और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। सूत्रों की मानें तो इस दौरान राज्य की राजनीति पर चर्चा हुई। इस बीच रायपुर में झारखंड के मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि 5 तारीख को हमारा सदन है और वहां पर हम जनता को अपनी बात बताएंगे कि किस तरीके से हम लोग को प्रताड़ित किया जा रहा है और लोकतंत्र की हत्या करने की साजिश हो रही है, चुनी हुई सरकार को अपदस्थ करने की साजिश हो रही है। हेमंत की विधायकी पर संकट क्यों : इसी साल 12 फरवरी को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता रघुबर दास ने दावा किया था कि मुख्यमंत्री ने पद का दुरुपयोग किया है। उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके पिछले साल रांची में अपने नाम पर पत्थर उत्खनन पट्टे के लिए स्वीकृति प्राप्त की। जो जनप्रतिनिधित्व कानून की धाराओं का उल्लंघन है। इस मामले की शिकायत भाजपा ने राज्यपाल से की और सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की। इसके बाद मामला चुनाव आयोग पहुंचा। करीब दो महीने चली जांच के बाद 25 अगस्त को चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को भेज दी। तब से सोरेन की विधायकी जाने के कयास लग रहे हैं। मुख्यमंत्री की विधायकी जाने पर क्या-क्या हो सकता है : दावा किया जा रहा है कि सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द हो जाएगी। हालांकि, चुनाव आयोग ने उनके चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगाई है। अगर ये दावे सच होते हैं तो इस बात की संभावना सबसे ज्यादा है कि सोरेन इस्तीफा देकर दोबारा शपथ लें। ऐसा होने पर हेमंत सोरेन को छह महीने के अंदर चुनाव लड़कर दोबारा से विधायक बनना होगा। सोरेन की सदस्यता जाने के बाद उनकी सीट खाली होगी। इस पर छह महीने के अंदर चुनाव होंगे। ऐसे में सोरेन अपनी सीट पर दोबारा चुने जा सकते हैं। इस तरह से वो मुख्यमंत्री बने रहेंगे। अगर सोरेन के चुनाव लड़ने पर भी रोक लगी तो क्या : अगर हेमंत सोरेन की विधायकी जाने के साथ उनके चुनाव लड़ने पर भी रोक लग जाती है तो सोरेन पद छोड़ने के बाद दोबारा शपथ नहीं ले सकेंगे। इस स्थिति में उनकी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा और महागठबंधन को नया नेता चुनना होगा। विधायक दल का नया नेता झारखंड के अगले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेगा। इसके बाद उसे विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा।
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