टीम एबीएन, रांची। जिला प्रशासन का प्रयास है कि महिला किसान व्यज्ञानिक खेती से माध्यमों से जुड़ें, साथ ही ग्रामीण स्तर पर किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में कार्य किये जाय। सदर प्रखण्ड के तिरला पांचायत अंतर्गत ग्राम एरेण्डा की निवासी मीरा देवी आज खऌकटऊक परियोजना से जुड़कर टपक सिचाई के माध्यम से खेती कर रही हैं। मीरा देवी बताती हैं कि मैं और मेरे पति कई वर्षों से खेती करते आ रहे हैं जिसमें हम कड़ी मेहनत करते थे दिनभर खेत में काम करते रहते थे, जब से टपक सिचाई से जुड़े है कम मेहनत, कम लागत और कम पानी में दोगुना मुनाफा हो रहा है।
जेएसएलपीएस के माध्यम से मीरा देवी को 25 डिसमिल जमीन पर टपक सिचाई कि मदद की गई थी उन्होंने गरमा फसल में तरबूज की खेती से शुरूवात की थी, जिसमें उन्हें 6721 रुपये का मुनाफा हुआ उसके बाद उन्होंने खरीफ फसल में बोदी की खेती की जिसमें मीरा देवी को 23250 रुपए का मुनाफा हुआ। इस परियोजना से जुड़ने का मुख्य कारण यह है कि खरछढर के माध्यम से क्षेत्र भ्रमण कार्यक्रम में टपक सिंचाई योजना के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी दी गई। इसके लाभ के संबंध में बताया गया, साथ ही इससे जुड़े किसानों के खेत पर फसल का क्षेत्र भ्रमण कराया गया जिसके माध्यम से इस परियोजना से जुड़ने की प्रेरणा मिली। उचित मार्गदर्शन और बेहतर कार्ययोजना के फलस्वरूप कठिनाईयों को दूर किया गया। अब खेती करने में कठिनाईयों का सामना नही करना पड़ रहा है और अब अच्छे लाभ के कारण उनका परिवार खुशहाल जीवन जी रहे हैं। दीदी बताती हैं कि अभी उनके खेत में फूलगोभी लगा हुआ है और प्रतिदिन बाजार में बेचा जाता है इसके साथ ही अगले माह में यानि सितंबर में स्ट्राबेरी की खेती के लिए तैयारी चल रही है। दीदी बताती हैं कि यह प्रणाली आय का अच्छा स्त्रोत है यह हर मौसम में खेती कर अच्छा मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। मीरा देवी अभी तक सूक्ष्म टपक सिचाई योजना से एक वर्ष में कुल 155385 रुपये की आय की है।