झारखंड
अमृत महोत्सव पर महापुरुषों की प्रतिमा को सजाने-संवारने की जरूरत : शालिनी गुप्ता
ABN Bureau
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12 Aug, 2022
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टीम एबीएन, झुमरी तिलैया (कोडरमा)। जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष शालिनी गुप्ता ने उपायुक्त आदित्य रंजन को एक पत्र लिखकर मांग की है कि आजादी का 75वां वर्षगांठ उत्साह और उम्मीदों की नई उमंगों के साथ परंपराओं को भी साक्षी बनेगी। ऐसे में कोडरमा जिला में भी डोमचांच के अलावा कोडरमा और झुमरी तिलैया शहर में कई महापुरुषों की प्रतिमा चौक, चौराहों पर स्थापित है। डोमचांच में शहीद स्मारक के अलावा कोडरमा में गांधी चौक एवं डॉ भीम राव अंबेदकर की प्रतिमा व झुमरी तिलैया में महाराणा प्रताप, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बाबु वीर कुंवर सिंह, डॉ भीमराव अंबेदकर तथा तिलैया बस्ती चौक के समीप शहीद सैनिक की प्रतिमा स्थल पर लाइटिंग की व्यवस्था के अलावा 13 से 15 तक लगने वाले तिरंगे को उक्त स्थलों पर लगाया जाय, ताकि इन स्थलों पर लाइटिंग ऐतिहासिक बन सके। इसके अलावा जिला समाहरणालय, अनुमंडल, प्रखंड मुख्यालय, नगर पर्षद, नगर पंचायत में भी लाइटिंग के साथ-साथ झंडा चौक झुमरी तिलैया को भी लाइटिंग से सजाया जाय और यहां भी विशेष व्यवस्था आयोजित करने की आवश्यकता है। 15 अगस्त के दिन पूरे जिले में लगभग सुबह 9 बजे एक साथ स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बागीटांड़ में जिला स्तरीय कार्यक्रम के लिए लाइव प्रशासन का आयोजन किया जाय और सभी प्रमुख चौक चौराहों पर इसका सीधा प्रसारण एलईडी की व्यवस्था हो तथा 09 बजे के करीब लोग अपनी जगह पर खडे होकर राष्ट्रगान कार्यक्रम में शामिल हो, इसकी भी व्यवस्था की जाय। ताकि राष्ट्रीय ध्वज को पूरे सम्मान के साथ कोडरमा जिला में फहराया जाय। प्रशासन के द्वारा स्कुल, कॉलेजों, एनसीसी कैडेटों के द्वारा दौड प्रतियोगिता के साथ-साथ अन्य कई कार्यक्रम का आयोजन भी हो और जिले में निकलने वाले तिरंगा यात्रा में आम आवाम की भागीदारी के साथ-साथ सामाजिक संगठनों को भी जोड़ने की आवश्यकता है। इसके अलावा 13 से 15 अगस्त तक अमृत महोत्सव के तहत घर घर तिरंगा हर घर तिरंगा कार्यक्रम के तहत झंडोतोलन संध्या में झंडों को प्रतिदिन सम्मानजनक तरीके से उतारने के लिए दिशा निर्देश जारी किया जाय। इसके अलावा जिले में कोडरमा स्टेशन पर लहर रहे राष्ट्रीय ध्वज के समीप बेहतर लाईटिंग एवं राष्ट्रीय गान का धुन पर आधारित कार्यक्रम का आयोजन कर आजादी के 75वां अमृत उत्सव पर बलिदानियों को इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनने में कवायद की जरूरत है।
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