टीम एबीएन, रांची। रविवार को को कालचक्रम ट्रस्ट के अंतर्गत दो नई संस्थाओं की स्थापना की गयी। इंस्टीट्यूट ऑफ योगा एंड अल्टरनेटिव मेडिसिन संस्था जिसके अंतर्गत आयुष मंत्रालय से मान्यता प्राप्त थैरेपिस्ट वैकल्पिक चिकित्सा के साधनों के माध्यम से बिना किसी साइड इफेक्ट के रोगों का उपचार करेंगे एवं दूसरी संस्था एशियन जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई यह झारखंड की पहली संस्था है जहां रत्न शास्त्र की पढ़ाई कराई जाएगी एवं उसके साथ प्रायोगिक परीक्षण की प्रशिक्षण काफी कम शुल्क में दिया जाएगा lकार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन व मां शारदे तथा गणेश वन्दना के साथ हुआ। इस अवसर पर ही कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों ने फीता काटकर किया। कार्यक्रम की मुख्यातिथि रांची
विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की प्राध्यापिका एवं योग विभाग की निदेशिका डा. मधुलिका वर्मा ने कहा कि योग वर्तमान युग की बहुत बड़ी आवश्यकता है। योग मानवीय चेतनाओं के प्रसार व नियंत्रण का प्रमुख उपागम है। योग में प्रदत्त मन्त्रों से विविध प्रकार के रोगों का बड़ी सरलता से निदान सम्भव है ,अनिद्रा वविशाद जैसी समस्याओं का निदान भी योग से सम्भव है। संस्कृत विभाग के प्राध्यापक डा.श्री प्रकाश सिंह ने कहा कि योग में अल्टरनेटिव मेडिसिन विचार चिकित्सा के क्षेत्र में वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में आती है।जो कम मूल्य में बड़ी सरलता वह सहजता के साथ सुलभ होती है। राजकीय संस्कृत महाविद्यालय किशोरगंज के प्राध्यापक डा.शैलेशमिश्र ने कहा कि संस्था के निदेशक डॉ एसके घोसाल का प्रयास सराहनीय है एवं उनके साथ ही साथ उनके संस्थान कालचक्रम के निरन्तर प्रगति की कामना करता हूं। उन्होंने योग में अष्टांग योग की परिकल्पना है जिसमें यह, नियम आसन के बाद प्राणायाम का क्रम आता है पर वर्तमान समय में लोग यम, नियम का पालन न करके सीधे-सीधे आसन व प्राणायाम पर आ जाते हैं इसी कारण लोग योग के वास्तविक लाभ से लोग वंचित रह जाते हैं। योग विभाग की प्राध्यापिका डॉ परिणीता सिंह ने कहा कि योग की वैज्ञानिकता व प्रासंगिकता आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी फतंजलि के समय थी। ज्योतिर्विज्ञान विभाग के प्राध्यापक डॉ चन्द्रशेखर मिश्र ने कहा कि संस्थान की प्रगति यहां के व्यवस्थापक तथा उनके सहयोगियों के कठिन परिश्रम तथा कार्य के प्रति निष्ठा का परिणाम है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ अर्चना कुमारी दुबे ने कहा कि जो सुविधाएं अब तक विदेशों में थी। वही सुविधाएं रांची में सुलभ रुप से उपलब्ध करवाने हेतु संस्थान के निदेशक डॉ एसके घोसाल को बहुत बहुत शुभकामनाएं देती हैं तथा उनके महनीय कार्य की प्रशंसा करती हूं। कार्यक्रम में संस्था की थेरेपिस्ट सोनाली सरकार, आर्य प्रह्लाद, शंकर राणा एवं सदस्यों में विश्वजीत घोषाल राहुल रंजन, सुरेश मुखर्जी, बीना माहेश्वरी, सुप्रिया घोषाल मौजूद थे। सुप्रिया, सुमन, अनुपमा, पूर्वा, रौनक कुनाल आदि की संगीतमयी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिया। संस्था के सबसे पुरानी छात्र दुर्वा राय गुप्ता ने संस्था के विगत कुछ उपलब्धियों एवं अपने अनुभव को सभी के समक्ष साझा किया। मंच संचालन संस्कृत विभाग के शोध छात्र जगदम्बा प्रसाद सिंह तथा धन्यवाद ज्ञापन ज्योतिर्वज्ञान विभाग के प्राध्यापक व कार्यक्रम के निदेशक एसके घोषाल ने किया।