टीम एबीएन, रांची। राज्य के सबसे बड़े सरकारी मानसिक रोग अस्पताल RINPAS की ओपीडी में इलाज कराने आने वाले मानसिक रोगियों को निशुल्क दवा नहीं मिल पा रही है। मानसिक रोगियों के परिजन फार्मेसी से महंगी दवा लेने को मजबूर हैं। इसकी वजह RINPAS में अधिकतर दवा का स्टॉक खत्म हो जाना है। राज्य के सबसे बड़े सरकारी मानसिक रोग अस्पताल रिनपास की ओपीडी में राज्य और राज्य के बाहर से हर दिन पांच सौ से छह सौ की संख्या में मानसिक रोगी इलाज के लिए आते हैं। ओपीडी में मनोचिकित्सक मरीजों को देखकर दवा की भी सलाह देते हैं। परंतु इन दिनों ओपीडी के मरीजों को दो महीने का फ्री दवा नहीं दी जा रही है।
दरअसल, सरकार ने पिछले दिनों के प्रभारी निदेशक डॉ सुरेंद्र सोरेन की जगह डॉ जयति सिमलई को प्रभारी निदेशक बनाया। अब नए निदेशक ने पूर्व के निदेशक के समय दवा खरीदने के लिए किए गए टेंडर पर कई सवाल खड़े कर दिए और दवा की खरीद नहीं हुई। नतीजतन यह हुआ कि कई दवाएं स्टॉक से खत्म हो गईं और मानसिक रोगियों की परेशानी बढ़ गई। रिनपास के मनोचिकित्सक भी मानते हैं कि दवाओं की अनुपलब्धता का असर मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ रहा है।