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झारखंड

हजारीबाग : ‘नौनिहालों के कबाड़’ से मालामाल हो रहे कबाड़ी

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हजारीबाग : ‘नौनिहालों के कबाड़’ से मालामाल हो रहे कबाड़ी
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टीम एबीएन, हजारीबाग। आजीविका के बोझ तले दबे जिले में कई बच्चे कचड़े के ढेर में कबाड़ चुनने को मजबूर है। ऐसे बच्चे जिले में सर्व शिक्षा अभियान को खुली चुनौती दे रहे हैं। बच्चों के परिजन उन्हें स्कूल भेजने की जगह कूड़ा चुनने भेज देते है। गरीबी की मार और परिवार के पालन पोषण के लिए ये बच्चे अपना भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। ऐसे बच्चो का भविष्य तो बर्बाद हो रहा है लेकिन इनका इस्तेमाल कर जिले के कबाड़ी मालामाल हो रहे है। तेजी से फल फूल रहा कबाड़ का धंधा जिले में कबाड़ का धंधा बहुत तेजी से फल फूल रहा है। जिसमे जगह-जगह से कबाड़ चुनने के लिए छोटे बच्चो को लगा दिया गया है। मजे की बात यह है कि इस व्यवसाय को करने के लिए न तो किसी को लाइसेंस की जरूरत होती है और न ही किसी की अनुमति की आवश्यकता होती है। इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सिर्फ एक स्टाक रजिस्टर की जरूरत होती है। स्टॉक रजिस्टर में खरीद-बिक्री किए गए समान को दर्ज कर इस व्यवसाय को आसानी से किया जा सकता है। इस व्यवसाय में पुलिस और प्रशासन का कोई रोकटोक नहीं होता है। बेरोकटोक व बेखौफ कारोबार है जारी : जिले में दर्जन से भी अधिक कबाड़ के व्यवसायी हैं, जो बेरोकटोक व बेखौफ कारोबार कर रहे हैं। सूत्र बताते है कि कई कबाड़ी बिना सत्यापन किये चोरी का सामान भी बेधड़क खरीद लेते हैं। देखने में आया है की कबाड़ी बच्चों से चोरी के माल खरीदने से नहीं घबराते हैं। वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किशोरों को चोरी करने के लिए प्रेरित करते हैं। साथ ही इन बच्चों पर पारिवारिक नियंत्रण नहीं होने के कारण नशे के गिरफ्त में आ जाते है और अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए चोरी करने लगते है। कार्रवाई नहीं होने से है हौसले बुलंद : कबाड़ का व्यवसाय करने वालों के खिलाफ पुलिस के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं होती। जिसकी वजह से इनके हौसले बुलंद हैं। सूत्र बताते है कि ये बेधड़क चोरी के सामानों की खरीद बिक्री के काम में लगे हुए हैं। यदि पुलिस के द्वारा ऐसे व्यवासियों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी जो जिले से चोरी हुए कई समान इनके पास से बरामद हो सकते है। जिले में कितने कबाड़ी, किसी के पास रिकॉर्ड नहीं : कबाड़ी कम में कबाड़ का सामान खरीद कर थोक में अधिक रकम कमाते हैं। खासबात तो यह है कि जिले में कितने कबाड़ी हैं यह भी किसी के पास रिकार्ड में नहीं है। ये कबाड़ी कम दिनों में लाखों रुपए का कारोबार कर रहे हैं और गरीब बच्चो को कार्य में लगाकर उनका भविष्य अंधकारमय कर रहे हैं।
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