झारखंड
कोडरमा : आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं ने मनाया राष्ट्रव्यापी मांग दिवस
ABN Bureau
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10 Jul, 2022
•
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टीम एबीएन, झुमरीतिलैया (कोडरमा)। आॅल इंडिया आंगनबाड़ी फेडरेशन (आइफा) के आह्वान पर 26 हजार वेतन देने, सेवानिवृत्ति के बाद 10 हजार पेंशन और ग्रेच्युटी देने, स्थाईकरण आदि मांगों को लेकर झारखंड राज्य आंगनबाड़ी सेविका सहायिका संघ (सीटू) के बैनर तले साहू धर्मशाला झुमरीतिलैया में राष्ट्रव्यापी मांग दिवस पर गोष्ठी आयोजित की गयी। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष शोभा प्रसाद ने की। गोष्ठी का उद्घाटन करते हुए संघ की प्रदेश अध्यक्ष मीरा देवी ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका 1975 से ही देश के सामने मौजूद सबसे बड़ी चुनौती, बच्चों में कुपोषण का सामना करते हुए देश की सेवा कर रही हैं। आज लगभग 27 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए जो समाज के हाशिए के वर्गों की महिलाएं ही नहीं बल्कि 8 करोड़ बच्चे और 2 करोड़ गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए संविधान में गारंटीकृत हमारे अधिकारों पर अपनी आवाज उठाने का समय है। उन्होंने कहा कि हेमन्त सरकार ने 10 हजार मानदेय का वादा किया था, जो पूरा नहीं किया गया। जिसके खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन खड़ा करना होगा। मुख्य अतिथि मजदूर नेता और सीटू राज्य कमेटी सदस्य संजय पासवान ने कहा कि आईसीडीएस योजना लंबे समय से धन की कमी से जूझ रही है, लेकिन दुर्भाग्य से केंद्र सरकार ने तो ऐसे उपाय किए हैं जो आईसीडीएस को ही खत्म कर देगा और भारत के संविधान द्वारा गारंटीकृत बच्चों और आंगनबाड़ी कर्मियों के सभी बुनियादी अधिकारों से वंचित कर देगा।
कॉरपोरेट्स के हाथों आईसीडीएस को देने व निजीकरण का सीटू करेगा विरोध : नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत आईसीडीएस को लाने से प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) की अवधारणा को ही खत्म कर देगी, जिसके परिणामस्वरूप प्री-स्कूल शिक्षा का निजीकरण होगा। जिलाध्यक्ष शोभा प्रसाद और सचिव वर्षा रानी ने कहा कि काम का बोझ कई गुना बढ़ा दिया गया है, आसमान छूती कीमतों के बावजूद पिछले चार वर्षों में मानदेय नहीं बढ़ाया गया। एक वर्ष पूर्व भरा हुआ दो गैस सिलेंडर दिया गया, लेकिन अब गैस भराने के पैसे नहीं दिये जा रहे हैं। बाजार में कीमतें आसमान पर है, लेकिन पूर्व के दर से जो बाजार दर से काफी कम है, पर पोषाहार खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने पिछले छह माह से मानदेय नहीं दिया है। पोषण ट्रैकर ऐप पर काम करने के लिए न मोबाइल दिया जा रहा है और न ही डेटा पैक भराया जा रहा है, इसलिए संघर्ष ही रास्ता है। गोष्ठी को उर्मिला देवी, मंजू मेहता, कुमारी अनामिका, बेबी कुमारी, संध्या बर्नवाल, रेणु देवी आदि ने संबोधित किया। इनके अलावा कार्यक्रम में रीना, कांति, आशा, देवंती, अनीता, ललीता, गुंजा, रंजु गुप्ता, सुनैना, पिंकी, उषा, मंजू, विद्या, संजू मेहता, मंदाकिनी, पूनम, संगीता, गीता सहित दर्जनों सेविका सहायिका मौजूद थी।
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