टीम एबीएन, रांची। राजधानी में सड़क हादसों में कमी लेकिन मौत के आंकड़ों में इजाफा हुआ है। इसके पीछे इयर बड्स का इस्तेमाल और शराब सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आई है। रोड सेफ्टी की अनदेखी और छोटी सी लापरवाही से वो मौत के आगोश में समा रहे हैं। राजधानी रांची में हर महीने औसतन 40 से 45 लोग अपनी जान सड़क हादसों में गवां देते हैं। मरने वालों में सबसे ज्यादा संख्या युवाओं की है। अब सड़क हादसों के पीछे सबसे बड़ी वजह ड्रंक एंड ड्राइव को माना जाता रहा है। लेकिन अब सड़क हादसों की एक और बड़ी वजह सामने आई है जो युवाओं के मौत का कारण बन रही है। रोड सेफ्टी विभाग के आंकड़ों के अनुसार कानों इयर बड्स या हेडफोन लगाकर ड्राइव करने वाले युवा सड़क हादसों का ज्यादा शिकार हो रहे हैं। राजधानी में सड़क हादसों का ग्राफ गिरा है लेकिन सबसे हैरानी की बात यह है कि मौत के आंकड़ों में कोई कमी नहीं आई है। आमतौर पर हर बार साल के तीन महीने नवंबर, दिसंबर और जनवरी में सड़क हादसों में बढ़ोतरी दर्ज की जाति है। इसके पीछे कई वजहें जैसे कुहासा और नए साल का जश्न होता है। लेकिन इस वर्ष जनवरी महीने के बाद के अगले 6 महीने में भी सड़क हादसों में होनी वाली मौत का औसत जनवरी जैसे ही बना हुआ है। जानकार बताते हैं कि इसके पीछे सबसे बड़ी वजह ड्रिंक एंड ड्राइव है। लेकिन सड़क हादसों के पीछे एक और बड़ी वजह सामने आई है वह हेडफोन और इयर बड्स का इस्तेमाल। हाल के दिनों में हेडफोन और इयर बड्स लगाकर वाहन चलाने का चलन काफी बढ़ा है। यही वजह है कि पिछले 6 महीने में सड़क हादसों में जान गंवाने वाले अधिकांश लोग या तो नशे में ड्राइव कर रहे थे या फिर उन्होंने कानों में हेडफोन लगा रखा था।