टीम एबीएन, लोहरदगा। सुंदरी देवी सरस्वति शिशु मंदिर में विदाई सह अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। मौके पर भूतपूर्व आचार्य राजकुमार दीक्षित का अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ सरस्वती वंदना के साथ हुआ। अतिथि परिचय प्रधानाचार्य सुरेशचन्द्र पाण्डेय ने किया। मौके पर श्री पाण्डेय ने कहा कि गुरु का जीवन तप त्याग से भरा होता है। हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।
गणेश साहु द्वारा आचार्य के कुशल कार्यकलाप एवं जीवनशैली पर विस्तृत रूप से चर्चा किया गया। लगातार 35 वर्षों तक ईन्होंने विद्यालय में सेवा प्रदान की। अनुशासन प्रिय आचार्य के रूप में ये जाने जाते हैं। हिन्दी भाषा के समृद्धि एवं सशक्तिकरण में उनका अमूल्य भोगदान रहा। कृष्णा-प्रसाद ने आशीर्वचन प्रदान किया गया तथा कर्म पथ पर बढ़ने की प्रेरणा दी। नंदकिशोर साहु ने अपना विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा श्री दीक्षित कर्मठ एवं सक्रिय आचार्य के रूप में योगदान देते हुए विद्यालय को एक सम्यक गति प्रदान करते हुए जिले में विद्यालय का नाम सर्वोपरि किया। हम उनके कृतार्थ हैं तथा साधुवाद प्रदान करते हैं। मौके पर सृष्टि कुमारी तथा सहेलियों के द्वारा संस्कृत गीत प्रस्तुत किया गया। मंच संचालन अशोक सिंह ने किया। मौके पर समिति सदस्यों ने आचार्य राजकुमार दीक्षित को रामायण पुस्तक व शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। मुख्य वक्ता के रूप में मनोज दास ने कहा कि सदाचार ही आचार्य का जीवन होता है। अत: हमें सदैव सत्य एवं सदाचार के पथ पर चलना चाहिये। आचार्य का जीवन विद्यालय के विकास में मील का पत्थर साबित हुआ है।
समिति के अध्यक्ष शशिधर लाल अग्रवाल, सदस्य शोभा देवी एवं कृष्णा प्रसाद उपस्थित थे। मौके पर बच्चों को मार्गदर्शन देते हुए सेवानिवृत्त शिक्षक राजकुमार दीक्षित ने कहा विद्यालय हमारा कर्मभूमि एवं धर्मभूमि है। हमें कर्म व धर्म दो अमूल्य रत्नों को अपने जीवन में आत्मसात करने की आवश्यता है। तभी यह मानव जीवन सार्थक होगा व सफल होगा। गुरुभक्त आरुणी के रोचक कथा के माध्यम आज्ञाकारी शिष्य बनने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम का समापन वन्दे मातरम के साथ हुआ।